Dark Web

Exploring the Dark Side of the Internet ft. Amit Dubey | Digital Crime Exposed | Dark Web | OTP Hack

Shubhankar Mishra

Summary

इस वीडियो में, अमित दुबे ने इंटरनेट पर साइबर क्राइम की बढ़ती समस्या और इसके खतरों पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि व्यक्तिगत डेटा को साझा करने से हम अनजाने में साइबर अपराधियों के लिए अवसर पैदा करते हैं। डार्क वेब पर हैकिंग, संपर्क किलर हायर करना और अन्य अवैध गतिविधियों का संचालन होता है, जिसके बारे में जागरूक रहना अत्यंत आवश्यक है। लोगों को अपने निजी डेटा की सुरक्षा के लिए सतर्क रहना चाहिए, विशेषकर सोशल इंजीनियरिंग तकनीकों के खिलाफ, जैसे कि OTP चुराने के लिए कॉल मर्जिंग का उपयोग। इसके अलावा, WhatsApp जैसे संचार ऐप्स पर एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन महत्वपूर्ण है, लेकिन यदि डिवाइस सुरक्षित नहीं है, तो जानकारी लीक हो सकती है। अंत में, लोगों को ऑनलाइन मुफ्त में उपलब्ध जानकारी के प्रति संदेह करने और अपने डेटा को सुरक्षित रखने के महत्व पर जोर दिया गया। यह वीडियो साइबर सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता विकसित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।

Transcript
कितना बड़ा खतरा आज की इंटरनेट की दुनिया में है। क्राइम शुरू ही उस समय हो गया जैसे ही आपने इंटरनेट से कनेक्ट हो। अब आप जब इतना ज्यादा किसी जगह पर समय व्यतीत करोगे तो क्रिमिनल भी आपको वहीं मिलेगा। डार्क वेब क्या है? कहां मिलता है। डार्क वेब पे वो हर इललीगल चीज होती है जो आप कल्पना कर सकते हो। कॉन्टैक्ट किलर हायर होते हैं एंड हैकर्स हायर होते हैं। एंड उसमें एक औरत को वो लोग लेके आए थे जिंदा। और उसको फिर जिंदा कुक किया था। कि सबसे ज्यादा इस तरह का कंटेंट इंडिया से अपलोड होता है। आप क्या यह कह रहे हो कि मेरा iPhone मेरी आवाज सुन रहा है, रिकॉर्ड कर रहा है। अच्छा आप iPhone में आवाज तो छोड़िए लोकेशन तक बंद नहीं कर सकते। क्योंकि मैं बड़ा सावधान रहता हूं। मैं किसी लिंक पे क्लिक नहीं करता हूं। मैं किसी को ओटीपी नहीं देता हूं। मेरा फोन किसी के पास जा नहीं रहा है। ओटीपी कभी दिया नहीं जाता। ओटीपी हमेशा लिया जाता है। ओटीपी हैक करने के 12 तरीके हैं। अभी तरीका बताते हैं। आधार कार्ड से क्या-क्या हो सकता है? मैं नागपुर कमिश्नरेट गया था ट्रेनिंग देने। और यह बिल्कुल नई चीज है जो मैंने आज तक किसी पॉडकास्ट में नहीं बताई। इसलिए बता रहा हूं क्योंकि अभी 2 दिन पहले हुआ है। तो बोले साहब वो फोन चोरी होता है और उसके तुरंत बाद यूपीआई से पैसे निकल जाते हैं। मैंने कहा iPhone हां iPhone में भी हो रहा है। अब उसे वन टाइम व्यू फोटो आती है। क्या वो आप व्यू कर सकते हो बाद फोन कॉल पर दो लोगों का वीडियो कॉल पर रोमांस करना क्या सेफ है? या वो डाटा लीक हो सकता है। फोटो भेजो। देखते ही डिलीट कर दूंगा। मेरे पास पुलिस ऑफिसर्स के बच्चों की रिक्वेस्ट पड़ी हुई है। एक बार डाटा इंटरनेट पर गया तो गया। फिर वो डिलीट नहीं होता। एक आम इंसान उसको इसमें क्यों डरना चाहिए? आपका डर इस वजह से नहीं है कि वो डाटा ले रहा है। आपका डर इस वजह से है कि आपको पता नहीं कि वो डाटा ले रहा है। फोन हैक नहीं होता इंसान हैक होता है। यही होता है। अभी एक पुणे में एक बंदा था उसको Facebook पे ऐड आता है कि एक लेडी ने ऐड डाला है कि मुझे जो प्रेग्नेंट करेगा उसको मैं ₹25 लाख दे दूंगा। उसी को क्यों आ रहा है? फोन में डिलीट करने से या रिसेंटली डिलीट करने के बाद डाटा पड़ा होता है। डिलीटेड डाटा रिकवर होता है। बहुत सारी ऐप की लिस्ट आपको भेज दूंगा। दो बार फोन डिफॉर्मेट कर शायद नहीं होता है। हां। मतलब मल्टीपल टाइम करोगे तो वो चांसेस कम होते हैं। ज्यादा ज्यादा। थोड़ी होशियारी हमने भी सीखी है। [हंसी] Apple एंडroid में ज्यादा सेफ कौन है? पेगासिस जब बना था तो सबसे पहले किसके लिए बनाया गया था? Apple के लिए। तो iPhone फिर भी एक टफ होते ये मिस कॉल से फ़ोन हैक हो रहा है। सारे फोन किसी [संगीत] ने हैक कर दिया। इज इट अ टफ वे ऑफ़ हैकिंग और इजी वे ऑफ़ हैकिंग? बट मिस कॉल से कैसे हैक? मतलब अभी मेरे मुंह से आप मत कहलवाइए। वरना कल के दिन Apple वाले नोटिस भेजेंगे। कई बार बड़े नेता कहते भी हैं विपक्ष वाले खासतौर पर कि सबके फोन सुने जा रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने। वो सच कह रहे हैं। सवाल उनको ये नहीं करना चाहिए कि मेरे फोन हैक है। उनको ये बोलना चाहिए कि किसने हैक किया है। [हंसी] जैसे हम मानते हैं कि WhatsApp कॉल सेफ होती है। फोन कॉल के तुलना में। अगर किसी महिला के प्राइवेट वीडियोस को उसके बॉयफ्रेंड ने या अनइटेंशनली उसके फोन के थ्रू वायरल हो जाते हैं। क्या करना चाहिए? एक वेबसाइट है। हमसे बहुत लोगों ने कहा कि चोरी फोन का फायर मार्केट हो जाता है दिल्ली में और आईएमआई भी मिटा देते हो। बिल्कुल चैट जीपीडी से पूछना कि मेरा फोन चोरी हो जाए तो मैं क्रिमिनल को कैसे पाऊं? तो उसमें 1520 तरीके बताएगा। लास्ट में देखा कि अब फोन चोरी हो ही गया है तो वो नॉर्मली ओलएक्स पे बिकता है या गफार मार्केट में [हंसी] बिकता है। तो मैं आपको उस शॉप का नाम भी बता सकता हूं। बट फोन वापस मिलते हैं ये सब बट करती है हमारे देश में पुलिस प्रशासन जैसा काम। हम दावा करते हैं कि इंडिया सबसे ज्यादा कैशलेस इकॉनमी है। किसी दिन अगर ये हमारा सिस्टम हैक हो गया। क्या हम बर्बाद हो जाएंगे? तो मतलब आपसे बात करके मुझे एहसास हो रहा है कि मैं अपना फोन कूच के फेंक दूं। बंद करने से कुछ नहीं। क्रिमिनल तो आपको मारेगा ही। आपकी जिम्मेदारी है बॉडी संभालिए। चैन से सोना है तो जाग जाइए। सोइए मत। [हंसी] आज की दुनिया में सब कुछ ऑनलाइन है। आपको मोहब्बत चाहिए ऑनलाइन मिल जाएगी। आपको पैसा चाहिए आप ऑनलाइन ट्रांसफर कर सकते हैं। इसी तरह मुसीबत जो है वो भी अब ऑनलाइन हो गई है। यह इंटरनेट जिसने हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है। जिसने हमें पूरी दुनिया से जोड़ दिया है। यह इंटरनेट की दुनिया में बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जो आप जैसे भोले भाई लोगों को नहीं पता। अब मुसीबत ऑनलाइन आती है। और इसी ऑनलाइन मुसीबत को समझने के लिए आज हमारे साथ एक साइबर एक्सपर्ट है अमित दुबे जी या कहें कि साइबर दुबे जी। थैंक यू। थैंक यू सो मच। [हंसी] तो दुबे जी इंसान ना डूबे साइबर क्राइम में। उसके लिए आप दुनिया की मदद करते हैं। उसके लिए हम एक नॉलेज की कश्ती बना देते हैं। [हंसी] भवसागर से पार हो जाए। पुलिस, प्रशासन, नेता सबकी मदद करते हैं। लेकिन मेरा एक कॉमन क्वेश्चन है कि मेरे जैसा एक आम इंसान जो एक साधारण जिंदगी जी रहा है। वो जो पहली बार सुनता है साइबर क्राइम या ये बड़े-बड़े लफ्ज़ सुनता है तो वो उसको अजीब सा फील होता है। उसको लगता है ये सब क्या है? हम क्यों साइबर क्राइम को भारत जैसे देश में गंभीरता से लेना चाहिए। और कितना बड़ा खतरा आज के इंटरनेट की दुनिया में है। हर डिवाइस हर वह चीज जो हमारे आसपास है जो सहूलियत हमें दे रहा है। वह बैंक, वह मोबाइल, वो लैपटॉप कितना बड़ा खतरा हमारे लिए। देखिए सबसे पहले तो साइबर क्राइम को मैं जो ट्रेडिशनल क्राइम है उससे अलग नहीं मानता। आज की डेट में कोई भी क्राइम होता है उसमें साइबर स्पेस का इन्वॉल्वमेंट होता ही है। चाहे वो मर्डर हो, चाहे वो किडनैपिंग हो, चाहे वो फाइनेंसियल फ्रॉड हो, चाहे वो टेरेस अटैक हो, चाहे वो स्पनाज हो, कुछ भी हो बिना साइबर स्पेस के इंगेजमेंट्स के नहीं होगा। तो हम जो भी केसेस इन्वेस्टिगेट करते हैं उसमें साइबर एंगल आता है। तो जो मेरा रोल है वो है साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन। कि ढूंढो तो क्रिमिनल कौन है? और आप मान के चलिए कि जितने भी केसेस हैं कि हमें एक बॉडी मिली है ढूंढिए। सबसे पहले साइबर से स्टार्ट होगा। आसपास पूछने वाले से भी ज्यादा जरूरी है कि आप साइबर एंगल पे देखिए कि कौन डिजिटल फ्रूटमेंट छोड़ के गया है और वह साइबर स्पेस में मिलते हैं जिससे हम उस तक ढूंढ के पहुंचते हैं। आमतौर पर जब आप साइबर क्राइम की बात करते हैं तो लोगों को लगता है फाइनेंसियल फ्रॉड जो आम जनता जिससे प्रभावित जामताड़ा वाला पर वो सिर्फ 10% एंगल है उस परिस्थिति का क्योंकि हमारी जिंदगी में सुबह से शाम तक 18 घंटे हम फोन पर हैं। जब हम सो रहे हैं तभी नहीं है। हम वरना फोन हाथ में है ही हम एक देश में यदि सोशल मीडिया बंद किया तो सरकार पलट दी उन्होंने और लोग जिंदा जला दिए इस हद तक अग्रेशन आ गया सोचिए कि हवा पानी से भी ज्यादा जरूरी है आज की डेट में सोशल मीडिया और इंटरनेट अब आप जब इतना ज्यादा किसी जगह पर समय व्यतीत करोगे तो क्रिमिनल भी आपको वहीं मिलेगा आपको रियल वर्ल्ड में आप इंटैक्ट कर कहां रहे हो अबकि वो सोशल मीडिया के थ्रू आ रहा है वो इंटरनेट के थ्रू आ रहा है वो वेबसाइट के थ्रू आ रहा है वो फोन कॉल के थ्रू आ रहा तो हम कह रहे हैं वो साइबर क्राइम है। पर वो बेसिकली तो आपको हार्म करने ही आ रहा है। चाहे वो पैसे का हो, चाहे वो रेपुटेशन का हो, चाहे वो किसी तरीके से नुकसान पहुंचाए। क्राइम शुरू ही उस समय हो गया जैसे ही आपने इंटरनेट से कनेक्ट हुए। क्योंकि जैसे ही आप इंटरनेट पर कनेक्ट होते हो आपकी चीजें एक्सपोज होना शुरू हो जाती हैं और वहां से क्रिमिनल आपके बारे में आईडिया लेकर आपके खिलाफ अटैक तैयार करता है। तो इस वजह से साइबर क्राइम सीरियसली लेना बहुत जरूरी है। जितना हम ज्यादा समय व्यतीत करेंगे उतना हमारे लिए रिस्क बढ़ता चला जाता है। मैंने शिव प्रकाश शुक्ला मर्डर केस को जब सुना था हम तो यूपी एसटीएफ ने कहा था कि हमने फोन के जरिए उसे ट्रैक किया था और फिर ठोक दिया था। हम्। अतीक अहमद का जो लड़का था जिसे झांसी में एनकाउंटर हुआ। हम् हम् उसमें जब हमने एक्सपर्ट्स के साथ इंटरव्यूज किए तो उन्होंने कहा कि Netflix को उसने लॉग इन किया था उसे मैं जहां से ट्रैक हुआ और फिर वहां से उसका एनकाउंटर हो गया। इसी से रिलेट करके आप कह रहे हो कि हर अपराधी को आप साइबर आप बिल्कुल जैसे कि मैं इसी तरह इसी एंगल में एग्जांपल दूं कि एक कॉल आता था मुझे एक किसी व्यक्ति का और वो कॉल करके बोलते थे कि अमित जी रूही अब इस दुनिया में नहीं रही और काट देते थे। तो दो-तीन बार जब कॉल आया तो मुझे समझ नहीं आया कि ऐसा कौन है? कोई प्रैंक तो नहीं। मैंने कॉल बैक किया। मैंने कहा सर क्या प्रॉब्लम है? बोले नहीं नहीं आपको सिर्फ यह बताना था कि रूही अब इस दुनिया में नहीं है। तो मैं बोले कौन रूही? और उसके बाद बंदा रोने लगा। बोला रूही मेरी बेटी थी। 15 साल की थी और उसने सुसाइड पुलिस कहती है कि उसने सुसाइड किया है। और मुझे कोई कारण समझ में नहीं आता कि 15 साल का कोई बच्चा सुसाइड क्यों करेगा। तो मैंने कहा बताइए मेरे से क्या मदद चाहते हैं? बोले आप उसे बस बता दो कारण क्या है? और यही केस एक्सजेक्टली ये केस अभी मुझे देहरादून से भी आया है। पर मैं उसका जिक्र इसलिए नहीं करना चाहता क्योंकि अभी बिल्कुल है और मैं नहीं चाहता कि लिंक करें लोग। तो मैंने कहा ठीक है आप मुझे मैं थाने में बात करता हूं। मैंने एसएससी से बात की। मैंने कहा साहब क्या प्रॉब्लम है? बोले नहीं सुसाइड नोट है। उसमें लिखा है कि वो सुसाइड कर रही है। तो मैंने कहा ठीक है फिर भी आप मुझे तसल्ली के लिए लैपटॉप मोबाइल फोन भेज दीजिए। मैं इन्वेस्टिगेट करता हूं। देखता हूं क्या कारण है। उन्होंने लैपटॉप मोबाइल फोन भेजे। मैंने सारा डाटा एनालाइज किया। मुझे कुछ ऐसा नहीं मिला। फिर मैंने मोबाइल फोन में डिलीटेड डाटा रिकवर किया। जब डिलीटेड डाटा रिकवर करते हैं तो आपको कुछ चैट सरफेस पर आ जाती हैं जिसमें मुझे दिखाई दिया कि कोई नागेश करके लड़का है जिसके संग कुछ चैट हुई है। फ्रेंडली है बहुत कोई ऐसी सस्िशियस नहीं है। बट लगा कि ये क्लोज है। उस नागेश का मैंने सोशल मीडिया निकाला। फिर मैंने सोशल मीडिया पे इस लड़की का भी एनालाइज किया कि कितना एक्टिव थी, क्या थी। तो बड़ा पॉजिटिव सी लड़की थी। फिर उसके क्लोजेस्ट फ्रेंड निकाले। उनसे बातचीत शुरू की। नागेश का जब हमने सोशल मीडिया देखा तो पता पड़ा वो फेक है क्योंकि उसके जो फ्रेंड सर्किल है वह इंडिया के बाहर है मोस्टली और वो लोकेशन वो यहां दिखा रहे हैं अपनी तो फिर हमने उसके आईपी एड्रेसेस निकलवाए जो वीपीए निकले फोन नंबर का केवाईसी निकलवाया तो वो भी फ्रॉड निकला किसी उड़ीसा के किसान के नाम पर था और यहां चीजें ट्विस्ट होना शुरू हुई कि मतलब गड़बड़ा है और जो नागेश का प्रोफाइल है वो 17 साल के लड़के का है 17 इयर्स ओल्ड किड फिर मैंने इसका सीडीआर निकलवाया तो कोई कॉल नॉर्मल कॉल ही नहीं लगाया उसप उसने मतलब कि सिर्फ इंटरनेट एक्सेस कर रहा है और वो भी वीपीए यूज़ करके तो हम लोग ऑलमोस्ट ब्लॉक हो चुके थे तब मैंने जब आईपीडीआर उसका निकलवाया करीब 3 महीने का आईपीडी निकलवाया आपको पता है एक एक दिन का मैं आपका आईपीडीआर निकलवाऊं आईपीडीआर इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल्स रिकॉर्ड जैसे आप सीडीआर होता है ना कॉल डाटा रिकॉर्ड्स कि आप किसको कॉल लगा रहे हो कितनी देर कॉल की कब कॉल की ड्यूरेशन क्या था लोकेशन क्या थी इसको बोलते हैं हम कॉल डाटा रिकॉर्ड्स लेकिन यह तब बनता है जब आप नॉर्मल कॉल लगाते हो। जब आप इंटरनेट कॉल लगा रहे हो और WhatsApp कॉल लगा रहे हो और इंटरनेट एक्सेस कर रहे हो उस समय आपका आईपीडीआर रिकॉर्ड्स बनते हैं। उसको बोलते हैं आईपी डिटेल्स रिकॉर्ड। तो ऑपरेटर से आप वो भी मांग सकते हो। यदि मैं आपके दिन भर का आईपीडीआर निकालूं जैसे कोई व्यक्ति जो बहुत एक्टिव है इंटरनेट पर तो 30 से 400 रिकॉर्ड निकलेंगे। अब यदि मैं एक महीने का निकाल रहा हूं तो आप समझ सकते हो कितने सारे रिकॉर्ड हैं। उसमें एनालाइज करना बंदे का पैटर्न कि ये कौन हो सकता है और कहां होगा। यह साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन तो मैं एनालाइज करता जा रहा था। करता जा रहा था। अचानक मेरा एक लिंक पर दिमाग अटका। वो था डोमिनोज की वेबसाइट। मैंने कहा इसका मतलब इसने डोमिनोज पिज़्ज़ा खाया है। मैंने तड़ से वो जो टाइम और डेट था उसके बेस पर डोमिनोज को रिक्वेस्ट भेजी कि इस टाइम पर इस डेट को इस नंबर से डोमिनोज़ का आर्डर हो सकता है क्योंकि वो एक्सेस हुआ वेबसाइट। क्या हुआ था ऑर्डर? और यदि हुआ था तो फिर डिलीवर का हुआ था। तो उन्होंने बता दिया हां हुआ था। डिलीवरी एड्रेस दे दिया। पुलिस ने वहां रेट डाली हैदराबाद में। 53 साल का एक बंदा मिला उस जगह पे जिसने 17 साल के लड़के का प्रोफाइल बना के 15 16 लड़कियों को ट्रैप कर रखा था। तो आप साइबर स्पेस में और जब यह केस मैंने सुनाया रेडियो पर जब मेरा शो आता था मेरे पास कम से कम 15 16 रिक्वेस्ट आई उसके बाद कि मेरा बच्चा है वह ट्रेन से कट गया। मुझे नहीं पता कि वो क्यों इसने ऐसा किया। मेरा बच्चा है घर छोड़ के भाग गया। मुझे नहीं पता क्यों ऐसा किया। केसेस पे केसेस आए जा रहे थे और मैं सोच रहा था कि एक की भी एफआईआर नहीं है। एक की भी नहीं थी। तो आमतौर पर जो ये इतना बड़ा मैनेज है जिसको हम इग्नोर किए जा रहे हैं। और दिस हैज़ बिकम सच अ बिग थिंग नाउ। आप दिल्ली में देख लेना आपको कितने मिसिंग किड्स के केस मिल जाएंगे जो टीनएज किड हैं या जो इस ऐज ग्रुप में है और इसमें बहुत बड़ा रोल है। बट इस कहानी में सुसाइड का लॉजिक क्या था? सुसाइड क्यों किया उसने और लेटर कैसे आया फिर वो? ये जो बंदा था ये इसने लड़की के संग दोस्ती की पहले। कई बार कुछ ऐसा भी हुआ कि फाइनेंसियल ट्रांजैक्शंस भी करवाए। उसने हां उसकी जो एक फीस के लिए उसने क्रेडिट कार्ड यूज़ किया था वो वो भी हमें ट्रैप हुआ था क्योंकि वो उससे कुछ खरीदारी हुई थी। तो वह भी हमें एक फुटप्रिंट मिल गया था। फिर यह उस सिटी में ट्रेवल किया बंदा और उसने उस लड़की को बुलाया होटल में और उस दौरान कुछ ऐसा हुआ जिससे कि ये लड़की इतना डर गई और उसने कदम उठाया एंड शी कुड नॉट शेयर विद हर पेरेंट्स आल्सो। अब हमें बाहर की डिटेल्स तो नहीं मिले क्योंकि हमारा काम वहां खत्म हो जाता है। लेकिन मैं कह रहा हूं कि इस तरह के केसेस लगातार हो रहे हैं। हम इस केस को बोलते हैं साइबर ग्रूमिंग का केस। हम्म। सबसे ज्यादा लंदन में या यूके में होते हैं इस तरह के केसेस। वहां ये बहुत नोन तरह का क्राइम है साइबर ग्रूमिंग जिसके लिए बहुत एफर्ट लगाए जा रहे हैं कि बच्चे ना ट्रैप हो। एक पाकिस्तानी गैंग पकड़ा हुआ था जिसने कम से कम 55-56 लड़कियों को ट्रैप किया हुआ था। और फिर इतना बड़ा इशू बन गया पूरे यूके में कि स्कूलों में और उसमें अवेयरनेस कैंपेन चलने लगे। तो ऑनलाइन सोशल मीडिया के थ्रू दोस्ती करके इंपपर्सनेटेड प्रोफाइल से जिसमें किसी और की एनटी आप यूज कर रहे हैं। ट्रस्ट बिल्ड करके किसी को इस हद तक इंगेज कर लेना कि आप उस बच्चे को गायब ही कर दें। बट जैसे आज के दौर में सब कुछ ऑनलाइन है। आप Instagram, एक्स, Facebook पे आप अननोन लोगों से बातचीत करते हो, संवाद करते हो। यंग जनरेशन में सारी डेटिंग एप्स चली गई हैं। शादी के लिए भी सारी मैट्रिमोनियल साइट्स हैं। तो एक आम इंसान क्या-क्या फिर ध्यान रखें क्योंकि प्रोसेस तो यही है। शादियां ऑनलाइन ही हो रही है। डेट ऑनलाइन हो रही है। अभी जो हमें इशू बता रहा हूं ये आम इंसान का नहीं है। ये टीनएज बच्चों का है। आम इंसान शुरू होता है 18 साल के बाद। तब आप बन गए आम इंसान। तो सबसे पहले तो मैं कभी किसी भी आम इंसान को जो कि 18 से ऊपर है। क्योंकि चाइना में भी 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इंटरनेट एक्सेस रेगुलेट कर दिया गया। 45 मिनट कर दिया कि इससे ज्यादा मत दीजिए क्योंकि वह ऐज ऐसी है जब आप मैनपुलेट ईजीली हो गए। आपको पता है कि हम सब लोग मैं आम इंसान तक आ रहा हूं। हम सब लोग डेटा का प्रोडक्ट हैं। वी ऑल आर द प्रोडक्ट ऑफ़ द डेटा दैट हैज़ बीन फेड टू अस सिंस आवर बर्थ। बचपन से लेकर आज तक जो हम डाटा कंज्यूम करते रहे उसका हम प्रोडक्ट हैं। आप जहां पैदा हुए हैं उसकी जगह कहीं और आपका जन्म हो जाता इंडोनेशिया में या कहीं तो आज आप कुछ और होते। कोई दूसरा भाषा बोल रहा होता है, एक दूसरा खाना खा रहा होता है और जिंदगी भर प्राउडली बोलते हैं कि आई एम ए इंडोनेशियन। और हो सकता है कि आपका जन्म यहीं हुआ हो और जन्म के बाद आपको शिफ्ट कर दिया गया हो। 50 साल के बाद कोई आपसे बोलता है कि भाई साहब आप तो इंडिया में पैदा हुए थे यहां पर तो आप कंफ्यूज हो जाते हैं कि आप दरअसल है कौन? जो आप जिस चीज पर प्राउड कर रहे हो, जिस चीज को आप डिफेंड कर रहे हो, जिंदगी भर वो तो आप हैं ही नहीं। हम क्योंकि आप उस डाटा का प्रोडक्ट हैं जो आपको दिया गया। यही सवाल चैप्टर 13 भगवत गीता में भगवान कृष्ण से अर्जुन ने पूछा। उन्होंने कहा कि आप मुझे ज्ञान योग, भक्ति योग, कर्म योग पढ़ा रहे हो। पहले बताओ मैं कौन हूं? तो भगवान ने कहा तुम्हें क्या लगता है तुम अर्जुन हो? तुम तो अर्जुन के पहले भी थे। तुम तो अर्जुन के बाद भी होगे। इस वक्त तुम अर्जुन का रोल प्ले कर रहे हो। तो बोले क्यों? बोले इसलिए क्योंकि बचपन से लेकर आज तक जो डाटा तुमने कंज्यूम किया है तुम उसका प्रोडक्ट हो। टीचर से, पेरेंट्स से, सराउंडिंग से, चैलेंजेस से, दोस्तों से, रिलेटिव से यू बिकम आउट ऑफ इट। कर्ण की जगह जो होता है वह कर्ण ही बनता। तुम्हारी जगह जो होता वो अर्जुन ही बनता। तो ज्यादा भूलने की जरूरत नहीं है कि तुम अर्जुन हो। तुम अर्जुन हो ही नहीं। तुम इस समय अर्जुन को जी रहे हो। रोल प्ले कर रहे हो। तो अर्जुन ने कहा तो फिर मैं कौन हूं? तो उन्होंने दृक दृष्टि विवेक का सिद्धांत दिया जो मांडूक उपनिषद में मिलता है। चैप्टर 13 में भी रेफरेंस है उसका। जिसके थ्रू आप यह पहचान सकते हो कि आप दरअसल हो कौन और द मोमेंट यू रियलाइज कि आप कौन हो तो फिर आप अपने को एज अ विटनेस देखते हो साक्षी भाव में कि मैं तो यह हूं ही नहीं। मैं तो इसको देख रहा हूं करते हुए। द मोमेंट यू गेट टू नो दैट फिर ना तो आपके संग कोई साइबर क्राइम हो सकता है ना कोई आपको धोखा दे सकता है। इनफैक्ट आप इतना क्लीन हो चुके होते हो। और देखिए मैं आपको एग्जांपल देके बताऊंगा होता कैसे है। जब किसी के संग कोई साइबर क्राइम होता है ना दो 3 मिनट 5 मिनट के बाद वो कहता है अरे यार अमित जी वो ओटीपी दे दिया अरे यार वो क्यूआर कोड स्कैन कर दिया अरे यार वो लिंक क्लिक कर दिया अरे यार वो ऐप इंस्टॉल कर दिया तो 3 मिनट बाद 3 मिनट पहले क्यों नहीं समझ में आ रहा था उसको 3 मिनट पहले भी तो वही इंटेलेक्ट था ना उसका उतना ही बुद्धिजीवी था वो 3 मिनट पहले तो इन्फ्लुएंस था क्योंकि 3 मिनट बाद उसने अपने आप को साक्षी भाव से देखा मैं आपकी गलतियां देख सकते हो आप मेरी गलतियां देख सकते हो यदि मुझे अपनी गलतियां देखनी है तो मुझे अपने आप को एस अ विटनेस देखना पड़ेगा तब मैं देख पाऊंगा पर हम हमेशा डाटा के इन्फ्लुएंस में होते हैं। जैसे ही मैं फिटनेस देखता हूं, मैं रियलाइज़ कर लेता हूं कि हां यार यह गलती मैं कैसे कर सकता हूं? बस इतना ही सा अंतर है। अब आप Play Store खोलिए अपना और उसमें कोई भी ऐसी एप्लीकेशन जो आपके फोन में है वो सर्च करना उसमें। मान लीजिए आप Facebook या Instagram सर्च करते हैं। Instagram होगा। उस पे लिंक आएगा। उस पे क्लिक करना तो नीचे एक ऑप्शन आएगा सी डिटेल्स करके। उस सी डिटेल्स पर क्लिक करेंगे तो आपको यह बताया जाएगा कि Instagram आपके फोन से क्या-क्या डाटा लेता है। उस डाटा को एक बार पढ़ना और यह ग्राफिक्स में दिखाना। सबसे पहले क्या है कि मैं आपके हर सेकंड की लोकेशन ले लेता हूं। जीपीएस, एलआईडी, आईपी एड्रेस, एवरीथिंग। फिर मैं आपके हेल्थ रिकॉर्ड्स कितना आप सोफे पे बैठते हो, सीढ़ियां चढ़ते हो, दौड़ते हो, सब रिकॉर्ड कर लेता हूं। बेस्ड ऑन योर एज आई नो योर फिटनेस आल्सो। तो वह भी मैं प्रेडिक्ट कर सकता हूं कि आपको कौन सी बीमारियां हो सकती हैं। तीसरा आपके सारे फाइनेंसियल रिकॉर्ड्स कि आपने पैसा कहां दिया, किसको दिया, कब कैश विड्रॉल किया, कब कहां क्या लीगल इललीगल करने का गए? आई कैन एक्स्ट्राट दैट एज वेल। फिर आपका नेम, ईमेल एड्रेस, एड्रेस आपके घर का पता भी मुझे पता है। आपने इसमें से कोई भी इनेशन किसी एडिट बॉक्स के थ्रू Instagram या Facebook को कभी नहीं दी। वो कह रहा है मुझे मैं सब जानता हूं ये। और एड्रेस का मतलब लोकेशन नहीं। ये लोकेशन वो पहले ले चुका है। यदि आप एक बिल्डिंग में रह रहे हैं। 14th फ्लोर पे एड्रेस अलग है। 17 फ्लोर पे एड्रेस अलग है। जबकि जीपीएस लोकेशन एक ही है। सो एड्रेस इज़ डिफरेंट। दे नो टू दैट एक्सटेंट कि किस ब्लॉक में किस हाउस नंबर पे क्या एड्रेस है आपका। और उसके बाद आगे देखना तो वो कहेगा कि मैं आपका पॉलिटिकल और रिलीजियस बिलीव भी जानता हूं। मतलब आपने किसको वोट दिया वह भी मुझे पता है और आपका रिलीजन के प्रति क्या हार्ड सॉफ्ट व्यू है वह भी मुझे पता है एंड योर सेक्सुअल ओरिएंटेशन आल्सो एंड सेक्सुअल ओरिएंटेशन बोलता है सेक्स नहीं बोलता कि आप मेल फीमेल हो कहता मुझे पता है कि आपका एलजीबीटी क्यू प्लस कम्युनिटी के प्रति ओरिएंटेशन क्या है टू दैट एक्सटेंट कैसे पॉसिबल है ये आपने ना कभी कोई रिलीजियस वीडियो देखा ना आपने कोई पॉलिटिकल वीडियो लाइक किया कमेंट किया शेयर किया ना आपने कोई ऐसा हिंट दिया और यह ये मैं दो तीन चीजें नहीं बता रहा हूं। आप स्क्रॉल करते जाना देखते जाना। फिर आगे कांटेक्ट लेस पे क्रॉस करना। जैसे अभी अभी इस पे मैं आता हूं। पहले मैं चाहता हूं कि लोग देख लें और ये मैं नहीं बोल रहा। वो खुद ही बोल रहे हैं। मैं तो कह रहा हूं वहां जाके चेक कर लें। वो बता रहे हैं कि मैं ये ले रहा हूं। अब हम डिस्कस करते हैं कि वो जानता कैसे है। हां। ये आप जो जानना चाहेंगे। मेरा सवाल ये है कि एड्रेस समझ में आता है कि मेरा मोबाइल फोन इस घर पे ज्यादा समय रहता है। उसने एक ट्रैक कर लिया कि कैसे ट्रैक करेगा? मैंने आपको बड़ा अच्छे से समझाया। क्या ट्रैक कर रहा है वो? कि यही मेरा मोबाइल फोन था 40 अरे भाई आप ट्रैक करके लोकेशन ही तो ट्रैक कर रहे हो लोकेशन तो पहले ही ले रहा है वो आपकी जीपीएस सेल आईडी आईपी एड्रेस पर उसके उसप आपका एड्रेस नहीं मिल सकता मुझे यदि आपकी एक ही लोकेशन पे कितने एक बिल्डिंग में लोग रहते हैं 17 फ्लोर की बिल्डिंग है हर फ्लोर पे चार घर हैं 68 लोगों के एड्रेस अलग-अलग हैं हम और लोकेशन एक ही है तो और क्या ट्रैक कर रहा है वो बट रिलीजियस बिलीव या एलजीबिलिटी नहीं अभी एड्रेस कोई डिकोड करते हैं पहले एड्रेस स्टिल एक शायद ये फोन यहां रखा हुआ हां एक फ्लोर पे रखा होगा तो उसने एक एक अनुमान [हंसी] ऑल्टीट्यूड भी तो इसका मतलब है वो ऑल्टीट्यूड देख रहा है जैसेजैसे आप उसको डिकोड करोगे आपको समझ में आएगा कि किस हद तक वो जानता है क्योंकि वो आपका हेल्थ एंड रिकॉर्ड कैसे निकाला उसने कि आप सीढ़ियां कैसे चढ़ते हो क्योंकि आपका मूवमेंट ट्रैक कर रहा है ना हाथ में लेके क्या स्पीड है मूवमेंट आप क्या चल रहे हो तो जब ये सब कर रहा है तो एड्रेस तो मिल ही जाएगा ना अब आप सही जगह क्रैक कर गए करेक्ट या आपका वाईफाई आसपास कौन-कौन है उनसे भी करेगा बट उसको ये पता है ये ज्यादा जरूरी जरूरी है। फिर आपकी आवाें सुन रहा है। उसने कहा मैं आपकी सारी आवाें सुनता हूं। यदि आप कॉल रिकॉर्ड करते हैं तो मैं वो भी कॉपी करता हूं। यदि आप वॉइस नोट्स भेजते हैं तो वो भी मैं कॉपी कर लेता हूं। आप देखिए जो जो डाटा है उसका पॉलिटिकल बिलीव कैसे पता उसको? सोचिए जरा। मैं जानना चाहता हूं ये लाइक्स या तो सर्च हुआ। कौन सा वीडियो कितना कंज्यूम कर रहे हैं? देख रहे हैं। नहीं आप नहीं भी देखेंगे तब भी उसको पता। यार हम बात जो कर रहे हैं। एक्साक्ट्ली। अब मैं बताता हूं कैसे। तो जब कैंब्रriज वाला केस हुआ यूके में एक कंपनी थी कैंब्रriज जनरेटका Facebook वाला हां कंपनी ने क्लेम किया कि हम दुनिया में इलेक्शन मैनपुलेट करते हैं पैसा लेकर इलेक्शन मैनपुलेट कर देते हैं जैसे लास्ट यूएस इलेक्शन उन्होंने क्लेम किया जो एलेरी क्लिंटन और ट्रंप वाला था कि हमने मैनपुलेट किया बिहार इलेक्शन भी मैनपुलेट किया बहुत सारे क्लेम किए उन्होंने क्लेम किए सो आई एम जस्ट कोटिंग देयर स्टेटमेंट उस पर केस हो गया कंपनी में उनसे कहा कैसे करते हो बोले हम Facebook से डाटा लेते हैं। उस समय उनकी आईडियोलॉजी पता पड़ती है। उसके बाद उनको कंटेंट ऐसा दिखाते हैं बिकॉज़ वी ऑल आर द प्रोडक्ट ऑफ़ द डाटा। मैनपुलेट हो जाते हैं और गारंटी के संग करते हैं। ब्रेकट मैनपुलेट किया। उन्होंने कहा कि हां ब्रेक्सिट का जो डिसीजन हुआ यूके का वो 51 49% हुआ था। एंड दे सेड कि वी मैनपुलेटेड 67% ऑफ़ वोट। तो इसका मतलब वो भी मैनपुलेटेड डिसीजन था। उसके बाद कैमब्रिज एनाटिका बंद हो गई। Facebook पर भी केस हो गया। Facebook पर भी पेनल्टी लगाई गई। पर Facebook से कहा गया कि आप यह डाटा जो ले रहे हैं लेते रहिए। बता दीजिए लोगों को क्या ले रहे हैं। तो अब यह अंदर दिखा के बताया जाता है जो आपको आज तक आपने देखा नहीं। लोगों ने भी नहीं देखा होगा बट इट इज देयर। इंस्टॉल आप अंदर जाके चेक करेंगे तो दिखता है। एंड नॉट ओनली विथ Facebook। आई एम नॉट अगेंस्ट Facebook और Google और माय पॉइंट इज कि व्हाटएवर यू आर इंस्टॉलिंग यू शुड डेफिनेटली चेक कि वो आपका ले क्या रहा है। बस फिर आप यूज करो उसको। यू आर सेफ। पर आपको नहीं पता है तो यू आर अनसेफ। बट अब इसमें मेरा क्वेश्चन यह है जब मैं iPhone लेने आता हूं। iPhone पड़ता है ₹1.5 लाख का। ठीक है? फ़ आता है 10,000 का। 15,000 का Android फ़ चाइनीज़ फोन 25, 3000 के, OnePlus थोड़ा और अच्छा आ गया। Samsung थोड़ा और अपग्रेड हुआ। iPhone मेरा यह दावा करता है हम आपको सिक्योर रखते हैं। हम वो ताला लगा के उनका ऐड भी आता है। आप क्या यह कह रहे हो कि मेरा iPhone मेरी आवाज सुन रहा है। रिकॉर्ड कर रहा है। अच्छा आप iPhone में आवाज तो छोड़िए। लोकेशन तक बंद नहीं कर सकते। आप अपनी लोकेशन ऑफ कर सकते हैं iPhone में। नहीं कर सकते। इनफैक्ट आप किसी भी ऐसी डिवाइस पे जिसमें इंटरनेट एक्सेस है। अपनी लोकेशन ऑफ नहीं कर सकते। क्यों नहीं कर सकते? क्योंकि द मोमेंट यू आर कनेक्टेड टू सम सर्वर, द वेरी फर्स्ट थिंग गोज़ आउट फ्रॉम योर डिवाइस इज योर आईपी एड्रेस। पहली चीज जैसे ही आप इंटरनेट से कनेक्ट करेंगे, पहली चीज जो आपके फोन से बाहर जाएगी वो आपका आईपी एड्रेस है। जब तक वो IP एड्रेस सामने नहीं दिया जाएगा, आपका कनेक्शन बनेगा ही नहीं। और आपका आईपी एड्रेस ही तो आपकी लोकेशन है। तो फिर आप ऑफ क्या कर रहे थे? आजकल ये IPपी एड्रेस मिल जाए तो मैं आपकी प्रिसाइज़ लोकेशन निकाल दूंगा। या तो आप वाई-फाई में होगे या 5G में होगे। दोनों केसेस में आपकी सिग्निफिकेंट रेोल्यूशन पे आ जाएगी। तो आप ऑफ तो नहीं कर सकते। iPhone में तो यह भी ऑप्शन है कि आपका फोन ऑफ है तब भी आप उसे ट्रैक कर सकते हो। ऑफ होगा तब भी आप आई क्लाउड से ट्रैक कर लो। फोन कहां है आपका? तो जब फोन ऑफ है तब उसकी लोकेशन ऑफ नहीं हो रही है तो ऑन में कैसे कर लोगे आप? अब आते हैं दूसरी चीज पे। आवाजें सुनने की। ट्राई कर लीजिए। आप फोन रख लीजिए अपना iPhone यहां पे। और हम दोनों एक घंटे स्पेन के बारे में बात करते हैं और उसके बाद आपको भी स्पेन के टिकट ऑफर होने लगेंगे और मुझे भी स्पेन के टिकट ऑफर होने लगेंगे। ये तो मैंने भी देखा है कि अगर आप कोई चीज चर्चा करते हो किसी चीज के बारे में बात कर रहे हो कि नए चश्मे लेने हैं तो ऐड दिखने शुरू हो जाते हैं तो फिर ये तो प्रैक्टिकली प्रूवन और ये तो जब मार्क जुकर वर्ड से उसमें पार्लियामेंट में पूछा गया तो उसने एक्सेप्ट किया कि हां हम सुनते हैं एंड इट्स नॉट iPhone बेसिकली Facebook इज लिसनिंग और मेनी अदर एप्लीकेशनेशंस आर लिसनिंग बिकॉज़ आपने माइक्रोफोन एक्सेस दिया है उनको तो वो सुन रहे हैं और वो सुन सिर्फ सुनकर क्लास क्लासिफाई भी कर रहे हैं, एनालाइज भी कर रहे हैं, प्रोफाइलिंग भी कर रहे हैं। उनको यह भी पता है कि किस चीज का कॉन्टेक्स्चुअली क्या यूज़ हो सकता है। कि ये चीज से पॉलिटिकल आइडियोलॉजी निकाली जा सकती है। इस चीज से यह निकाला जा सकता है। आप सोच रहे हो उस तरह से मैपिंग होती है। बिकॉज़ आप कब रिलीजियस बात करेंगे? कब आप हेल्थ की बात करेंगे या कब आप पॉलिटिकल बात करेंगे? वो तो कभी भी हो सकता है। बट जैसे एक आम इंसान है। उसको इसमें क्यों डरना चाहिए? क्योंकि आम इंसान को लग रहा है भाई तू कर रहा है। करने दे। बिल्कुल नहीं डरना चाहिए। डर पता है किस चीज से है? हमें Facebook से क्या दिक्कत है? Facebook हमारी आवाज सुन रहा है। इतना खाली है। सुनता रहे। हां बिल्कुल मैं मैं जो कहना चाह रहा हूं कि आपका डर इस वजह से नहीं है कि वो डाटा ले रहा है। हम आपका डर इस वजह से है कि आपको पता नहीं कि वो डाटा ले रहा है। अब मैं दोनों का अंतर बताता हूं। आपको पता है कि पहले मैं एक स्पिरिचुअल कॉन्टेक्स्ट दूंगा। फिर आप समझ पाएंगे कि मैं क्यों इतना शिद्दत से बताना चाह रहा हूं। दुनिया में जितनी भी फिलोसफीस है ना वो टाइम और स्पेस में ट्रेवल करती हैं। हम आप किसी रिलजन में बात करेंगे तो भाई साहब गॉड से आप अभी नहीं मिल मिल सकते। जब आप मर जाएंगे तो आप उनसे मिल सकते हो। जब आप रेस्ट इन पीस का पत्थर लग जाएगा देन यू आर अलाउड टू मीट हिम। सो यू हैव टू ट्रेवल इन टाइम। अभी नहीं टाइम में ट्रेवल करेंगे तब आप मिल लेना। फिर एक फिलॉसफी कहती है कि अभी नहीं यहां नहीं मिल सकते। वहां मिल सकते हो। वो ऊपर कहीं सातवें आठवें माले पर है। उस उसमें जाके वो आप इंट्रोड्यूस हो जाओगे। सो यू हैव टू ट्रेवल इन स्पेस। फिर आप क्वांटम फिजिक्स पढ़ लेते हैं। मांडूक उपनिषद पढ़ लेते हैं। जो कहता है कि टाइम और स्पेस तो होता नहीं। टाइम और स्पेस तो माइंड की अवधारणा है। तो जब टाइम और स्पेस है ही नहीं तो फिर हम टाइम स्पेस में ट्रेवल कर ही नहीं सकते। तो फिर हमारी जर्नी है क्या? तो जो भारतीय दर्शन कहता है कि हमारी जर्नी है नहीं जानने से लेकर जानने तक। अभी आप नहीं जानते थे। अब आप जानते हैं जैसे आप जानते हो जादूगर देखा है आपने हम उसने एक लड़की का गर्दन काटी फिर गर्दन वहां चली गई वो लड़की चिल्ला रही है और आपको गूस बम पा रहे हैं कि यार ऐसे कैसे हो जाएगा फिर आप YouTube पे वीडियो देखते हो कि यार वो तो दो लड़कियां थी एक ऐसे लेटी हुई थी गंद थी पैर किसी और के तो आप कहते हो यार क्या बेवकूफ बना रहा है यार फिर उसने कहा ऐसे देखो हाथी गायब हो गया टक से हाथी गायब हो गया जब हाथी अरे हाथी कैसे गायब हो गया ताजमहल गायब कर दिया फिर आप YouTube पर वीडियो देखते अरे वो तो मिरर का रिफ्लेक्शन क्या बेवकूफ बना रहे हो। आप देख रहे हो जिस चीज पर आपको घूस बम पा रहे थे, जिस चीज पर आप थ्रिल कर रहे थे वो ऐसा हो जाता है क्योंकि नहीं जानने से जानने तक की यात्रा पूरी हो गई। जिस दुनिया में आप काम, क्रोध, लोभ, मोह, भयंकर में फंसे हुए हो वही आपको लगता है यार यह है सारा। यह बेवकूफी है। जैसे ही आप यह ट्रेवल कर लेते हो वो जादू खत्म हो जाता है। अब कोई भी साइबर क्राइम होता है, आपको नहीं पता कि यह डाटा बाहर है। और अब आपको एक कॉल आता है कि शुभंकर जी आपने 26 तारीख को एक पिज़्ज़ा ऑर्डर किया था और यह ₹1684 का बिल आया था। यह टॉपिंग्स थी और एक्स्ट्रा चीज और गार्लिक ब्रेड और कोक भी थी और हां यार बिल्कुल ऑर्डर तो किया था यार। अरे सर बधाई हो सर। मॉरीशस की ट्रिप लगी आपकी तो अभी क्लेम कर लीजिए। यह आप एप्लीकेशन इंस्टॉल कीजिए और अभी आपको आ जाएगा। आप सोचो कि यार इतनी सारी डिटेल किसी और को कैसे पता हो सकती है? ये तो मुझे ही पता है या डोमिनोज को पता है। पर अब आपको पता है कि डोमिनोज का डाटा तो लीक हुआ है। नाउ यू नो। तो उसी को अबे यार बेवकूफ मत बनाओ यार। बिकॉज़ यू नो। यदि आप नहीं जानते शुभंकर जी आप 24 तारीख को रेडिसन होटल में थे। फलाने के संग कॉफी कर पी रहे थे। इसको कैसे पता? अब मैंने बताया कि आपकी फोन में 75 एप्लीकेशन है जो आपकी लोकेशन ले रही हैं। अरे यार कुछ और बताओ। इफ यू नो तो वो जादू काम नहीं करता है। फिर वो साइबर क्राइम नहीं होता है। इफ यू नो कि ये डाटा बाहर है दैट इटसेल्फ इज सफ्फिशंट टू सेव यू। आप बच गए पर आप नहीं जानते हो तो आप फंस गए। तो मतलब आप ये कह रहे हो कि फोन हैक नहीं होता। इंसान हैक होता है। यही होता है। Twitter हैक हुआ। एफबीआई ने इन्वेस्टिगेशन स्टार्ट किया। तीन बच्चे पकड़ लिए। 17 साल का निमा फजेली और से 19 साल का ग्रामी क्लर्क फ्लोरिडा से और 21 साल का लड़का 17 साल के लड़के ने Twitter हैक किया था। और 19 और 21 साल के बच्चे उसको Twitter हैक एज अ सर्विस बेच रहे थे डार्क वेब और डिस्कर्ड पर। तो Twitter के पास क्या एंटीवायरस नहीं था? Twitter के पास क्या फायर बॉल नहीं था? इंट्रोजन प्रोवेंशन सिस्टम नहीं था। एंट्रोजन डिटेक्शन सिस्टम नहीं था। एंड पॉइंट प्रोटेक्शन सिस्टम नहीं था। डीएलपी सशन नहीं था। सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर नहीं था। एआई बेस प्रोविजन नहीं था थे। क्या नहीं था उसके पास? उसका एनुअल सिक्योरिटी बजट 100 मिलियन डॉलर है। वो जिसका सिक्योरिटी उसको स्टैनफोर्ड और आईआईटी और एमआईटीए के लोग सिक्योर कर रहे हैं। उसको एक 17 साल का लड़का हैक करता है जो आज कॉलेज भी नहीं जा रहा है। और हम सोच रहे हैं कि सर वो तो एंटीवायरस है हमारे फोन में। कोई बचा लेगा तुम्हारा एंटीवायरस तुम्हें। जितने डिजिटल अरेस्ट के केसेस हुए हैं सबके हाथ में iPhone था। सबके हाथ में। व्हाट इज इट? 60 60 लाख से नीचे कोई लॉस नहीं हुआ है। अभी कल पार्लियामेंट में बोला तीन 3000 करोड़ का डिस्टरेस्ट का केस काउंट हुआ है। सो डिस्टरेस्ट जो मैं आपसे बात कर रहा था कि हमेशा कोई भी जब अटैक होता है साइबर क्राइम होता है उससे पहले एक साइबर क्राइम ऑलरेडी हो चुका होता है। जिसके बारे में हम बात नहीं करते। डिस्टरेस्ट हो रहा हो या इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पे लोग लूट रहे हो या जॉब के नाम पे लोग लूट रहे हो या फॉलोअर्स बढ़ाने के नाम पे लोग लूट रहे हो। अभी एक पुणे में एक बंदा था। उसको Facebook पे ऐड आता है कि एक लेडी ने ऐड डाला है कि मुझे जो प्रेग्नेंट करेगा उसको मैं ₹25 लाख दूंगी। हम Facebook पे ऐड आ रहा है उसी को क्यों आ रहा है? आपको ऐड आया वो नहीं। इसका मतलब है कि जो उसकी सर्चेस थी उससे वो लिंक था। हम उसको जैसे ही आया वो बंदा बातचीत शुरू कर दिया। फिर उसने कहा कि ठीक है एक लिंक क्लिक करके डिटेल दीजिए। फिर यह आपको इतना सिक्योरिटी मनी देना पड़े। उसने उससे घर अलग ले लिया। यह न्यूज़ है पुणे में। आप इंटरनेट पर जो भी कर रहे हो चाहे वो एक कीवर्ड भी सर्च कर रहे हो उस कीवर्ड के हिसाब से जो आपको पुश किया जा रहा है वो सिर्फ लेजिट कंपनीज़ नहीं कर रही है। वो तो क्रिमिनल भी कर सकते हैं ना वो ऐड तो एंड यू ट्रस्ट कि जो आप सर्च कर रहे हो या जो लिंक आ रहे हैं और उसके हिसाब से आप ट्रैप होते हो। नॉर्मली डिजिटल रिस्क के लिए वह लोग टारगेटेड हुए जो पेंशन ले रहे हैं जो 60 साल से ऊपर के हैं जिनके अकाउंट में बहुत पैसा है। जो लोग 30 से 45-50 साल के होंगे, उनको इन्वेस्टमेंट स्कीम के नाम पे लूटा गया है। क्योंकि उनके अकाउंट में 8 10 लाख पड़ा है और उनको 2-5 करोड़ बनाना है। तो उनकी एस्पिरेशंस वो है तो उनको वैसे टारगेट किया गया। जो 202 साल से नीचे वाली जनरेशन है उसको जॉब के नाम पर लूटा गया है या उनको सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरर बनने के नाम पर लूटा गया है। तो हर आदमी को वैसे टारगेट किया जा रहा है जो उसकी वनेबिलिटी है और उसके बाद चांसेस कि आप उसमें ट्रैप हो जाओगे बढ़ जाते हैं और क्रिमिनल के पास आपका क्लासिफाइड डाटा है। वो रैंडमली कॉल नहीं कर रहा है। यदि रैंडमली कॉल करेगा तो 140 करोड़ लोग हैं हिंदुस्तान में। कॉल करने के लिए करोड़ों खर्चा हो जाएगा। यदि आप 140 करोड़ कॉल करने लगे तो आपको 15 करोड़ का बिल बन जाएगा या 20 करोड़ का बिल बन जाए दैट और उसके बाद प्रैक्टिकली पॉसिबल नहीं है तो आपको चाहिए सबसे पहले क्लासिफाइड डाटा उनको कैसे मिलता है कि यार यह बंदा है इसमें यह कमजोरी है इसको ऐसे टारगेट करना या इस बंदे को आप कर सकते हो या इस बंदे की साइबर ग्रूमिंग कर सकते हो या इस बंदे को आप जॉब के नाम पर लूट सकते हो आपको यह डाटा दिया है ना किसी ने और वो डाटा आप ही से निकला है। तो आपके फोन में जितनी एप्लीकेशनेशंस हैं, हमने अभी एक एग्जांपल लिया। आप हर एक एप्लीकेशन का देखो क्या-क्या ले रही है। एक कंपनी थी जर्मनी में और मैं एक चैनल के लिए शो कर रहा था। उन्होंने कहा कि आप यह जो डाटा बोल रहे हो कि हर एक कई सारी ऐप ऐसी हैं जो वो डाटा बाहर बेच देती है। कई सारी तो लेजिट है। चलो वो नहीं बेचती होंगी। पर उस डाटा के बेस पर आपको ऐड दिखाए जाते हैं। कुछ ऐसी ऐप भी है जो सीधे डाटा भेज देते थे लेकर आपसे। जो लोन एप्स के नाम पर लूटे लोग वो सारे लोन एप्स उन्होंने Play Store से ही इंस्टॉल की थी। हम एक गाइडलाइन बना देते हैं ना कि Play Store से एप्लीकेशन इंस्टॉल कीजिए तो सेफ है। अरे वो तो Play Store से ही की थी तब भी लूटे। क्योंकि लोन एप्स आपका कांटेक्ट लिस्ट और पिक्चर्स ले लेती थी। पिक्चर्स को मॉर्फ करेंगे। नेकेड पिक्चर बनाएंगे, गाली गलौल लिखेंगे और वह आप ही के दोस्तों, रिश्तेदारों को भेजेंगे और आपसे पैसे मांगेंगे नहीं तो हम रुकेंगे नहीं। आप दबाव में आके पैसे देना शुरू कर देते हैं। इसको बोलते हैं हम सेक्सटॉरशन। कहां से शुरू होता है? लोन ऐप से। इस तरह की और सारी ऐप है जो आपकी इनफार्मेशन लेकर बाहर बेच रही हैं। क्योंकि वो सेक्सटॉशन नहीं कर सकते तो दे कैन सेल इट। आपने ध्यान नहीं दिया कि वह क्या-क्या एक्सेस दे दिया आपने। और कई बार आप ऐसा भी दे देते हो कि आप ओटीपी ही दे देते हो। शादी का कार्ड आता है आपको वेडिंग. APK आप इंस्टॉल कर लेते हो क्योंकि आपने तो कसम खाई है शादी में जाने की और आपका पूरा अकाउंट खाली हो जाता है। बर्थडे कार्ड आता है इंस्टॉल कर लेते हो। सो आप बेसिकली देख रहे हो कि आप खुद कुछ कर रहे हो। डिवाइस अपने आप हैक नहीं हो रही है। क्रिमिनल विल नेवर हैक योर डिवाइसेस टू रीच टू यू। क्रिमिनल विल ऑलवेज हैक यू टू रीच टू डिवाइस। तो चलो मैं इसको और सिंपलीफाई करता हूं। सपोज़ करो मैं हूं और आप एक हैकर हो। आपको मुझे हैक करना है। अब आप कैसे इसकी शुरुआत करोगे कि मेरे मेरा फोन हैक कर लो या मेरा लैपटॉप हैक कर लो। सबसे पहले हम शुरू करते हैं रेकी से रिकनिसेंस जिसको हम बोलते हैं कि आपके बारे में सब कुछ पता कर लेना। तो बहुत सारे ओसिन टूल है ओपन सोर्स इंटेलिजेंस टूल। कैसे कैसे पता करोगे जो हमें बता देते हैं जैसे कि आर्काइव से आपका डाटा निकाला जाता है। जो आप Facebook पे लिख रहे हो या डिलीट भी कर रहे हो वो भी आर्काइव में मिलता है। कुछ तो आपका पब्लिक है। जैसे आपका पब्लिक फिगर है तो आपके लिए तो आपके बारे में जानना आसान है। पर जो व्यक्ति पर्सनल प्रोफाइल पब्लिक में तो मैंने जितना दिया उतना ही है पर वो बहुत दे दिया है आप आप जो जब आप बोल रहे होते हैं ना और आप क्या बोल रहे हैं आपकी पलकें तक इनफार्मेशन पास कर रही होती है आप कहां रुके हैं कहां पहुंच लिए हैं दैट इटसेल्फ से अ लॉट और विद एआई बहुत कुछ अभी मैं एग्जांपल दूंगा तो आप समझ पाएंगे मैं कहां हिंट कर रहा हूं आप कई सारा ऐसा डाटा जैसे कि आपने कहीं फीडबैक दिया या लाइक कर दिया या कमेंट कर दिया स्टार्ट एक्सपोजिंग योर योर माइंडसेट ऑफ़ दैट टाइम और उसके बाद उस माइंडसेट के हिसाब से आपका एक प्रोफाइलिंग कर ली जाती है कि यार यह बंदा इस तरह का है। इसकी ये अच्छाइयां है। यह बुराइयां है। ऐसा है वैसा है। और उसके बाद सामने वाला अटैक वेक्टर तैयार करेगा कि यार इसको मैं यदि ऐसा कुछ भेजूंगा ना तो यह जरूर फॉलो करेगा या ट्रैप हो जाएगा। यदि मुझे एक बहुत बड़े टीवी चैनल की जर्नलिस्ट थी जिनको जॉब का ऑफर दिया गया और वो विश्वास कर लिया उन्होंने। तो वो तो जर्नलिस्ट थी। मेरे ही चैनल की थी। वाशिंगटन पोस्ट असिस्टेंट प्रोफेसर बन रही थी। तो वो तो सब जानती थी। तो दुनिया को लॉजिक सिखाते हैं। वो कैसे विश्वास कर गई? क्योंकि उनकी जिंदगी में उस समय वैसा कुछ चल रहा था। और उसी चीज की वजह से उनको लगा कि यार मैंने तो वहां गई थी। वहां इवेंट हुआ था। उन्होंने फिर यही बोला कि वहां इवेंट में फोटो थी और उसके बाद मुझे मेल आ गई उस यूनिवर्सिटी से। तो मुझे लगा ये तो लिंक्ड है। अब आप किसी इवेंट में गए। आपकी एक फोटो है और उसी कॉन्टेक्स्ट में मैं कोई ईमेल कर देता हूं विद ऑथेंटिक डोमेन। बिल्कुल वही डोमेन होगा तो आप इग्नोर नहीं कर पाएंगे क्योंकि आप इतना बिजी हैं कि हर चीज के लिए थोड़ा वेरीफाई करते फिरेंगे आप। एंड एक कदम भी आगे बढ़ा तो फिर वो ट्रैप बढ़ता चला जाता है। तो इसको बोलते हैं सेकंड स्टेप अटैक वेक्टर। तो नॉर्मली जब क्रिमिनल आपको कॉल करता है हम वो यूपीएससी का थर्ड अटेम्प्ट होता है। इससे पहले दो अटेम्प्ट हो चुके होते हैं। पहला होता है रिकॉनसेंस और दूसरा होता है अटैक बेटर तैयार करना कि पहले उसने रेकी की प्रीलिम्स दिया उसने सब निकाल लिया। फिर उसने एक अटैक तैयार किया कि आप इसको भेजना शुरू करो। उसमें भी आप गलती कर चुके हो। आपने देखा कि फाइनेंसियल फ्रॉड जब भी हुआ क्रिमिनल ने कभी आपका पासवर्ड मांगा क्या? नहीं। कभी नहीं मांगता। वह ओटीपी निकालने के जुगाड़ में रहता है। पासवर्ड नहीं मांगता क्योंकि पासवर्ड आपसे मांगेगा तो 5 मिनट लगेगा। कैपिटल है, स्मॉल है, @ है, ऐड है। वाई-फाई का पासवर्ड ही मांगोगे तो उसको वो रिस्क नहीं लेना है। उसके पास और उतने में आधा आदमी मना भी कर देता है। रिस्क क्योंकि उसके चांसेस कम होते चले जाएंगे। पासवर्ड उसके पास ऑलरेडी है। उसको सिर्फ आपका ओटीपी चाहिए। तो उसका पासवर्ड है कैसे ऑलरेडी? इसका मतलब इससे पहले किसी अटेम्प्ट में उसने पासवर्ड निकाल लिया आपका। या तो आपसे निकलवाया या कहीं और से मिला पर है ना तभी तो वह थर्ड अटेम्प्ट की ओर गया है। तो जब तक यह दो अटेमप्ट नहीं हो जाएंगे थर्ड अटेम्प्ट सक्सेसफुल हो ही नहीं सकता। तो जब किसी के संग साइबर क्राइम हो रहा है तो यह मान ले कि उससे पहले दो बार उसको मौका मिला था बचने का जो उसने इग्नोर किए या ट्रैप हुआ और इस वजह से अब हालत इस हद तक पहुंच गई है कि अब आप बच नहीं सकते क्योंकि अब आप फाइनल कॉफिन इन द नेल पर आ चुके हैं जिसमें उस बंदे के ने पूरा अपने असलहे तैयार कर रखे हैं। केस जैसे अभी शुरू होने शुरू है कि आपको आपके बच्ची की आवाज में फोन आता है कि पापा मुझे पुलिस ने पकड़ लिया है और ऐसा ऐसा होगा। पुलिस वाले का फोन आएगा कि हमने इसको ड्रग्स के संग पकड़ा है। रेप चार्ज में पड़ा है। इसको थने ले जा रहे हैं और मामला यहां सुलटा देंगे। यदि दो ढाई लाख दे दो। ऐसे करके लोगों ने पैसे दे दिए। लोग विश्वास कर लेते हैं। उन्हें बच्चे की आवाज ही लगती है क्योंकि एआई वगैरह भी है। तो एक सज्जन मुझे बोले कि मुझे आया ऐसा फोन और मेरे मुझे लगा बच्चे की आवाज है और एकदम से घबरा गया और फिर मुझे लगा कि मेरा बच्चा तो बगल वाले रूम में है। तो मैंने उसको कॉल करके बोला मैंने कहा मेरा बच्चा तो मेरे सामने है। तो बोलता है तो क्या हुआ तुम्हारे भाई का बच्चा होगा। तो बोले मैं दो मिनट सोचा भाई का तो बच्चा नहीं [हंसी] है। मतलब सामने वाला इतना तैयार है कि वो गिव अप नहीं कर रहा है। आप बोल रहे हो कि मेरा बेटा मेरे सामने है तब भी वो गिव अप नहीं कर रहा है। उसकी तैयारी है कि आपके बेटे भाई का भी बेटा है। तो ये एक सेकंड में नहीं हो सकती तैयारी। अभी मोबी क्विक जो गुड़गांव की गुड़गांव में अभी हैक हुआ। हम 11 तारीख को उनका एक पैच रिलीज़ हुआ और 12 13 तारीख को ₹40 करोड़ निकल गए। 2500 अकाउंट में पैसा ट्रांसफर हुआ 2500 अकाउंट में और वह फिर निकल गया। एफआईआर हुई 11 तारीख को पैच रिलीज होता है और अगले 48 घंटों में 2500 अकाउंट में पैसा ट्रांसफर होता है। आपको क्या लगता है कि उस पैच की वबिलिटी की वजह से हैक हुआ। पैसे निकले। यह तैयारी 3 महीने पहले हो चुकी थी। 2500 अकाउंट्स जिसमें पैसा जाना था वो एक दिन में नहीं तैयार कर सकते हो आप। सो दे वर रेडी विद दोस 25500 बैंक अकाउंट्स कि मर्चेंट अकाउंट जिसमें पैसा जाएगा क्योंकि उसमें लिमिट है पैसा जाने की तो इसलिए उनको इतने अकाउंट चाहिए जो वनेबिलिटी थी वो ऐसी थी कि आप यूजर अकाउंट से मर्चेंट अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर सकते हो यूजर अकाउंट में पैसा है ही नहीं इसमें नहीं है पैसा पर उसमें दिखेगा जो आपने ट्रांसफर किया ऐसी वनेबिलिटी थी फिर यूजर अकाउंट का पासवर्ड बायपास कर सकते हो आप ये वनेबिलिटी थी अब आप जरा बाहर से एनालाइज कीजिए सिचुएशन को कि यार ये क्या खेल था भाई हम क्रिमिनल को यह कैसे पता था कि ऐसी वैलबिलिटी आने वाली है और ही वाज़ रेडी विथ दी अकाउंट्स कि वह हमें ट्रांसफर करके निकाल लेना है। इससे तीन चीज़ें प्रूफ होती है। पहला कि यह उस दिन नहीं हुआ हैक। ये तीन महीने से तैयारी चल रही थी। दूसरा यह वैलनेबिलिटी नहीं थी। यह किसी ने इंट्रोड्यूस करके डाली गई थी कि 11 तारीख को निकलेगा पैच तब खेल तैयार रहना। और तीसरा कि यह पहली बार नहीं हुआ था। यह तो पता भी पड़ा है। कई बार ऐसा भी तो एकदम से 2500 अकाउंट में। कई बार 100 अकाउंट बन के भी निकला होगा। 200 अकाउंट में जब उनका कॉन्फिडेंस बढ़ता चला गया तो उन्होंने कहा अब 2500 में खेलते हैं। 2500 अकाउंट बनाने में टाइम लगता है। ये तो बिना इन्वेस्टिगेशन के दिख रहा है। और जब इन्वेस्टिगेशन करोगे तो आपको चीजें और ठीक है। अब मैं सो माय पॉइंट इज दिस इस ऑलवेज मल्टीस्टेप प्रोसेस। जैसे मुझे आपको भी हैक करना है तो हमेशा तीन स्टेप तो मिनिमम होंगे। हो सकता है छह भी लग जाए। डिपेंडिंग ऑन कि आपका प्रोफाइल क्या है। मैं आपके फोन तक पहुंच ही नहीं पा रहा। मुझे आपके बारे में कुछ नहीं पता है। जैसे मैं अपने को बड़ा स्मार्ट समझ रहा हूं कि मैं बड़ा सावधान रहता हूं। मैं किसी लिंक पे क्लिक नहीं करता हूं। मैं किसी को ओटीपी नहीं देता हूं। कोई भी अननेसेसरी चीज पे कभी क्लिक नहीं हो रहा है। देख के मैं इग्नोर कर दे रहा हूं। मेरा फोन किसी के पास जा नहीं रहा है। मैं सावधान हूं। अपने हिसाब अपनी समझ में अपनी समझ में एक आपको हैक अभी तरीका बताते हैं हम यदि मैं आपका वाई-फाई हैक कर लूं हम तो मैं मैन इन द मिनर अटैक कर सकता हूं आई कैन सी योर ट्रैफिक जो फोन पर हो रहा होगा या लैपटॉप पर हो रहा होगा और वाईफाई हैक करने के कई सारे टूल आते हैं आप Google करेंगे तो मिल जाएंगे बच्चे भी जानते हैं पर मान लीजिए मैं आपका वाई-फाई हैक नहीं कर पा रहा बिकॉज़ कॉन्फ़िगरेशन बहुत स्ट्रांग है और बूट फ़ोर्स नहीं लग हो पा रहा तो मेरे पास एक दूसरी ट्रिक होती है। मैं क्या कर सकता हूं? मैं बाहर बैठ गया और मैं आपके वाई-फाई के राउटर पर डीडॉस अटैक करूंगा। डिनाइल ऑफ सर्विस अटैक बोलते हैं जिससे बहुत सारी रिक्वेस्ट भेजूंगा जो आपका राउटर हैंडल नहीं कर पाएगा और वो डाउन हो जाएगा। फिर मैं अपना फोन उठाऊंगा और जो आपके वाई-फाई का हॉटस्पॉट का नाम है उसी नाम से एक हॉटस्पॉट क्रिएट कर दूंगा और बिना पासवर्ड के और बाहर रख दूंगा। अब आपका मोबाइल से जैसे ही वाई-फाई डिस्कनेक्ट हुआ, लैपटॉप से डिस्कनेक्ट हुआ, आप तुरंत रिकनेक्ट करने की कोशिश करेंगे तो अब आपको मेरा वाला हॉटस्पॉट ऊपर दिखेगा क्योंकि आपका तो डाउन है। तो उसको कनेक्ट करेंगे, कनेक्ट हो जाएगा। जैसे ही वो कनेक्ट हो जाएगा आप मेरे वाई-फाई में हो। आई कैन डू मैनेज द मिल अटैक। तो मैं आपका हैक करूं या आपकी सिचुएशन ऐसी क्रिएट कर दूं कि आप मेरे में आ जाए। बात तो बराबर है ना? हम इसमें मैंने आपसे क्या गलती कराई है? दिस इज जस्ट सिचुएशनल थिंग्स व्हिच एनीबडी वुड बी ट्रैप्ड। बड़े-बड़े हेड क्वार्टर्स में मैंने करके देखा है क्योंकि वहां तो ऐसे होते हैं डीजीपी वाईफाई एडीजी वाई-फाई तो मैंने कहा इनका हैक करना है। लो अब यहीं से खेल शुरू करते हैं। तो जैसे मान लो आपने वाई-फाई हैक कर लिया। मैंने उस Wi-Fi से जोड़ लिया जो आमतौर पर हम रेलवे स्टेशन पे करते हैं या एयरपोर्ट पे करते हैं या किसी के घर जाते हैं तो कहते हैं भाई साहब वाई-फाई देना अपना और वाई-फाई कनेक्ट कर लिया। अब अगर मैंने किसी का वाई-फाई कनेक्ट किया है तो कितना बड़ा खतरा है वो मेरे फोन के लिए मेरे लिए है। देखिए मैं आपका ट्रैफिक तो देख ही सकता हूं कि आप इंटरनेट पर क्या कर रहे थे। क्या-क्या चीजें आपने एक्सप्लोर की है। पर यदि आपने कोई ऐसी वेबसाइट एक्सेस की है जो अनइंक्रिप्टेड कम्युनिकेशन अलऊ कर रही थी तो उस केस में मैं पासवर्ड्स भी देख सकता हूं। आमतौर पर ये इंक्रिप्टेड होते हैं, हैशड होते हैं। पर मान लो कुछ ऐसा किया आपने। कई बार ऐसी भी वेबसाइट होती है जो आप करते हैं और उसमें फिर पोर्न वेबसाइट में ज्यादातर ये होता है कि जहां पर वो मना करता है कि सिक्योर नहीं है। इंटरनल भी जा सकता हूं। आप जा सकते हैं और बट मान लीजिए कौन नहीं देखता है नहीं तब भी मैं ट्रैफिक नॉर्मल वेबसाइट यूज़ कर रहा है मेरा आपका डिस्क्रिप्शन आईपी वगैरह तो देख ही लूंगा ना मैं आपके घर एक घंटे के लिए आया अमित दुबे के घर यदि मैं आपका वैसे भी वाईफाई हैक कर लूं और वाईफाई का एक हफ्ते का लॉग या जितना भी लॉग उसमें बना डिपेंडिंग ऑन द वाईफाई राउटर अलग-अलग तरह का लॉग मिलता है तो भी मैं बहुत कुछ पता कर सकता हूं किस घर में कितने लोग रहते हैं कौन कब आता है कौन कब जाता है किसका किससे रिलेशन है कितना इंटरनेट एक्सेस करता है ये तो मैं निकाल ही लूंगा ना ये कैसे पता कर ले किसका किससे रिलेशन आप घर आते हो और तुरंत मोबाइल पे बैठ जाते हो। हां। [हंसी] और वो भी मोबाइल पे बैठा हुआ है। हां। तो फिर आप थोड़ी ना आपस में बात कर रहे हो। [हंसी] और एक्टिव चल रहा है आपका इंटरनेट दैट इटसेल्फ सेज़ समथिंग ना। हर चीज डिकोड हर घर कुछ कहता है। डिकोड करते हो। ठीक है। कैसे पता करें कि फोन मेरा हैक है। देखिए हां इसको थोड़ा सा डिटेल में बताना पड़ेगा। बिकॉज़ ये सवाल जितना सिंपल है उसका आंसर उतना स्ट्रेट फॉरवर्ड नहीं है। हम हैकिंग क्या होती है? हैकिंग लोग सोचते हैं कि मेरे फोन में किसी ने कुछ इंस्टॉल कर दिया। दैट इज हैकिंग। कुछ ऐसा मेलवेयर आ गया जिसकी वजह से वो मेरा डाटा ले पा रहा है। सो हैकिंग को हम लोग तीन तरीके से क्लासिफाई करते हैं। सीआईए ट्रायज बोलते हैं उसको। सीआईए कॉन्फिडेंशियलिटी ब्रीच, इंटीग्रिटी ब्रीच एंड अवेलेबिलिटी ब्रीच। कॉन्फिडेंशियलिटी ब्रीच का मतलब है कि मैं आपके डिवाइस में या सर्वर में घुस जाऊं और डेटा निकाल लूं। इसको बोलते हैं कॉन्फिडेंशियलिटी ब्रच। इंटीग्रिटी ब्रीच का मतलब है कि मैं आपके डिवाइस में या सर्वर में घुसूं और डाटा चेंज कर दूं। निकालूंगा नहीं। निकाल भी लूं तो भी दिक्कत है। पर उसको बदल मैनपुलेट कर दूं और आपको पता ही नहीं पड़ा और बदल गया है। अब आप ही के रिजल्ट्स गड़बड़ हो गए। आप ही का फाइनेंसियल डाटा हो सकता है। हेल्थ का डाटा हो सकता है। बहुत सारा सेंसिटिव डाटा हो सकता है जो मैं मैनपुलेट कर दूं। इसको बोलते हैं इंटीग्रिटी ब्रीच। तीसरा जो रिलेटिवली आसान होता है वो उसको बोलते हैं अवेलेबिलिटी ब्रीच। कि मैं आपके लिए आप ही की चीज अनअवेलेबल कर दूं। एक दिन के लिए, एक घंटे के लिए, दो घंटे के लिए तो भी मैं आपको परेशान कर सकता हूं। जैसे डीडस अटैक है कि मैंने सर्वर पर रिक्वेस्ट भेजना शुरू किया। सर्वर डाउन हो गया। iआरसीटीc की वेबसाइट डाउन है। अब हजारों लाखों करोड़ों का नुकसान हो गया क्योंकि लोग बुक ही नहीं कर पा रहे। कोई ई-कॉमर्स वेबसाइट है। डाउन कर दी मैंने। मैंने डाटा ब्रीच नहीं किया। मैंने इंटीग्रिटी ब्रीच नहीं की। पर मैंने उसकी अवेलेबिलिटी खत्म कर दी। दैट इटसेल्फ इज हैक। वो भी हैक ही है। मैं आपके मोबाइल फोन यहां पड़ा हुआ है। मैंने उसमें पांच बार 10 बार रॉन्ग पासवर्ड डाला तो वह लॉक हो जाता है एक पीरियड के लिए। अब आप ही स्ट्रगल कर रहे हो। दैट इज अवेलेबिलिटी ब्रीच। मुझे आपका बैंक अकाउंट मिल गया। मैंने उसमें पांच बार रॉन्ग पासवर्ड डाल दिया ओनली। तो वो 24 घंटे के लिए लॉक कर देगा। अवेलेबिलिटी ब्रीच कर दी। सो ऐसे बहुत सारी सिचुएशनंस हैं जहां पर मैं आपको लाइफ में परेशान कर सकता हूं जिसमें मैं एक्चुअल हैक नहीं कर रहा हूं। बट आई एम डिस्टर्बिंग यू और क्रिएटिंग डिस्टरबेंसेस इन योर लाइफ। फिर आता है कॉन्फिडेंशियल ब्रिज कम उधर आते हैं। तभी कह रहा हूं हैक बहुत सारी सिचुएशनंस है। तो हैक को हम सिंपलीफाई करके कि साहब सिर्फ फोन गर्म हो जाएगा तो हैक है क्या या डेटा अपलोड हैवी हो रहा है। नहीं ऐसा नहीं है। क्योंकि उन सब को काउंटर करके भी हैक हो सकता है। कई बार ऐसे मेलवेयर होते हैं जो टाइमर बेस्ड होते हैं। वो ट्रिगर ही तब करते हैं जब मुझे उनको ट्रिगर कराना है। वो हमेशा दिखेंगे नहीं। वो कभी सिग्नेचर भी नहीं दिखेगा उनका। उसको बोलते हैं पर्सिस्टेंट थ्रैट। वो पड़ा हुआ है। सर्वर में पड़ा है। आधार सर्वर में हो सकता है। पासपोर्ट सर्वर में हो सकता है। पर वो यूज़ तब होगा जब मैं जाऊंगा। सो नॉर्मली यू वोंट फाइंड इन एनी स्कैन कि ये डिवाइस हैक भी है। इसी तरह मोबाइल फोन का है। अब आपका मुझे ओटीपी उड़ाने हैं। तो सिर्फ ओटीपी उड़ाने के जो कॉन्फ़िगरेशन या तरीके हैं, दैट इज़ आल्सो हैक। क्योंकि हर चीज आपकी ओटीपी से ही तो सिक्योर है। सो ओटीपी उड़ाने की उड़ाने के भी मैंने 12 तरीके बताए जैसे पडकास्ट में और वो बच्चे-बच्चे भी कर लेते हैं। दैट इज आल्सो हैक। अब आपने चेक करना है कि भाई मेरा कॉल फॉरवर्डिंग तो सेट नहीं कर रखी है किसी ने जिसमें आपके कॉल किसी और को भी फॉरवर्ड हो जाते हैं। जब आप बिजी हो तब तो आप स्टार#21# करके चेक कर सकते हैं जिसमें बताएगा कि भाई कॉल फॉरवर्डिंग सेट है या नहीं। पर यदि किसी ने कर रखी है तो शायद आपको कई दिनों तक पता ही ना पड़े और आपके ओटीपीस भी जा रहे हैं और आपका पैसे भी निकल सकते हैं और WhatsApp भी हैक हो सकता है। होते ही है लगातार ये चीजें होती हैं। फिर और भी इस तरह के जो ओटीपी हैक करने के क्या 12 तरीके हैं? तो मैं एक लाइन बता देता हूं क्योंकि मैंने कई बार बता दिए हैं तो मैं रिपीट नहीं करूंगा थोड़ा डिटेल में। तो सर एक तो तरीका होता है कॉल मर्जिंग टेक्निक। ओके। जिसमें आपको मैं थोड़ा सोशल इंजीनियरिंग करूंगा। आपको एक कॉल आ जाए कि शुभंकर जी एक इवेंट है अभी भारत मंडप में आपको बुलाना है अवार्ड देना है अमित जी ने आपका नंबर दिया है तो आप बातचीत शुरू कर देंगे फिर बोलेगा कि शुभंकर जी अमित इस आल्सो ट्राइंग टू कॉल यू वो आप एक काम कीजिए कॉल मर्ज कर दीजिए हम तीनों आपस में बात कर लेते हैं क्योंकि हमने उनको भी बुलाया है और हम चाहते हैं एक फायर साइड चैट हो जाए आप लोगों के बीच में और चार दिन बाद इवेंट है और रक्षा मंत्री जी आ रहे हैं तो ऐसा वैसा आप देखोगे कहोगे यार ये अमित का नंबर है। अरे उनका वीआईपी नंबर है। आप मर्ज कीजिए ना अभी क्लोज करते हैं। अभी सब टाइम ही नहीं है हमारे पास। थोड़ा अर्जेंसी दिखाएगा और मान लीजिए आपने मर्ज कर दिया थोड़ा प्रेशर में आके तो आपके पैसे निकल जाएंगे। आपका WhatsApp हैक हो जाएगा या आपका कॉल कनेक्ट किए मैंने। क्वेश्चन कैसे आपने कोई ओटीपी दिया? नहीं। आपने कोई लिंक क्लिक किया? नहीं। आपने कोई एप्लीकेशन इंस्टॉल की? नहीं। आपने कोई क्यूआर कोड स्कैन किया? नहीं। तो पैसे क्यों निकले? आपने सिर्फ दो इनकमिंग कॉल मर्ज की किए हैं? हां क्योंकि आजकल ओटीपीस कॉल पे भी आते हैं। आपको भी जो दूसरा कॉल आया उस समय वो आपके ओटीपी का कॉल था। पहले जो एसएमएस पे आते थे ना ओटीपी नाउ यू एन ऑप्शन टू इनवाइट देम ऑल। आप कॉल पे मंगा सकते हैं। WhatsApp का ओटीपी कॉल पे आता है। बैंक का ओटीपी कॉल पे आता है। तो आप जब क्रिमिनल के संग कॉल पे थे उस समय उसने आपका मान लीजिए WhatsApp का ओटीपी मंगाया। और आपने ट्रस्ट करके मर्ज कर दिया। तो क्रिमिनल इज़ ऑलरेडी ऑन द कॉल। उसने ओटीपी सुन लिया। बट वो तो मुझे मुझे भी सुनाई। काट दूंगा। आपको भी सुनाई देगा। लेकिन आप जब तक काटोगे वो सुन तो चुका ही है ना। अब आपके पास ऑप्शन नहीं है कि आप किसी को कॉल करके बोलोगे वो ओटीपी रोक दो। कैन यू स्टॉप दैट? यदि उसने सुन लिया तो इट्स गॉन। ओके? दिस इज वन। है कि नहीं? दूसरा होता है कॉल फॉरवर्डिंग टेक्निक। इसमें क्या होता है कि आपके फोन से एक कोड डायल कराया जाता है। जो स्टार 62 स्टार मोबाइल नंबर है स्टार21 स्टार मोबाइल नंबर#श स्टार 401 स्टार मोबाइल नंबर है। यह अलग-अलग ऑपरेटर के लिए अलग कोड है। तो कुछ डॉक्टर्स के WhatsApp हैक हुए दिवाली के पहले कि आपको गिफ्ट भेजना है। उन्होंने कहा हां भेजिए। बोले नहीं नहीं इस बार कुछ गोल्ड वोल्ड है तो आपकी परमिशन चाहिए। तो बोले दे दी परमिशन। बोले ऐसे तो सर कोई भी परमिशन दे देगा वो तो आप क्योंकि हम भी मैनपुलेट कर सकते हैं। तो हमने सर्वर बेस सिस्टम बनाया। सर्वर से आपको रिक्वेस्ट मेल आएगी। रिक्वेस्ट एसएमएस आएगा। उसमें एक कोड होगा वो आप डायल कर दीजिएगा तो रिकॉर्ड हो जाएगी। आपके घर पर अपने आप वो डिलीवर हो जाएगा। हमारा सर इन्वॉल्वमेंट है ही नहीं। अच्छा। तुमको एसएमएस आया उस पर कोड था उन्होंने डायल किया कॉल फॉर वर्किंग सेट हो गई अगले मिनट उनका ओटी WhatsApp चला गया फिर तीसरा तरीका होता है ईम ईम जानते हैं आप हम आज भी आप 50 लोगों में पूछेंगे ना ईम कितने लोग जानते हैं तो 40 लोग नहीं जानते होंगे आप जानते हैं क्योंकि हां हम iPhone यूज़ करते हैं एक्टिवली यूज़ करते हैं एक्टिवली यूज़ करते हैं और और iPhone में एक स्प्रे आती है दो लगाना होता हाई है आपका लेकिन आमतौर पर लोगों को फर्क नहीं पड़ता। वो अपना वही चले जा रहे हैं। था मेरे पिताजी की उम्र के लोगों को नहीं पता। नहीं ईसीएम क्या होता है? हां। तो जब मैं कॉन्फ्रेंसेस में बोलता हूं और मैं पूछता हूं कि आप में से कितनों को ईसीएम पता है? तो मेरा अनुभव है कि 10% 15% को पता है। 80% लोगों को तो नहीं पता होता। ईसीएम पता ही नहीं है क्या है? सोचिए आप जबकि इट्स सच अ कॉमन थिंग। हम पूरा फोन ही हैक हो गया। फिर तो अब ईएम यदि मैं आपका क्रिएट कर लूं तो मेरा सिम आपका हो गया। तो फिर तो सब गया ना। सब गया। मेरा फोन ही पूरा आपका वो प्रोसेस में मैं आपको ट्रैप कर लूंगा। मैं आपसे एक मैसेज करवा लूंगा गलती से। वो कर दोगे आप क्योंकि मैं जिस तरीके से कन्विंस करूंगा वही तो आर्ट है। मैं कह रहा हूं ना ब्रेन को मुझे हैक करना है। मुझे आपके डिवाइस से मतलब ही नहीं है। वो तो आप ही करके दोगे मुझे। फिर आ जाता है किसी तरह मैं स्क्रीन शेयर करा लूं। कि मैंने आपको किसी मुसीबत में फंसाया। वो मुसीबत मैं क्रिएट करूंगा। और जैसे ही आप फंसे आपने हेल्प के लिए कॉल मांगी और मैं कहूंगा हां सर मैं आपकी हेल्प करता हूं। एक काम करता हूं। मैं क्या करूं सर मैं मैं बाहर फंसा हूं। तो मैं आपको Google मीट का लिंक भेजता हूं। आप जरा स्क्रीन शेयर कीजिए। मेरे सामने उस वेबसाइट खुली है। मैं अभी मैं आपकी हेल्प करता हूं। अभी रिफंड आ जाएगा आपको या आपने कोई पिज़्ज़ा मंगाया होगा या कहीं कुछ कैशबैक आ रहा होगा। मतलब वो सिचुएशन के हिसाब से आई विल प्लान। अब आप तुरंत हां ठीक है यार भेजो यार। मेरा तो पैसा फंस गया यार। प्लीज प्लीज आपने Google मीट का लिंक क्लिक किया। स्क्रीन शेयर किया। उसको वो रिफंड फंड से मतलब ही नहीं है। वो पूरी कहानी इसलिए गड़ी गई थी कि आप वो इस Google मीट की लिंक क्लिक कर दें। जैसे ही आप क्लिक करेंगे और स्क्रीन शेयर हुआ उसको। ओटीपी गए ना हम पर चाहे वो Google मीट हो ZM हो क्विक सपोर्ट ऐप हो एनी डेस्क ऐप हो टीम व्यूअर हो कुछ भी हो बट वो जिस तरीके से आप तक पहुंचेगा वो सपोर्ट के लिए सर वो क्विक सपोर्ट एक ऐप है आप इंस्टॉल कर लीजिए मैं आपको सपोर्ट देता हूं तो जो सीनियर सिटीजन है उनको लगता है क्विक सपोर्ट है सपोर्ट की ऐप है कर लो इंस्टॉल कर ली उससे तो स्क्रीन शेयर हो रहा है आपका फोन यहां पड़ा हुआ है उस पर ओटीपी आता है तो फ्लैश होता है तो कोई देख सकता है। आप 2 मिनट के लिए वाशरूम गए। यहां फोन पड़ा हुआ है। उसने ओटीपी देख लिया, मिसयूज कर लिया। अब आप क्या करेंगे? सेटिंग्स में जाएंगे और लॉक मोड में एसएमएस फ्लैशिंग डिसेबल कर देंगे कि भाई यदि फोन लॉक है तो मेरा एसएमएस ना दिखाई दे। हम ठीक है? कर दिया आपने। अब आपने फोन छोड़ के फिर चले गए दो मिनट वाशरूम। तो मैं कॉल पे ओटीपी मंगाऊंगा। लॉक मोड में भी कॉल तो रिसीव हो ही जाएगा। तो ओटीपी सुन सकता हूं। तो फिर आप कहेंगे क्या करें? अरे फोन छोड़ के नहीं जाना है। मैं कितनी सेटिंग कराऊंगा आपके फोन में। जो मैं समझाना चाह रहा हूं कि फोन अब फोन नहीं रहा। फोन अब वॉलेट है। सो माय पर्पस इज नॉट टू टेल यू 10 सेटिंग्स एंड देन मेक यू सो यू कांट। इट विल नेवर हैपन। आज मैं 12 तरीके के ओटीपी चुराने के बताऊंगा कल। दो और आ जाएंगे। एक तरीका भी मैं नागपुर कमिश्नरेट गया था ट्रेनिंग देने। तो सारी नागपुर की ट्रेनिंग दी। उसके बाद जो उनका साइबर सेल था वो सारे एसीपी इंस्पेक्टर ने मुझे बोला कि सर अभी जो कुछ केसेस चल रहे हैं वो डिस्कस करने हैं तो आप अनब्लॉक कर दीजिए हम वी आर ब्लॉक्ड तो हर केस के बारे में कुछ-कुछ नई गाइडेंस दिया था कि इसमें ये ट्राई कर लेना वो ट्राई कर लेना कुछ वीपीए वाले केसेस थे एक उन्होंने केस बताया बोले साहब एक अजीब सी प्रॉब्लम आ रही है कि फोन चोरी होता है और ये बिल्कुल नई चीज है जो मैंने आज तक किसी पडकास्ट में नहीं बताई इसलिए बता रहा हूं क्योंकि अभी दो दिन पहले हुआ है तो बोले साहब वो फोन चोरी होता है और उसके तुरंत बाद यूपीआई से पैसे निकल जाते हैं मैंने कहा फोन फोन चोरी होता है। उसके बाद यूपीआई से पैसे कैसे निकल जाते हैं? बोले नहीं साहब हो रहा है। मैंने कहा iPhone बोला हां iPhone में भी हो रहा है। केस दिखा दिया उन्होंने कंप्लेंट कॉपी दिखा दी। मैंने कहा यदि iPhone चोरी हुआ तो उसके बाद पहले तो उसको iPhone क्रैक करना पड़ेगा जो पासपोर्ट है वो नहीं हो सकता। फिर यूपीआई पिन चाहिए उसको तब जाके यूपीआई से पैसे निकलेंगे। तो यूपीआई से पैसे कैसे निकल रहे हैं? साहब खाली हो जाता है अकाउंट में पैसे निकल [हंसी] जाते हैं। तो मैंने Google करना शुरू किया। मैंने कहा क्या होगा यार? जब तक मॉडल सपने क्लियर नहीं क्रिमिनल पकड़ेंगे कैसे? तो सर तरीका है कि यदि आपका फोन चोरी हुआ तो पैसे निकल सकते हैं। देखिए कैसे अब मैं पूरा तरीका इसलिए नहीं बताऊंगा क्योंकि आई एम नॉट सपोज टू टेल ईच एंड एव्री डिटेल पर हिंट दूंगा और आप समझ जाएंगे। एनपीसीआई जो है नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया उसने एक प्रोविजन दे रखा है फीचर फोन के थ्रू भी पैसे ट्रांसफर करने का। यूपीआई या फीचर फोन पर भी कर सकते हैं। यू डोंट नीड स्मार्टफोन कीपड फोन पर भी होता है। उसमें एक कोड होता है स्टार 99# करके तो उसके थ्रू होता है। तो यदि क्रिमिनल ने वो सिम निकाला और किसी फीचर फोन में डाला और स्टार 99# करके यूपीआई करना चाहा तो वो कर सकता है लेकिन उसको यूपीआई पिन चाहिए होगा। उसमें यूपीआई पिन रिसेट का ऑप्शन भी होता है। [हंसी] टेलीफोन वोट भी आ गया। अब लेकिन यूपीआई पिन रिसेट करने के लिए आपको एक इनफेशन और चाहिए जो मैं अब इतना आसानी से बताऊंगा कैसे मिलेगी और उसके बाद पैसे निकल जाते हैं। बस वही एक छोटा सा हिंट मैं नहीं देना चाहता। बाकी अब सब समझ गए कैसे होगा। पर आप देखिए रिस्क कितना बड़ा है। यदि आप फोन चोरी हो तो रिस्क यह है कि आपके यूपीआई से पैसे निकल सकते हैं। तो क्या करें? आप अपने सिम कार्ड को लॉक कर सकते हैं। आपके सिम पर पिन लग जाता है। यदि कोई सिम दूसरे फोन में डालेगा तो उसको पिन डालना पड़ेगा। तब जाके वो यूज़ होगा। तो वो लगा ले। इतना बुद्धि आदमी लगाता ही नहीं उठ रहा है। नहीं पर मैं अभी भी उसको गलत नहीं बताऊंगा। देखिए मेरा जो थॉट प्रोसेस है ना आदमी इतना जाता ही नहीं। सर आदमी बड़ा कैजुअल रहता है। आदमी को कैजुअल ही रहना चाहिए। हम सारी चीजों की ठीक है। हम अब आप किसी साइबर सेफ्टी अवेयरनेस कैंपेन में जाइए। हम वो आपको ये पीपीटी में साहब पासवर्ड कॉम्प्लेक्स होना चाहिए और इतना इस लेंथ का होना चाहिए। फिर आपको एक कैंपेन दिखाई जाएगी। डोंट शेयर ओटीपीस। हर जगह पोस्टर लगे हैं। मुझे बताइए आज तक किसी ने मतलब हम पब्लिक को इतना बेवकूफ समझते हैं कि वो ओटीपी बांटते फिर रहे हैं कि हां लिखिए ओटीपी। अरे वो अपना बैंक का ओटीपी दीजिए। हां लिखो ना। ऐसे होता है क्या? मतलब शुरू में शायद रहा होगा जब तो नहीं उस तो पर अभी भी कैंपेन तो वही चल रही है तो ऐसा क्यों है ओटीपी कभी दिया नहीं जाता है ओटीपी हमेशा लिया जाता है अभी मैंने आपको कुछ तरीके बताए अभी दो तार और बता दूंगा तो आपको लगेगा यार ऐसा भी हो सकता है बट हर बार ट्रिक अलग है और उस ट्रिक में कोई भी फंस सकता है जिसने ये पोस्टर सुबह से शाम भी देखा होगा ना हम मतलब वो भी फंस जाएगा आप मुझे भी फंसा सकते हो मैं इमेजिन कर सकता हूं तो इससे आप के उस अवेयरनेस से कोई फायदा नहीं हो रहा ना माय पॉइंट इज़ दैट कि इवन इफ यू आर ट्राइंग टू क्रिएट अवेयरनेस। बट इफ इट इज़ नॉट डायरेक्ट करेक्ट नहीं है। बट जैसे पुलिस लेट आती है ऐसे साइबर क्राइम भी लेट से अपडेट करता हूं। [हंसी] उसी लेट में तो सर करोड़ों का खेल हो जाता है। दिक्कत तो यही है। अगर मैं 3000 करोड़ का डिस्टरेस्ट हो गया ना उसी अगर मैं बहुत इजी करता हूं। एक आम इंसान जो आपको सुन रहा है। अपने फोन में कैसे सेफ रखें? मतलब मैं देखिए बेसिक घूम फिर के वहीं आ गया मैं। एक तो हो गया कि अगर बहुत स्मार्ट हैकर है जैसे हम कहते हैं ना कि ताला हम शरीफों के लगाते हैं। वरना तो जिसको चोरी करना हो कर ही लेगा। शरीफ आदमी की नियत खराब ना हो इसलिए हम ताला लगाते हैं। ऐसे ही अगर कोई बहुत हाईली प्रोफेशनल उस लेवल का है वो तो आपका फोन कैसे भी हैक कर लेगा। एक नॉर्मल हैकर से बचने के लिए एक आम इंसान को आम भारतीय को क्या करना चाहिए? चार पांच चीजें हैं जिसमें क्योंकि आप सेटिंग्स पे जाना चाह रहे हो तो मैं आपको क्विकली कुछ सेटिंग्स बताऊंगा। सबसे पहले तो आपका टू फैक्टर WhatsApp टू फैक्टर ऑथेंटिकेटेड होना चाहिए। हम यदि नहीं है तो कर लीजिए। हम WhatsApp की सेटिंग्स में जाएं। अकाउंट्स करके ऑप्शन आएगा। उसमें तीसरा ऑप्शन है टू स्टेप वेरिफिकेशन। क्लिक कीजिए। उसमें छह डिजिट का कोड मांगा जाएगा। वो छह डिजिट का कोड आपका डेट ऑफ बर्थ नहीं होना चाहिए। कुछ और हो ऐसा हो जो सिर्फ आपको पता है। किसी और को नहीं पता है तो आपका WhatsApp सेफ। अब आपका कोई ओटीपी भी ले ले WhatsApp का या फोन भी चोरी हो जाए आपके WhatsApp में कोई एक्सेस नहीं कर पाएगा। डन। WhatsApp सेफ है तो आपकी 90% लाइफ सॉर्टेड है। अब आते हैं आपके Facebook पर। Facebook पर लोग कंप्लेन करते हैं कि साहब मेरी Facebook की प्रोफाइल पिक्चर निकाली। नया प्रोफाइल बनाया। मेरे दोस्तों को रिक्वेस्ट भेज रहे हैं और पैसे मांग रहे हैं या उनको हैक करने की कोशिश कर रहे हैं। दो सेटिंग कर लें। आपका Facebook कभी हैक नहीं होगा। हैक इन द सेंस क्लोन नहीं होगा। हैक से बचने के लिए तो उसके भी टू फैक्टर ऑथेंटिकेटेड कर लें। आपके जितने अकाउंट हैं उसमें टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन तो मस्ट है। नहीं है तो मान के चलो कि वो आज नहीं तो कल हैक हो ही जाएगा। पर यह कर लेंगे तो आपका क्लोन भी नहीं होगा। क्योंकि क्लोन क्यों करना चाहता है कोई क्रिमिनल आपका Facebook? क्योंकि वो आपके दोस्तों को लूटना चाहता है आपके अब भरोसे को इस्तेमाल करके। वो कैसे जानता है कि आपके दोस्त कौन है? क्योंकि वो दिख रहे हैं सामने। पब्लिक प्रोफाइल है। नहीं आपने फ्रेंड लिस्ट पब्लिक कर रखी है। हम अब आपके दोस्त यदि मुझे दिख रहे हैं तो मैं ल्योर हो जाऊंगा उसको क्लोन करके लूटने के लिए। आप अपने Facebook की सेटिंग्स में जाएं और उसमें एक ऑप्शन आता है हु कैन सी माय फ्रेंड लिस्ट उसमें चार ऑप्शन आएंगे दोस्त देख पाएं सारी दुनिया देख लें इन बदमाश दोस्तों के अलावा सब देख लें ओनली मी उसमें ओनली मी सेलेक्ट कर लें कोई जरूरत नहीं है कि आपके दोस्त किसी को भी दिखाई जाए कोई उसका बेनिफिट नहीं है क्रिमिनल आपके दोस्त नहीं देख पाएगा तो आप बच गए दूसरा तरीका है कि आपकी जो पोस्ट है वो पब्लिक है यदि वो पब्लिक है और उसको कोई लाइक कर रहा है मान लो 50 लोगों ने लाइक कर दिया 100 लोगों ने लाइक तो 100 आपके दोस्त हैं ना यदि आप अपनी पोस्ट की विजिबिलिटी सिर्फ दोस्तों तक रखेंगे हु कैन सी माय फ्यूचर पोस्ट ओनली फ्रेंड्स सर बट लाइक के दौर में जब आदमी चाहता है कि नहीं लाइक दिखाई पड़े मैं बता रहा हूं ना देखिए Facebook दो तरीके से इस्तेमाल करते हैं आप Facebook पेज का पर्पस अलग है। Facebook प्रोफाइल का पर्पस अलग है। प्रोफाइल में तो एक लिमिटेड दोस्त ही रख सकते हैं। आप 5000 से ज्यादा की लिमिट नहीं है। अब तो वही पेज बना दिया उन्होंने। आपका पर्पस क्या है? पहले यह क्लियर कर लीजिए। यदि आपका पर्पस यह है कि आप फ्रेंड सर्किल के साथ कम्युनिकेट कर रहे हैं तो उसको पब्लिक मत कीजिए क्योंकि आप ऐसी इंफॉर्मेशन लीक कर देंगे उसमें जो बड़ी प्राइवेट भी हो सकती है। पर यदि आपका पर्पस है कि आप फैन बेस क्रिएट करना चाहते हैं तो घर की पिक्चर नहीं डालोगे ना आप उसमें। फिर आप वैसी चीजें नहीं डालोगे ना जो आपके लिए खतरा खड़ा हो सकती हैं। अमिताभ बच्चन कभी अपने घर की पिक्चर डाले आज तक? तो आपका पर्पस तो सेट हो पहले। आप क्या कर रहे हो? अब प्रोफाइल पब्लिक कर दिया और उसमें सारी चीजें अपनेप ये भी बता रहे हो कि घर में आज क्या खाया था पिया था पीछे टीवी कौन सा है ये सब ही तो खतरा क्रिएट कर रहा है और वो कोई भी देख पा रहा है एंड यू हैव मेड इट सो इजीली फॉर द क्रिमिनल ये कल के दिन मैं आपकी एक प्रोफाइल पिक्चर देख लूं या वो घर की पिक्चर देखूं या बर्थडे केक कट रहा है और पीछे एक टीवी है और टीवी Samsung का है। दैट इटसेल्फ कैन गिव मी अ हिंट कि यार मैं कॉल करता हूं। किस तरह की जिंदगी है? कैसा है? नहीं नहीं मैं कॉल करूंगा कि मैं Samsung से बोल रहा हूं सर और आप तो लॉयल कस्टमर हैं Samsung के। आपके यहां तो Samsung के प्रोडक्ट हैं। हां है। लॉटरी लगी सर। खेल कहीं से भी शुरू हो सकता है। सबसे ज्यादा कौन लोग ट्रैप होते हैं? मिडिल एज्ड बूढ़े लोग, जवान लोग या सबसे ज्यादा का केस नहीं है यहां पर। हम्। यदि आप नुकसान इन टर्म्स ऑफ़ मॉनिटरली नुकसान बात कर रहे हो, तो सबसे ज़्यादा वही उसी का सबसे ज़्यादा नुकसान होगा जिसके पास पैसा सबसे ज़्यादा होगा। वो ऑफ़ कोर्स सीनियर सिटीजन के पास ज्यादा है। क्योंकि उनकी पूरी जिंदगी भर की कमाई निकलती है। सो उस तरीके से देखा जाए तो जो संख्या बल है वो उधर ज्यादा होगा। लेकिन अदरवाइज सबको टारगेट किया जा रहा है। जॉब के नाम पर भी लोग लूट रहे हैं। उनका लॉस 5 लाख, 4 लाख, 3 लाख, 10 लाख में होगा। इन्वेस्टमेंट स्कीम्स के नाम पे लोग लूट रहे हैं। उसमें 50 लाख से 2 करोड़ होगा। सीनियर सिटीजन जो मैं बोल रहा हूं वहां पर डिजिटल अरेस्ट या उस तरह के वो तो अभी 26 करोड़ 23 करोड़ 93 करोड़ ऐसे नुकसान हो रहा है। WhatsApp हम लोग बहुत यूज़ करते हैं। WhatsApp पे पहला सवाल तो यही है कि जो कन्वर्सेशन हमारी होती है जिसमें इंक्रिप्टेड लिखकर आता है। क्या वो वाकई में दो लोगों की चर्चा है या उसे आप फोन हैक करके पढ़ सकते हो। जब WhatsApp कहता है कि एंड टू एन इंक्रिप्टेड है तो इसका मतलब है कि यहां तो यहां इंक्रिप्ट यहां इंक्रिप्ट होगा और वहां डिक्रिप्ट हो जाएगा। ठीक है? पर यदि आपका एंड पॉइंट कंप्रोमाइज है आपका डिवाइस तो वह निकल सकता है। आपके डिवाइस से ही या तो स्क्रीन शेयरिंग करके या स्क्रीनशॉट निकाल के या स्क्रीन रिकॉर्डिंग करके वो डाटा निकलता है। दो में से एक भी एंड पॉइंट कंप्रोमाइज है जिससे आप बात कर रहे हो वो या आप तो भी रिस्क दोनों को उतने ही है। WhatsApp ने अभी एक फीचर डाला AI का। उसमें यह कहा उन्होंने कि भई आपके ग्रुप में जो चैट हो रही है उसकी समरी निकाल के दे सकता हूं। आपका ऑटो रिस्पांस भी कर सकता हूं। बहुत सारे उसमें फीचर डाल दिए गए। तो एआई तो पढ़ रहा है ना। पढ़ेगा नहीं तो समरी कैसे निकाल देगा? तो एआई कौन सा है? एयूआई बीच में है या बाहर है? कैसे मानते हो इसको आप? बट ग्रुप ग्रुप चैट तो इंक्रिप्टेड नहीं होती ना। चैट तो है ना आपकी चैट पढ़ रहा है ना वो आपके बारे में आपके पर्सनल चैट की भी रिससेस वगैरह सेट कर सकता है वो तो उधर भी एक्सेस दे रखा है आपने यदि आप दे देंगे तो जरूर होगा माय पॉइंट इज कि एक एजेंट यदि बीच में आ गया और वो पढ़ रहा है तो वो पीियर टू पीियर वाले प्रोसेस से थोड़ा सा तो अलग हो गया पीियर टू पीियर में तो दो ही थे ना तीसरा तो कोई पढ़ ही नहीं था ना अभी एक एजेंट है जिसने एक्शन लेना है एक एजेंट एक एआई है वहां पर जिसने एक्शन लेना है उसको तो आप दोगे ना वो डाटा तभी तो ले पाएगा वो अब जैसे वन टाइम व्यू फोटो आती है वो प्राइवेट फोटो के लिए होता है कि वो फोटो जो आप एक ही बार दिखाना चाहते हैं आप दोबारा नहीं चाहते दिखाना हम क्या वो आप व्यू कर सकते हो बाद में नहीं नॉर्मली तो नहीं यदि वो डिलीट हो गया वो टेंपरेरी मेमोरी के थ्रू फ्लश हो जाती है बट जैसे बहुत सारे लोग सोशल मीडिया दिखाते रहते हैं कि फाइल में जा के निकाल लेते हैं वन टाइम व्यू इज इट पॉसिबल वेल देखिए सोशल मीडिया पे तो बहुत सारी चीजें ऐसी भी दिखाई जाती है कि आप यहां नंबर डालिए सामने वाले का कॉल डाटा रिकॉर्ड दे देंगे। वो सब ट्रैप है। वो आपको हैक करने के तरीके क्योंकि आप उस प्रोसेस में आगे जाके कुछ भी इंस्टॉल कर लेते हो अपने फोन में और जो इंस्टॉल करते हो वो वायरस होता है। एक सवाल नए बच्चों को लेके नए बच्चे जो होते हैं आजकल रोमांस फोन पे होता है। लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में सारा रोमांस फोन पे है। वीडियो कॉल कर ली उसी माश की चल रही है। एक खतरा है कि आपका पार्टनर रिकॉर्ड कर दिया। आपके जो न्यूड फोटो या बाकी वीडियोस आते हैं। बट अगर हम यह मान लें कि कोई दो लोग जो वीडियो कॉल पर रोमांस कर रहे हैं। क्या वो कोई और भी व्यू कर सकता है या अगर इसको और सिंपलीफाई करूं मैं। फोन कॉल पर दो लोगों का वीडियो कॉल पर रोमांस करना क्या सेफ है या वो डाटा लीक हो सकता है? मेरे पास पुलिस ऑफिसर्स के बच्चों की रिक्वेस्ट पड़ी हुई है। पुलिस ऑफिसर्स खुद आए कि साहब इनके इस तरह के वीडियो रिकॉर्ड हुए वो वीडियो कॉल पे ही रोमांस हो रहा था। एक पार्टी ने रिकॉर्ड कर लिया और उसके बाद जब वो ब्रेकअप होता है या जो भी सिचुएशन होती है वो लीक हो गया। दूसरी पार्टी कह रही है कि साहब मैंने तो नहीं किया है। अब वो अलग-अलग सिचुएशन से लीक होता है। वो हो सकता है कि फोन का एक्सेस रूम में पार्टनर के पास तो लीक हो गया। हो सकता है इसी ने भी किया हो। क्योंकि कई बार इसका चेहरा ब्लर दिख रहा है पर उसका दिख रहा है। बहुत सारी सिचुएशन आई मेरे पास। पर हम किसी भी सिचुएशन में पूरी तरह हेल्प नहीं कर पाए। एक बार डाटा इंटरनेट पर गया तो गया। फिर वह डिलीट नहीं होता। फिर वो इतना मशरूम कर जाता है, इतनी जगह चला जाता है कि मैं रिक्वेस्ट भेज भेज हटवाता भी रहूं ना तभी पूरी तरह नहीं हटवा पाता और फिर वो फिर से सर्विस करता है। तो जो मेरी वार्निंग ये है कि कभी यह रिस्क लें ही ना। मतलब आप ये कह रहे हो कि आप भरोसा नहीं कर सकते। आप आप ट्रस्ट करते हो सामने वाले पर। मोबाइल पर कभी भी न्यूड वीडियोस या न्यूड कभी न्यूड चैट नहीं करनी है। किसी से बात नहीं करनी है। कभी वह रिस्क ले ही क्यों जिसका इतना बड़ा खामेजा भुगतना पड़ेगा आपको। आप बड़े-बड़े ऑफिसर्स ने जॉब खो दी। एक कॉल आया। कई बार वो शायद इनल्ज हो गए होंगे बातचीत में। अब कोशिश करेंगे Google तो आपको केसेस मिल जाएंगे। पर कई बार तो सिर्फ इतना कि एक कॉल आया। वीडियो कॉल उन्होंने उठाई। सामने देखा एक नेक लड़की है। कपड़ेपड़े उतार रही है और उन्होंने उसको दो चार सेकंड 5 सेकंड देख लिया। अब इनका उसको देखते हुए स्क्रीन रिकॉर्ड कर लिया उसने। और वह स्क्रीन रिकॉर्ड रिपीट मोड में डाल के 15 डेढ़ मिनट का 2 मिनट का बना लिया जो 15 सेकंड 20 सेकंड का था वो इनको वापस भेजा कि डाल दे सोशल मीडिया पैसा दीजिए और लोग देते हैं और ये उन लोगों की बात कर रहा हूं जो बड़े-बड़े बिजनेसमैन हैं गवर्नमेंट ऑफिसर्स हैं जजेस हैं जो ट्रैप हुए गलती से बोले अब मैं क्या करता यार वो तो ऐसा हो गया मेरी तो रेपुटेशन इतनी हाई है तो इसमें तो कोई गलती मानूंगा नहीं तो आपका एक वीडियो कॉल आया अब तो अननोन वीडियो कॉल उठाना ही नहीं है। यदि अननोन नंबर से वीडियो कॉल आ रहा है तो यू शुड बिकम कॉन्शियस क्योंकि यही होगा। यह ट्रैप चल रहा है। बट वो तो नॉर्मल भी हो सकता है कि मैंने आपसे नॉर्मल वीडियो कॉल में बात की और मैंने काट के वीडियो उसको एडिट करवा के लगवा दिया। बिल्कुल होता है। वो जो छोटे विंडो में आप थे उसको काट दिया। उसमें देखिए एक चीज बताऊं हमारे यहां जो इंपर्सनेशन के केसेस हैं जैसे कि मैं आपका वीडियो निकालूं और डीप फेक के थ्रू कुछ ऑब्सिन वीडियो बना दूं और उसके बाद वायरल कर दूं। तो इसमें मेरे ऊपर चार्ज क्या लगेंगे? क्या धारा लगेगी? नो आईडिया कि मैंने आइडेंटिटी थफ्ट की या इंप्रोसिनेशन किया, डिफेमेशन किया। यही धाराएं लग पर यदि सोसाइटी के हिसाब से देखा जाए तो मैंने आपको मार दिया है। हम क्योंकि हमारे यहां चरित्र जिंदगी से भी ज्यादा बड़ी चीज है। आप किसी को मार दो उतना ही बड़ा अपराध है कि आपने उसके चरित्र हनन कर दिया। तो मेरे हिसाब से जो कानून में धारा होना चाहिए कि यदि मैं किसी के संग ऐसा मजाक भी कर रहा हूं कि उसके चरित्र हनन की कोशिश कर रहा हूं तो 307 लगना चाहिए। जहां से मारने की कोशिश की मैंने उसको क्योंकि उसको इंपैक्ट उतना नहीं होने वाला है। ट्रू पर ऐसा है नहीं। इस वजह से ऐसा चीजें लोग आसानी से मजाक में करते हैं। कर दो यार बना दो यार। अब जो सेलिब्रिटीज हैं या जो बड़े लोग उनके तो चल ही रहे हैं। उनको शायद फर्क भी नहीं इतना नहीं पड़ता क्योंकि दे हैव क्रॉस दैट थ्रेशहोल्ड। लेकिन जब एक यूनिवर्सिटी की बच्ची के संग ऐसा होता है तो वह डिप्रेशन में चली जाती है। उसको इंपैक्ट बहुत ज्यादा होता है। उसको हर चीज हर व्यक्ति को उसको डिफेंड करना होता है कि नहीं नहीं वो डीप फेक है। क्यों करना पड़े ये उसकी गलती नहीं व्हाई शी इज? यह जो प्रॉब्लम मैं समझाने की कोशिश कर रहा हूं कि हमारे यहां लॉ में एक रिक्वेस्ट है मेरी थ्रू दिस पडकास्ट कि हमें यह बनाना पड़ेगा कि यदि कोई किसी का चारित्रिक हनन करने की कोशिश करता है थ्रू डीप फेक तो उस पर वही धारा लगाओ जो उसको मानने की कोशिश की जा रही है। वेल सेड बट जो मेरा क्वेश्चन था फिर वो ये था कि दो लोग हैं फोन पर रोमांस कर रहे हैं। मान लीजिए कोई वीडियो रिकॉर्ड नहीं भी कर रहा है आपका उन प्राइवेट मूवमेंट्स का। क्या वो डाटा जो आप वीडियो कॉल पर थे फोन कॉल के दौरान वो भी कहीं स्टोर हो गया है या वो वैनिश हो जाएगा उसमें वो तो वैनिश हो जाएगा वो तो उसी टाइम पीरियड के लिए सर्वर के थ्रू रूट हुआ था बट इट्स अ थ्रेट कि अगर सामने में किसी एक ने रिकॉर्ड कर लिया तो वो जिंदगी भर के लिए वो डाटा इंटरनेट पे मिल जाएगा बिल्कुल कहीं ना कहीं वो पड़ा होगा फिर भले आप डिलीट कर दीजिए अच्छा फोन में डिलीट करने से या रिसेंटली डिलीट करने के बाद डाटा पड़ा होता है डिलीटेड डाटा रिकवर होता ये तो बहुत सारी मैं ऐप की लिस्ट आपको भेज दूंगा। आप दिखा सकते हैं। फ्री एप्स हैं। कुछ पेड एप्स हैं। दो बार फोन फॉर्मेट कर शायद नहीं होता है। ऐसा लोग मतलब मल्टीपल टाइम करोगे तो वो चांसेस कम होते जाए। कहते हैं कि पहली बार फॉर्मेट करो तो रिकवरी हो जाती है। अगर आपको किसी को फोन बेचना है तो सेकंड टाइम फॉर्मेट दो तीन बार करना ठीक रहता है। मैं तो नॉर्मली कहता हूं पांच छह बार करोड़ होशियारी हमने भी सीखी [हंसी] क्योंकि क्रिमिनल अक्सर देखो मैं हमेशा एक लाइन बोलता हूं इन्वेस्टिगेशन में कि किसी के बारे में जानना है तो उसके फोन का डाटा मत देखो उसका डिलीटेड डाटा देखो उससे उसके बारे में समझ आता है कि वो असली में क्या है कि जो इनकॉग्निटो मोड होता है जिसमें लोग बहुत सारी चीजें करते हैं जो दुनिया को नहीं दिखानी है क्या इनकॉग्निटिवो मोड का डाटा रिसीव हो सकता है आमतौर पर नहीं होता क्योंकि इनकरिनेटो मोड क्या कर रहा है कि आपका जो भी मेटा कीवर्ड्स हैं हम जो आप वेबसाइट एक्सेस कर रहे हैं वो लिंक्ड नहीं है आपके लॉगिन आईडी से बेसिकली जो अभी आप क्या करते हो जब ब्राउज़र ऑन करते हो तो आपका ईमेल आईडी से हर चीज लिंक्ड है। सो हमें पता है कि इसको किस तरह की चीजें देख रहा है क्या कर रहा है तो एडवर्टाइजमेंट वैसे आएंगे वो अब लिंक्ड नहीं है लेकिन एक अभी फनी वो हुआ कि इनक्यूटिव मोड में भी कुछ डाटा है जो Google लेता है। उसके बेस पर उस पर केस भी हुआ था। फिर शायद वो फिक्स भी हो गया। पर ये रिस्क हमेशा रहते हैं। मैं हमेशा कहता हूं कि आप किस चीज पे भरोसा कर रहे हैं? आप Google पे भरोसा कर रहे हैं या Facebook पे भरोसा कर रहे हैं या यूएस पे भरोसा कर रहे हैं या चाइना पे भरोसा कर रहे हैं। आपका भरोसा है किस चीज पर? आप Apple पे हां एक्सैक्टली वही मैं कह रहा हूं। आप Apple पे भरोसा कर रहे हैं। अब मैं Apple की कहानी सुनाऊंगा फिर। हां एक एक अभी ट्रेंड चला है गिबली ट्रेंड हम कि साहब गिबली पे इमेज मत देना वो इमेज बन जाती है जो जैपनीज तरीके के कार्टून बन जाते हैं क्योंकि वो पर्सनल डाटा चला जाएगा ये चला जाएगा बहुत सारे साइबर एक्सपर्ट ने उसको वर्न करने की कोशिश की और मुझे हंसी आई मैंने कहा यार तुमने अपनी सारी पिक्चर Facebook और Instagram को दे रखी है एक पिक्चर गिवली को देने में तुम्हारा बड़ा प्राइवेसी लॉस हो जाएगा तो आप ऑलरेडी इतना एक्सपोज्ड हो अब आप गिवली को दे भी दोगे तो कुछ फायदा बिगड़ने वाला किसी का है नहीं या जो साड़ी वाला ट्रेंड आया मैं किसी को कुछ करने से रोक नहीं रहा हूं कि आप यह मत करो। अवेयर कर रहे हो। मैं सिर्फ यह बताना चाह रहा हूं कि आपको पता होना चाहिए कि ये डाटा बाहर बस फिर आप सेफ हैं। गारंटेड सेफ हैं। 99% लोगों को पता नहीं है। इसलिए आपको कॉल आया कि साहब मैं फलाना इंश्योरेंस कंपनी से बोल रहा हूं। अच्छा आपका इंश्योरेंस नंबर यही है। हां प्रीमियम यही था। लास्ट प्रीमियम यही दिया था। एड्रेस यही है। पैन कार्ड यही है। हां साहब यही है। अरे सर आपका तो डिविडेंड पड़ा हुआ है। और आप भरोसा कर लिए। क्यों? क्योंकि आपको इतना डिटेल दिया गया। Apple Android में ज्यादा सेफ कौन है? हालांकि तो मुझे लगता है कॉमन आंसर Apple ही होगा। पेगसिस जब बना था तो सबसे पहले किसके लिए बनाया गया था? Apple के लिए। Android के लिए नहीं बना था पहले। तो जब Apple मिस कॉल पे पूरा Apple हैक होता था। iPhone मिस कॉल पे पूरा हैक होता था। पेसिस से। एनएस ऑर्गेनाइजेशन ने बनाया था इजरायल की। मिस कॉल कैसे रोक लोगे आप? और iPhone है इसको आप रोक लोगे। उसके बाद उन्होंने Android इसलिए रिलीज किया कि आप गरीबों को भी लूट लेते हैं। लेकिन आप सोच के देखिए [हंसी] कि जिस ट्रस्ट की आप बात कर रहे हो कि मैं Apple पे ट्रस्ट करता हूं। फिर क्या हुआ उस ट्रस्ट का? लेकिन iPhone को तो iPhone मतलब फिर भी एक टफ होता है। जैसे iPhone में मेरा मोबाइल लॉक हो गया। अब इससे इजी क्या होगा भाई? मिस कॉल क्लाउड नहीं। मुझे बताइए मिस कॉल से फोन हैक हो रहा है। इज इट अ टफ वे ऑफ़ हैकिंग और ईजी वे ऑफ़ हैकिंग? ईजीएस्ट। तो फिर आप कह रहे हो नहीं उस पे तो टफ होता है। इस बात से फर्क नहीं पड़ता सर। बट मिस कॉल से कैसे हैक? मतलब आप देख लीजिए पिगसिस कैसे हैक होता करता था फोन। मिस कॉल से ही करता था। तो आई एम श्योर उसको Apple ने शायद इतना भरोसा अपडेट किया हो कुछ किया होगा बेहतर। [हंसी] अब ये मेरे मुंह से आप मत कहलवाइए वरना कल के दिन Apple वाले नोटिस भेजेंगे। देखिए टेक्निकली क्योंकि मैं फोन कंपनीज़ में पूरा काम किया है Samsung से लेकर Qualcomm तक। तो, मिस कॉल पे फोन जब तक हैक नहीं हो सकता जब तक पीछे से प्रोविजन ना दिया गया हो। बैक डोर का जब तक साठगांठ ना हो दैट इज नॉट पॉसिबल। यह मानना संभव ही नहीं। अब यही चीज कहने में लोग चाहते हैं कि साहब ऐसे कैसे? और 4 साल तक बिकता रहा ये। 2016 में एनएसओ ने रिलीज किया और 2019 तक बिकता रहा। और एनएसओ ने कहा कि हमने सारी गवर्नमेंट को बेचा तो कोई छुप के थोड़ी ना बेच रहे थे वो। बता के बेच रहे होंगे कि WhatsApp पर एक मिस कॉल कीजिएगा। मिस कॉल किस पे आती थी? WhatsApp पे। नॉर्मल कॉल नहीं आपको iPhone कैसे दिया गया? बहुत सेफ है साहब। कोई क्रैक नहीं कर सकता। WhatsApp कैसे दिया गया? एंड टू एंड इंक्रिप्टेड। नोबडी कैन स्नूप इनू इट। मोस्ट सेफ। अरे भाई यह भी सेफ है। ये भी सेफ है। इस पे मिस कॉल आती है और यह हैक हो जाता है। काहे की सेफ्टी? फिर आप कह रहे हो कि यार नहीं टफ है, इंसान है। लॉजिकल बात है कि नहीं? बट जैसे हम मानते हैं कि WhatsApp कॉल सेफ होती है। फोन कॉल [हंसी] की तुलना में। होती है। मैं उसको डिनाई नहीं कर रहा हूं। पर फिर यह भी तो होता है। यह भी तो आप ही के सामने हुआ है। और यह दोबारा नहीं होगा इसकी क्या गारंटी है? भैया नहीं हो रहा है इसकी क्या गारंटी है? ये कोई इज़ियर वे है आप जिसके जिसके थ्रू ऑलरेडी हो चुका है। WhatsApp कॉल का डाटा निकाल सकते हो या निकल जाता है। मैं नहीं निकाल सकता। मतलब निकल जाता है। तरीके हैं। देखिए तरीका क्या है कि मैं इतना निकाल सकता हूं कि आपने WhatsApp पे किससे बात की? कितनी देर बात की? नहीं जैसे मैंने WhatsApp कॉल अपनी की और फिर मैंने लॉग डिलीट कर दिया। जीरो कर आप लॉ डिलीट कर दो पर आपकी आईपीडीआर पे वो डिटेल्स रहते हैं कि तो अगर कोई साइबर एक्सपर्ट चाहे तो निकाल सकता है। हां एफर्ट लगता है। देयर इज़ अ वेरी गुड अमाउंट ऑफ़ डेटा एनालिसिस दैट दे नीड टू डू बट मैं निकाल लेता हूं कि मैं आपके कॉल डाटा रिकॉर्ड जिसको बोलते हैं ना कि WhatsApp पे आप किससे बात कर रहे थे कि या फेस टाइम पे करें तो जो आप जितना एक्सक्लूसिव एप्स यूज़ करना शुरू करोगे कि मैं फेस टाइम पे कर रहा हूं। उतना मेरे लिए और आसान होता चला जाएगा। या मैं ज़ेंग पे कर रहा हूं या मैं डिस्कॉर्ड पे कर रहा हूं या मैं वीpए यूज़ कर रहा हूं। बिकॉज़ फिर वो जो एनालिसिस मैं डेटा का कर रहा हूं मेरी एफर्ट्स थोड़े से कम हो जाते हैं। क्योंकि अब आप स्पेसिफिक एप्स यूज़ कर रहे हो। इस देश में कई नेताओं ने बीच में चर्चा उठाई थी कि उनके फोन सबके हैक्ड हैं। पिगैसिस के टाइम पे उठाई थी। हां। मतलब और कई बार बड़े नेता कहते भी हैं विपक्ष वाले खासतौर पर कि सबके फोन सुने जा रहे हैं। सबके फोन। वो सच कह रहे हैं। सवाल उनको ये नहीं करना चाहिए कि मेरे फोन हैक हैं। उनको ये बोलना चाहिए कि किसने हैक किए हैं। [हंसी] सवाल ये है। तो ये सच है कि सरकारें चाहे तो सबके फोन हैक कर सकती हैं। देखिए 2019 में जब पेगेसिस का मामला उठा 2016 से 2019 तक सारी सरकारों ने पेगसिस लिया। भारत ने नहीं लिया नहीं लिया मैं नहीं जानता। पर एनएस ऑ्गेनाइजेशन ने तो यही कहा कि हमने बेचा सबको बेचा लिस्ट दे दी यूज़र्स की लिस्ट दे दी 1400 1500 यूज़र्स की लिस्ट भी दी एक बार यदि कुछ ऐसा हुआ है तो आप ये कैसे डिनाई करोगे कि दोबारा नहीं हो सकता एक बार तो हुआ है सबके सामने हुआ है ओपन भी हुआ है और दोबारा क्यों नहीं होगा अब हमने यहां आंखें खुल गई हमारी अब हम ज्ञान चक्षु खुल चुके हैं हमारी इसलिए नहीं होगा एक एनाम ऐप आई दो तीन साल पहले ए एनओ एम एनोनिमस से डार्क वेब पे प्रमोट की मोस्ट सिक्योर ऐप है। WhatsApp से भी ज्यादा सिक्योर 100 टाइम सिक्योर एंड टू एनक्रिप्टेड कोई इसमें घुस नहीं सकता देख नहीं सकता। सारे क्रिमिनल एनएमएफ यूज़ करने लगे सारे क्रिमिनल। उसके बाद एफबीआई ने आठ कंट्रीज में रेट डाली और 16 बिलियन डॉलर के एसेट कॉन्फिस्केट किए। लग्जरी कार्स, बिटकॉइंस, घर, करेंसीज, ड्रग, आर्म्स, एमुनेशंस सब कुछ। पता क्यों? एन ऐ मैप एफबीआई ने बनाई थी। उनको डार्क वेब पर एक बंदा मिला। उन्होंने उसको कूटा। उससे कहा कि गेम को बड़ा बनाते हैं। एक ऐप है मेरी तुम ऑलरेडी क्रेडिबिलिटी है आपकी। तो इस ऐप को प्रमोट करूं। जब बहुत सारे यूजर हो जाएंगे तो हम धप्पा कर देंगे। तो आप किसी और ऐप पे कैसे विश्वास कर सकते हो कि उसके पीछे इस तरह का गेम नहीं होगा। ठीक है। अब देखो मैं ठहरा मासूम आदमी। मासूम आदमी इंटरनेट चलाता है। मैं अपने लैपटॉप में जाता हूं। सफारी क्रrome खोला इंटरनेट चलाता हूं जो वेब है मेरा। मुझे नहीं पता डार्क वेब क्या है? मैंने इसके थंबनेल बहुत सारे देखे हैं YouTube पे जिसमें बड़ी मनोहर कहानियां ऐसा लगता है मुझे सुनाई जा रही है या हॉरर कहानियां सुनाई जा रही है। ऐसे थंबनेल बन के आते हैं। हां। डार्क वेब क्या है? ये कहां मिलता [हंसी] है? देखिए पहले तो ये मिलता कहां है? डार्क वेब यदि आपको मनोहर कहानियां लगता है मतलब मेरे क्यों थंबनेल देखें मेरे लैपटॉप में नहीं दिख रहा मुझे डार्क वेब डार्क वेब कहां मिलता है कौन लोग चलाते हैं क्या होता है डार्क वेब सो डार्क वेब एक्सेस करने के लिए आपको एक ब्राउज़र की जरूरत होती है जिसका नाम है tor ब्राउज़र द अनियन राउटर टीओआर टीओआर जो आप Google पे ढूंढोगे तो मिल जाएगा पहली लिंक मिल जाएगी आप डाउनलोड कर लो हां ठीक है उस ब्राउज़र से आप फिर वो वेबसाइट एक्सेस कर सकते हो जो डार्क वेब की वेबसाइट है जिसको अनियन वेबसाइट होती है वो oi जिसके कि डोमेन नेम जो होते हैं वो 16 कररेक्टर के या 56 कररेक्टर के रैंडम नंबर होते हैं। वो नहीं होगा डोमेन नेम वो 1 2 3 अल्फा थीटा बीटा गामा करके मतलब कुछ भी रैंडम नंबर होंगे 16 कररेक्टर डॉट अनियन या 56 कररेक्टर डॉट अनियन ऐसे होता है। वो जानबूझ के ऐसे बनाए जाते हैं ताकि लोग याद ना रख पाए। डायनेमिक है। जितना इंटरनेट आपने एक्सेस किया आज तक वो 3% है इंटरनेट का टोटल इंटरनेट का। उससे ज्यादा आप एक्सेस कर नहीं सकते Google के थ्रू क्योंकि Google ने उसको इंडेक्स ही नहीं कर रखा। आप Google के थ्रू वही तो देखोगे जो Google इंडेक्स करके बैठा है। उसमें 90% डीप वेब है और 7% डार्क वेब है। डीप वेब क्या है? जितना क्लासिफाइड सर्वर्स हैं आधार का सर्वर, पासपोर्ट का सर्वर, यूनिवर्सिटीज के सर्वर, हॉस्पिटल के सर्वर जो लॉग इन पासवर्ड के थ्रू एक्सेस होते हैं बट वो है तो इंटरनेट पे ही उसको डीप वेब बोलते हैं। डार्क वेब 7% है। जो सारी वेबसाइट टॉर प्रोटोकॉल बेस्ड डिजाइन डार्क वेब पर वो हर इललीगल चीज होती है जो आप कल्पना हां जैसे मैंने ये हिंदी फिल्मों में वेब सीरीज में बहुत देखा है कि डार्क वेब चल रहा है एक असुर आई थी उसमें भी दिखाया उन्होंने कि वो तो एक चैट बॉक्स की तरह दिखा देते हैं डार्क ऐसा नहीं होता है अभी एक और फिल्म आई मैंने कोई मलयालम फिल्म थी उसमें भी डार्क वेब दिखा रहे थे वो और हमें हंसी आ रही थी यार डार्क [हंसी] वेब ऐसा नहीं होता कि चैट कर रहा है किसी से मतलब डार्क वेब पे मैंने सुना कि लड़कियां बिक जाती सारे क्राइम होते हैं, बंदूक होता सब कुछ है। डार्क वेब पे 60 70% तो चाइल्ड पोनोग्राफी है। डार्क वेब पर ड्रग्स मिल रही है। गंस अमिनेशन मिल इंडिया में भी हां कहीं पे भी डिलीवर करा लो आप। डार्क वेब पर कॉन्ट्रैक्ट किलर हायर होते हैं। डार्क वेब पर हैकर्स हायर होते हैं। डार्क वेब पर डाटा चोरी का बिकता है। डार्क वेब पर आप अटैक के लिए पर्स लोग इंगेज कर सकते हो। डार्क वेब पे आप चोरी के पासपोर्ट ले सकते हो। अपना पासपोर्ट बनवा लो किसी भी कंट्री का करेंसीज ले सकते हो। सो कोई भी इललीगल चीज जो आप सोच सकते हो दैट्स हैपनिंग ओवर देयर। तो यह तो साइबर एक्सपर्ट्स को पता है। सबको पता है साइबर एक्सपर्ट क्या ही पता है। पकड़े क्यों साइबर फिर से डार्क वेब चल क्यों रहा है? अगर इतना खराब है डार्क वेब दुनिया में जितनी खराब चीजें आपने बंद कर दी। नहीं। क्यों? क्यों चल रही है? करो बंद। बट ये तो एक्सट्रीम खराब वाली चीज है ना कि पोनोग्राफी है। लड़कियां बेचे जा रहे हो। ड्रग्स बेच रहे। रशियन यूक्रेन युद्ध बंद कर सकते हैं। नहीं एक्सट्रीम खराब है। हां। मतलब वही कारण डार्क वेब का है। उसमें आपको जमीन की लड़ाई है कि दोनों की अलग-अलग पॉलिसी है। उन्हें लग रहा था कि भाई जमीन सेटो नेटो आ जाएगा हमको पावर दिखानी है। उसकी थ्योरी अलग है। जमीन से ज्यादा इकॉनमी की लड़ाई है। मैं आपको बताता हूं। 2008 जो था वो थोड़ा सा इंटरेस्टिंग ईयर था। हम 2008 में डार्क वेब आया। 2008 में बिटकॉइन आया, iPhone आया, WhatsApp आया। 261 का अटैक भी हुआ। अब ये सारी चीजें थोड़ा सा इंटरलिंक थी। कैसे डार्क वेब किसने बनाया? यूएस ने। यूएस डिफेंस का प्रोजेक्ट था। 93 के आसपास स्टार्ट हुआ। क्यों बनाया था? क्योंकि जो उनके जासूस थे दूसरे देशों में ईरान, इराक, अफगानिस्तान उनको छुपाने के लिए कि भाई उनकी सर्विलेंस लोकल गवर्नमेंट ना कर ले तो जब वो इंटरनेट से डाटा भेज रहे हैं यूएस तो वो छुपा रहे। सो एक टॉर प्रोटोकॉल डिजाइन किया गया। वो 2008 में एक कम्युनिटी के थ्रू डार्क वेब के फॉर्म में डेवलप हो गया। उसमें टॉर प्रोटोकॉल ओपन सोर्स हो गया और एक कम्युनिटी ने डार्क वेब बिल्ड कर दिया। उसके बाद उसमें इललीगल चीजें बिकने लगी। अब जब डार्क वेब ग्रो कर रहा है तो उसी समय उसी 2008 में बिटकॉइन आता है। बिटकॉइन किसने बनाया? सतोशी नकमोत करके एक बंदा है जापान का। उसका नाम आता है कि साहब उसने एक पेपर लिखा था जिसके बेस पे बिटकॉइन बना। बिटकॉइन कहां बन रहा है? जापान में। डार्क वेब कहां बन रहा है? यूएस। यूएस में। सतोशी नकमोतो नाम का कोई व्यक्ति इस दुनिया में है ही नहीं। सतोषी नकमोतो कौन है कभी किसी ने पता कर ही नहीं पाया। अब वो बंदा एक बिटकॉइन जैसी एल्गोरिदम बनाता है। उस पर एक कम्युनिटी सॉफ्टवेयर बिल्ड कर देती है। ब्लॉकचेन बेस पूरा करेंसी बिल्ड हो जाती है। 2.3 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनमी खड़ी हो जाती है। और वो बंदा छुपा हुआ है। कहता है मैं अपने बारे में नहीं बताऊंगा। क्यों? क्यों नहीं बताएगा? इतना बड़ा महान काम कर रहा है। छुपा क्यों है हम यहां डार्क वेपीए पर लोग ढूंढ रहे हैं और वह सरफेस वे पर छुप के बैठा हुआ है। कैसे? इसका मतलब है कि सतोषी नकोमोतो नाम का कोई व्यक्ति कभी था ही नहीं। तो फिर यह बना कैसे? यह खेल है किसका? यदि डार्क वेब सर्वाइव कर रहा है तो बिटकॉइन की वजह से। क्योंकि डार्क वेब पे यदि आप इललीगल चीजें खरीदोगे तो पैसे कैसे दोगे? आपको एक ऐसी करेंसी चाहिए जो ट्रांसपेरेंट हो और हिडन भी हो। ट्रांसपेरेंट एंड हिडन। कंट्राडिक्टरी वर्ड है। वो ट्रांसपेरेंट भी है, हिडन भी है। ट्रांसपेरेंट क्यों है? क्योंकि आप किस वॉलेट से कहां पैसा डाल रहे हो? पूरी दुनिया देख सकती है। पूरी दुनिया लेजर उसका ओपन है। आप बिटकॉइन का लेजर डाउनलोड करो। देख लो कौन से वॉलेट से कहां पैसा जा रहा है। ओपन तो ट्रस्ट आ जाता है। पर उस वॉलेट के पीछे कौन व्यक्ति है यह आप नहीं कभी नहीं जान सकते। तो हिडन हो गया। आप देख रहे हो बिल्कुल वही चीज जो डार्क वेब को चाहिए। मुझे ट्रांसपेरेंसी चाहिए क्योंकि जब मैं पैसा भेजूं तो मुझे दिखना चाहिए कि पैसा गया है। लेकिन मुझे हिडन भी चाहिए कि मेरे बारे में कोई ना पता पड़े गन मैंने खरीदी है। तो एक इस तरह की करेंसी डिजाइन हुई जिसकी वजह से डार्क वेब ग्रो हुआ और डार्क वेव नहीं होता तो बिटकॉइन की कोई वैल्यू नहीं होती और बिटकॉइन नहीं होता तो डार्क वेव कभी ग्रो कर ही नहीं पाता। अब आप सोचिए कि यह हो क्यों रहा था? यदि इतना इललीगल ही है क्योंकि कुछ देश हैं जिनकी इकॉनमी ड्रग और गंस बेच के ही सर्वाइव करते हैं जिसमें आपका एक यूएस भी है तो जब ईरान इराक का युद्ध हुआ तो यूएस किसके साइड था 9 साल चला शुरू में हां किसके साइड था यूएस ईरान इराक का युद्ध हो रहा था 9 साल यूएस शुरू में शायद इराक की तरफ था वो पूरी तरह से इराक को सपोर्ट किया था उसने 9 साल गंस और सब आर्म सप्लाई इराक को उसने मजबूत किया था बाद में पंगे वहां उसके बाद उसने इराक पे आरोप लगा दिया कि तुम्हारे यहां केमिकल वेपन है और सदाम हुसैन को मार दिया जब ईरान इराक का युद्ध हो रहा था तो ईरान को कौन हेल्प कर रहा था रूस इजराइल जो आज दोनों लड़ रहे हैं इजराइल ने सारे आर्म्स दिए ईरान को और इजराइल आर्म्स दे कैसे रहा था अमेरिका से लेके अमेरिका से लेके और ये ओपन है अब आप Google करना आपको पूरा मिल जाएगा कि वो ओपन हो गई है कॉन्ट्रैक्ट उनका। तो अमेरिका 70 हां अमेरिका बेच रहा था। ईरान ने सारे इजराइल से ही हथियार खरीदे थे। अमेरिका सारे इधर भी बेच रहा है। इधर भी लड़ा रहा है। 9 साल उसने इकॉनमी उसकी ग्रो की है। मजे लिए उसने लड़ो 9 साल। फिर उसको निपटा दिया। फिर उस पे कंट्रोल कर लिया ईरान पे। अब ईरान उसके उसमें है। अब आप जरा देखिए कि जब उसकी ये थ्यरी उसकी एक्सपोज हुई तो उसको एक ऐसा प्लेटफार्म चाहिए था जो छुप के हथियार बेचे जा सके। चाहे नेक्सलाइट्स को, चाहे टेररिस्ट को, चाहे किसी को। यह लोग थोड़ी ना हथियार बना लेंगे यार। आइस वाले खुद हथियार बना लेंगे। उनकी फैक्ट्रियां है। कौन दे रहा है उनको हथियार? कितने हैं देश जो हथियार बना सकते हैं। इंडिया खुद इतने कम हथियार बना पाता है। आप देखिए तो ये इकॉनमी ड्रिवन मतलब आप ये कह रहे हो कि अगर मुझे कोई प्लेटफार्म है। एक हथियार चाहिए मैं डार्क वेब के थ्रू यहां डिलीवर करा सकता। बिल्कुल करा सकता है। वो लोग कराते हैं। लड़की डिलीवर करा सकता हूं। लड़की तो सरफेस वेब पे भी डिलीवर हो जाएगी। [हंसी] आप ये क्या कर रहे हैं? मतलब सारी इललीगल चीजें। हां हां लड़की के लिए लेकिन लड़की को मतलब किसी को मरवा सकते हैं आप कांटेक्ट किलर हायर कर सकते हैं बिना मेरी पहचान बताए ऑफकोर्स कि इतना पैसा उसका जो चार्जेस होंगे दे दो और जाके ठोक देगा और ऐसे लोग इंडिया में हैं जो एक्टिवली यूज़ कर रहे हैं। ऐसे लोग पकड़े गए हैं इंडिया में। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने पकड़े हैं। डार्क ग्रुप पे जो ड्रग्स मंगाते थे अरेस्ट हुए। तो ऐसा नहीं है कि डार्क ग्रुप पे छुपाए हो तो छुप जाओगे। उसको पकड़ने के तरीके भी हैं जिसके ऊपर हम ट्रेनिंग लेते हैं पूरा। तो अब जैसे आपकी बात इतनी बातें सुनकर कोई एक ऐसा आम आदमी जिसको Google जाके टीओ और लिख के और ढूंढना शुरू कर दे जो डाकवे लैपटॉप पे यूज़ कर रहा है। क्या उसका लैपटॉप या मोबाइल सेफ है? [हंसी] नहीं रिस्क है। देखिए आप वही तो कह रहे हो कि जब आप कोई भी ऐसा प्लेटफार्म इस्तेमाल करते हैं जहां आप छुपे हैं तो क्रिमिनल भी तो छुपा है। हां तो वही पूछ रहा हूं। तो जो डार्क वेब का इस्तेमाल उत्साह में जाके ढूंढ वो कोई गलती से क्लिक करेगा तो हो सकता है उसप कोई लीगल एक्शन हो जाए। हो सकता है कि वो कोई ऐसी गलती कर दे कि उसका डाटा या पैसा निकल जाए। बहुत कुछ रिस्क है ना। तभी तो मैं कह रहा हूं कि वो बच्चों का खेल भी नहीं है कि आप गए मजे लेने के लिए और देख के चले आए। आप जब भी किसी ऐसे डोमेन में एरीना में उतरेंगे तो इस रिस्क के संग उतरेंगे कि वो खतरा आपको पर्सनल हम डार्क वेब की सबसे शॉकिंग कहानी आपने क्या सुनी जिसने आपका दिमाग खराब कर दिया। कह रहे हैं। देखिए मैं 2013 या 14 के आसपास जब डार्क क्यूब स्टार्ट किया एक्सप्लोर करना इन्वेस्टिगेशन के लिए तो सबसे पहले जो वीडियो सरफेस हुआ वो था हम्म हाउ टू कुक ए लाइव वूमन तो उसमें एक औरत को वो लोग लेके आए थे जिंदा और उसको फिर जिंदा कुक किया था और वो वीडियो उसकी चीखें आप सुनोगे तो आप 10 सेकंड वीडियो नहीं देख सकते मैं आपको बता रहा हूं कि जब हम लोग फिल्मों में मर्डर या क्राइम देखते हैं ना वो कभी उतना रियलिस्टिक होता ही नहीं है। जब आप डार्क पे देखोगे तो आप पत्थर हो जाओगे। मतलब उसकी जो आंखें दिख रही होंगी आपको या जिस तरह से वो चीखें दिख रही होंगी आप पत्थर हो जाओ। मैं कई रातों नहीं सो पाया। मैं उसके बाद घुस ही नहीं पाया। मैंने कहा यार ये तो संभव ही नहीं है मेरे लिए। और ये चीज मेरे में आज तक बैठी हुई है। आज भी जब मैं किसी को बता रहा होता तो सट से मैं वहां पहुंच जाता हूं। कि मैंने कोई वेब सीरीज देखना हॉरिफिक उसमें यह ऐसा कुछ था कि डार्क वेब पे लड़कियों को मारने के लिए एक तरीके से कत्ल किया जा रहा था। वो रेड रूम होते हैं। वो भी होता है। एक लेवल पर आप चले जाओ तो डार्क वेब पे लोग किडनैप करके लाते हैं। उसको एक टॉर्चर चेयर पर बिठाते हैं। फिर बोली लगती है और कि इसके संग ऐसा कर दिया जाए, वैसा कर दिया, चौप किया जाए, आंखें निकाल ली जाए। उनकी चीखें लाइव सुनाई जाएंगी। वो अलग लेवल का थ्रिल देता है लोग। कौन लोग हैं ये जो इसको एंजॉय कर रहे हैं। यही है। इन्हीं में से हैं सर। बाहर से नहीं आए। कोई एलियन नहीं है। इसी सोसाइटी में है। हमारे आसपास है। यह इतना बड़ा खतरा है। और हम नहीं पहचानते कि हमें इनमें से और उसका जो आप व्यूज देखोगे तो आप चौंक जाओगे क्योंकि इतने हैं आपने पोनोग्राफिक साइट्स के व्यूज देखे हैं कभी? आपके YouTube के व्यूज से ज्यादा होते हैं। फिर आप कैसे कह रहे हो कि नहीं साहब वहां सेक्टिव लोग जा रहे हैं। तो डार्क वेब भी ऐसे ही है। इन वो भी प्लेजर है। दैट इज आल्सो प्लेजर। तभी तो जा रहे हैं और वो एक अलग लेवल का है। मैं आपको जैसे यह तो कांटेक्ट किलर हायर करना या चाइल्ड पोर्नोग्राफी इटसेल्फ इज अ हीनियस क्राइम। आप यदि देखते भी हो ना तो भी आपको उतनी ही कठोर सजा होगी। जो क्योंकि मैं कहता हूं कि 60% तक उसमें है एस पर डाटा। यदि आप एक इंटरनेट वॉच फाउंडेशन की रिपोर्ट देखोगे कुछ समय पहले मैंने देखी तो उसमें उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा इस तरह का कंटेंट इंडिया से अपलोड होता है। उन्होंने कुछ ऐसा डाटा दिया था 11% या कुछ। सेकंड लार्जेस्ट डाटा दिया था 9% पाकिस्तान से अपलोड होता है। और फिर बांग्लादेश से दिया था 4.5% कुछ। तो मैं चौंक गया था। मैंने कहा कि यदि यह डाटा सही है तो हर चौथा वीडियो डार्क वेब पर चाइल्ड पोग्राफी का इन तीन कंट्री से जा रहा है 25% करीब और केस तो एक नहीं है थाने में तो फिर ये कौन लोग हैं जो सफर कर रहे हैं ये सच है डाटा का हमें यदि नहीं पता तो इसका मतलब यह नहीं कि वो हो नहीं रहा है एक 2000 चार या पांच की घटना है। मैं यहां सेक्टर 14 में रहता था नोएडा में किराए के घर में। तो जो हमारे यहां काम करती थी लेडी वो एक दिन आई कि भैया भैया मेरा दूसरा बच्चा भी गायब हो गया। मैंने कहा दूसरा बच्चा भी गायब हो गया। मतलब बोले अभी थोड़े दिन पहले पहला गया था दूसरा गायब हो गया। तो मैंने कहां रहते हो आप? पता-वता किया। मैंने थानेदार को फोन आया। बोले क्या मजाक है? बच्चा गायब हो गया। तो थानेदार ने सुना मेरी बात। बोले सर क्या करें? 250 बच्चे गायब होते हैं हर साल नोएडा से। बोले हैं? बोले हां। तो जब आप डाटा जानते हो ना तब आप झटका लगता है आपको कि यार ये क्या है यार? और फिर इनका हो क्या रहा है? कितने रिकवर होते हैं? अभी दिल्ली में एक मुहिम शुरू हुई थी तब रिकवर किए। कितने रिकवर हुए? यदि 2000 गायब होंगे तो 200 रिकवर हुए होंगे। तो कुछ चीजें ऐसी हैं सर जो इतनी हारश हैं। और हमारे आसपास ही हैं। पर हम इग्नोरेंट हैं। इसलिए हम वो दर्द नहीं महसूस करते। और मुझे खुद नींद नहीं आई के दिनों तक। मैंने कहा यार मैं क्या कर सकता हूं इसके लिए? मैं ढूंढ के भी नहीं ला सकता हूं। दूसरा बच्चा ये सच है सर। सब ये सब बातें सुन के लगता है हम हैवानों के बीच में इंसान रह रहा है। डार्क वे पनप ही नहीं सकता यदि कोई हर आदमी इंसान है तो। बट जैसे जो वेबसाइट सेक्सुअल चीजों को बढ़ावा दे रही थी। इंडिया में बैन लग गया। आप डार्क वेब पर भी बैन सरकारें लगा सकती हैं। डार्क वेब डिजाइन इस तरीके से किया गया कि आप बैन नहीं कर सकते। पहली चीज टेक्निकली नॉट पॉसिबल। अब उन चीजों पे आते हैं जो टेक्निकली बैन है। PUBG बैन है या TikTok बैन है। पर लोग चलाते हैं। देख रहे हैं कैसे? VPN इंस्टॉल कीजिए। उसके बाद आप एक्सेस कर सकते हो। तो टेक्निकली तो बैन नहीं कर सकते ना। तो जिसने करना है वो तो वीpए के संग भी कर ही लेगा। यूज़ वो तो डार्क वेब भी एक्सेस कर लेगा। और नॉर्मल आदमी वैसे भी नहीं कर रहा तो और डार्क वेब नॉर्मली वीपीए के थ्रू ही लोग एक्सेस करते हैं। तो फिर और मुश्किल हो जाता है। रेगुलेट करना, बैन करना और जिस तरीके से उसका प्रोटोकॉल डिज़ है टेक्निकली नहीं है पॉसिबल। सिल्क रोड करके एक वेबसाइट बनी 2011 में और वो रॉ सबाब करके बंदा था जिसने बनाई थी। किसी को नहीं पता था कौन है इसके पीछे वो ड्रग बेचता था ऑनलाइन यूएस में और यूरोपियन कंट्रीज में। एक टाइम ऐसा आ गया जब उसकी पर डे की सेल मेरे ख्याल से दो-ती मिलियन डॉलर की होने लगी। तो यूएस पार्लियामेंट में केस उठ गया कि भाई इसको रोकिए तो बहुत गड़बड़ है और ऐसा है वैसे। तो एफबीआई की एक टीम बनाई गई। उन्होंने कुछ हैकर हायर किए। कि उन्होंने कहा इस वेबसाइट को डाउन करो डार्क वेब के उन्होंने DS अटैक करने शुरू किए पर डार्क वेब पे DOS अटैक से कुछ ना होगा वो डायनेमिक सर्वर मूवमेंट होता रहता है तो वो सस्टेन कर जाते कुछ दिनों के लिए डाउन ही हुआ फिर सरफेस कर गए फिर उन्होंने दूसरे तरीके निकाले और इवेंचुअली रॉस अलब्राइट को अरेस्ट किया कैसे किया रॉसब्राइड एक लाइब्रेरी में बैठा हुआ था यह लोग गए गंसवंस लेके और उसको फ्री फ्रीज़ किया और उसका जो लैपटॉप था वो छीन लिया। वो लैपटॉप छीनना और लाइव था वो लॉक्ड इन था उसमें एज एन एडमिन सिल्क रोड एडमिन की तरह लॉग इन था। यदि वो लैपटॉप बंद कर देता तो वो लॉग आउट कर जाता। तो उसको कोई सजा ही नहीं होती। द ओनली एविडेंस जो उस समय रश अलबाइड के अगेंस्ट मिला एफबीआई को वह यह था कि उस समय यह एज एन एडमिन इस वेबसाइट पर लॉक्ड इन है। इसलिए इसी ने बनाई पकड़ा कैसे गया? जब उसका काम बढ़ने लगा तो उसको और लोग चाहिए थे हायर करने के। तो उसने जैसे.com जॉब साइट होती है। ऐसी जॉब पोर्टल्स थे वहां पर तो उसमें किसी जॉब पोर्टल पे उसने ऐड डाला जॉब का कि मुझे इस तरह के लोग चाहिए हायर करने के लिए और उसमें जो सडो नेम जिस नाम से ऐड डाला था वो उसने यूज़ किया वो वही था जो वो डार्क वेब पे यूज़ करता था। सेम तो जब वो सेंट किया गया कि डार्क वेब का सडोनम सरफेस वेब पे कहां यूज़ हो रहा है तो यह दिख गया क्योंकि सरफेस वेब पे जब आप एक्सेस करते हो तो आपका आईपी लॉक हो जाता है तो वो आईपी मिल गया वो आईपी वो लाइब्रेरी का था अब उस लाइब्रेरी में तो बहुत लोग आते हैं तो कैसे पता करें किसका है तो मॉनिटरिंग की गई दो पत्ते कौन आता है कब जाता है क्या करता है ऐसे करके और फिर धीरे धीरे धीरे ज़ीरो डाउन करके उसको आइडेंटिफाई किया गया फिर एफबीआई ने रेड की और उसको लैपटॉप छीना। इसका करीब दो साल केस चला। दो या ढाई साल 45 साल की सजा हुई और हर बार एफबीआई जब रेड करने के लिए इसके घर जाती थी तो कुछ और बिटकॉइन मिल जाते थे। अंत में कहा गया कि हमें पता ही नहीं कि इसके पास कितनी दौलत थी। और बीच में तो इसने एफबीआई के ऑफिसर्स को रिश्वत देनी शुरू कर दी। उनको बिटकॉइन दे देता था। उन पे भी केस चले। जो लेडी थी जो जज थी उसको थ्रेटनिंग कॉल आए। इसका लॉयर इतना स्मार्ट था रसलबाइट का कि उसने ऑलमोस्ट प्रीफ प्रूफ कर दिया था कि ये क्लीन है। उसने कहा कि यह जो एडमिन की तरह लॉग इन था था लेकिन ये इसकी वेबसाइट नहीं है। इसको एक बंदा है जापान में वो काम देता था। तो यह तो डेवलपर है। ओनर तो वहां है और उसी समय डार्क वेब का एक ऑपरेटर जापान में अरेस्ट हुआ था। तो उसने इसको उससे लिंक कर दिया। तो ऑलमोस्ट ये सिचुएशन बन गई थी कि निकाल निकल जाता हूं वहां से। लेकिन इसने शायद वो जो रिश्वत देनी शुरू कर दी उससे और फंसा और इसके बाद ये इंडिया में सबसे क्यूरियस केस किसी नेता का आया मतलब फनी जो आपको ऑकवर्ड सा लगा हो। बहुत आते हैं सर। क्योंकि हमारा फिल्म तो दिखाते हैं कि नेता जी समझ नहीं पाए लैपटॉप बंद कर रहे हैं। अनछ वीडियो देख रहे थे। एक चुनाव के पहले पिछले चुनाव के पहले एक रिक्वेस्ट आई मेरे पास एक नेता जी की। उन्होंने कहा कि सर आप एक वीडियो है। जिसमें मैं वो नेताजी एक महिला के साथ हैं। उसको एनालाइज करके आप एक सर्टिफिकेट दे दो कि यह डीप फेक वीडियो है। तो मैंने कहा भेज दो हम कर लेंगे एनालाइज। तो अक्सर नेता वायरल होते हैं महिलाओं के साथ। तो वो वीडियो आया मेरे पास। मैंने अपनी टीम को दिया। मैंने कहा आप एनालाइज करके यार दे दो थोड़ा अर्जेंसी है। जगह-जगह से फोन आ रहे थे। मैंने कहा फटाफट एक सर्टिफिकेट देना है। तो रात भर एनालाइज किया। सुबह टीम ने बोला सर हर फ्रेम सही है। [हंसी] कुछ भी डीप फेक नहीं है। तो मैंने फंस गया। मैंने कहा सर मैं तो नहीं दे पाऊंगा सर्टिफिकेट। अरे बोले कुछ नहीं है। यह कभी कोर्ट वोट में कोई जाएगा नहीं। आप दे दो। टिकटवेट का मामला है। टिकट मिल जाएगा। ऐसा है बस हमें सर्टिफिकेट चाहिए। आपका सर्टिफिकेट आपका नाम है। आपकी क्रेडिबिलिटी है। आपको लोग मानते हैं तो बहुत हो जाएगा। अब मैं बड़ा धर्म संकट बहुत फोन। तो मैंने अपने कुछ आईपीएस दोस्तों को फोन लगाया। मैंने कहा यार ऐसा प्रेशर है। मैं क्या करूं? मैं तो मर गया। तो बोले गलती से भी मत दे देना। बोले वो डेफिनेटली कोर्ट में जाएगी आज नहीं तो [हंसी] कल लेट ही। तो पंगे मत लो चुप रहो निकल लो तो मैंने क्षमा प्रार्थी मैंने कहा सर मेरे से ना हो पाएगा बात खत्म हो गई उन्होंने चुनाव लड़ा वो जीते [हंसी] तो मेरी बात हुई सर क्या हुआ फिर टिकट कैसे मिला बोले हमने वैसे ही एक डीप फेक बनवा लिया था [हंसी] उस पे सर्टिफिकेट ले लिया था जो वीडियो था कुछ काटा उसमें कुछ डीप फेक ऐड किया और फिर किसी को भेजा कि तो थोड़ा बहुत तो डीप फेक है ही तो किसी ने दे दिया होगा मतलब उसके बाद तो सर कुछ भी होता है [हंसी] का जुगाड़ है मतलब सही है अगर किसी का मान लीजिए कोई वीडियो वायरल हुआ था स्पेशली महिलाओं के लिए सवाल मेरा है लड़कियां बहुत परेशान होती है आपने कहा ना हमने बात की थी कि जिंदगी बर्बाद करना अगर किसी महिला के प्राइवेट वीडियोस को उसके बॉयफ्रेंड ने या अनइटेंशनली उसके फोन के थ्रू वायरल हो जाते हैं क्या करना चाहिए उस केस में एक वेबसाइट है स्टॉप एनसीआई डॉट आई स्टॉप नॉन कंसेंशुअल इंटिमेट इमेजेस नॉन कंसेंशुअल इंटमेट इमेज करके एक वेबसाइट जिस पर आप रिपोर्ट कर सकते हैं और उसके बाद वो वेबसाइट हर उस जगह से रिमूव करने के लिए अधिकृत है करती है एक तो यह एक्शन ले सकते हैं आप आमतौर पर पुलिस को जब आप इस केस में इन्वॉल्व करेंगे तो पुलिस ओसेंट नहीं करती। पुलिस नहीं ढूंढ पाएगी कि डाटा कहां कहां है। वह काम आप करते हैं या आप किसी को इंगेज कर लेते हैं कि अभी कहां पहुंच गया। क्योंकि आपको पता होना जरूरी है कहां कहां है। फिर आप कोर्ट से एक ऑर्डर लेते हैं। उस ऑर्डर के बेस पर उस वेबसाइट से वो रिमूव करवाया जाता है कंटेंट। यह एक नॉर्मल प्रोसेस है। पर इस नॉर्मल प्रोसेस में दिक्कत यह है कि जब तक यह सारा काम होता है, वह फैलता चला जाता है और वह वायरस की तरह उसकी कई कॉपीज बन जाती हैं। फिर आप यदि 30 40 50% हटा भी दें तब भी उसका डैमेज हो चुका होता है। पर प्रोसेस यही है। इसके अलावा और कुछ नहीं है। कई सारे ऐसी रिक्वेस्ट भी मेरे पास आती हैं कि आपने कभी कोई सेलिब्रिटी है। कभी किसी से झगड़ा हुआ और उसका कोई सीसीटीवी पर कैमरा रिकॉर्ड हो गया, वीडियो बन गया और उसके बीच में न्यूज़ आ गई और वो न्यूज़ इतना वायरल हो गई कि आज उस बंदे का नाम Google पर ढूंढोगे तो वही दिखती है न्यूज़। उसकी सारी अच्छाइयां छिप जाती है। वो कुछ एक छोटी सी बात जो इतनी बड़ी है कि वो हर जगह वही दिखती है। तो मेरे पास रिक्वेस्ट आई थी कि सर अब क्या करें? हटवाएं कैसे? वो तो न्यूज़ है। तो नहीं हटवा सकते। मैं आज तक को थोड़ी ना बोलूंगा कि हटा दे या नहीं। बट जैसे मैं अभी गया था इंग्लैंड में। मेरे कुछ फ्रेंड्स मिले। तो उन्होंने कहा कि लाइफ में कभी कोई कांड करना या तुम्हारे आसपास कांड करेगा [हंसी] तो उसको इंटरनेट से हम गायब करवा देते हैं या नीचे करवा देंगे कि वो सर्च लिस्ट में टॉप पे नहीं आएगा। यही करते तो मैं वही आ रहा था। द ओनली ऑप्शन इज कि मैं उसको हमने भी दोस्त बनाया है। इस तरह से एसइओ कर दूंगा कि वो सर्च में नहीं आएगा। हां। पर वो रहेगा। मतलब स्पेशली कोई उस लिंक पे जाएगा तो मिलेगा। लेकिन आप सर्च कितने पेज तक जाओगे? चार पांच पेज तक जाओगे वहां तक मैं हटवा दूंगा। हां। तो मैं बस आपके बारे में इतना पॉजिटिव कंटेंट डाल दूं कि वो जो नेगेटिव वाला है वो पीछे चला जाए। ये हो सकता है और वही पुश हो के टॉप पे आएगा। हां वो मैं उसको हिसाब से एसइओ करूंगा कि आपके जब भी आप सर्च होगा कीवर्ड्स वो कीवर्ड भी सर्च करोगे तब भी यही आएगा। मतलब पैसा हो तो कांड से भी आप बच सकते हैं। ये नहीं पूरी तरह नहीं मतलब फिर भी काफी डैमेज कंट्रोल। डैमेज कंट्रोल। ओके। जो मिडिल एज लोग हैं बहुत फोन के टेक्निकल चीजें नहीं जानते। मेरे पिताजी की उम्र के खासतौर पर लोग उनको आप क्या एडवाइस दोगे साइबर एक्सपर्ट होने के नाते कि जिंदगी कैसे आसान रखें अपनी? देखिए सबसे बड़ी एक चीज है कि आप कभी भी हम एक मॉडल बोलता हूं मैं जीरो ट्रस्ट मॉडल इंटरनेट पर चाहे वो WhatsApp मैसेज हो चाहे वो कॉल हो चाहे वो सोशल मीडिया मैसेज हो Facebook या Instagram आपका पहला रिएक्शन होना चाहिए कि मैं वेरीफाई करूं। मैं ट्रस्ट ना करूं इस पे। उसने कुछ मांगा आपसे, कोई इंफॉर्मेशन मांगी है, वो दोस्त बन के बात कर रहा है। हाउ डू यू नो दिस? जब तक आप वो टेंडेंसी नहीं अडॉप्ट करोगे, आप गलती कर जाओगे। तो इसको हम कहते हैं जीरो ट्रस्ट मॉडल फॉलो करना व्हेन यू आर कम्युनिकेटिंग विद समवन और इंटरनेट। इंटरनेट पर आप जब भी किसी से बात कर रहे हो जीरो ट्रस्ट से स्टार्ट करना। फिर आप ट्रस्ट धीरे-धीरे देखना कि यार हमने वेरीफाई किया है। शादी.com पर लोग लूट रहे हैं। मैट्रिमोनल साइट्स पर लूट रहे हैं। बंबल पर लूट रहे हैं। टेंडर पर लूट रहा है। क्योंकि ट्रस्ट कर लिया है। ट्रस्ट क्यों कर लिया? क्योंकि बंदा तैयार है। वो हिसाब से चार्मिंग है। स्मार्ट है। वो बातचीत लच्छेदार करके आपको ट्रस्ट तो बनवा ही देगा। आपकी जिम्मेवारी थी कि आप कैसे उस चीज को कॉन्शियसली चेक करें। तो यदि आपको चेक करना ही है तो मैं एक ऐप रिकमेंड करता हूं। mb आर करके एक ऐप है जो प्ले स्टोर पर भी है। क्या नाम है? mb आर एम ओ बी आई ए आर एम ओ यू आर प्ले स्टोर एप स्टोर दोनों पर मिल जाएगी। इसमें चार चीजें हैं जो आप चेक कर सकते हैं। पहला है क्यूआर कोड। अब क्यूआर कोड आप बहुत तरीके से इस्तेमाल करते हैं। विजिटिंग कार्ड एक्सचेंज क्यूआर कोड स्कैन कर लीजिए सर। वाईफाई कनेक्शन क्यूआर कोड कर लीजिए। आपका होटल का मेनू कार्ड सर क्यूआर कोड है। बिल क्यूआर कोड टिकट क्यूआर कोड, बोर्डिंग पास क्यूआर कोड, एडवर्टाइजमेंट क्यूआर कोड, पेमेंट तो क्यूआर कोड है ही। आप क्यूआर कोड से भरे हुए हो। अब ऐसे में कोई भी क्यूआर कोड मैं मैनपुलेट करके आपको नुकसान पहुंचा सकता हूं। सो इफ यू हैव टू स्कैन अ क्यूआर कोड वाई-फाई के लिए ही करना है। कैसे पता ये सेफ है अनसेफ है? तो पहले आप MB आर ऐप से स्कैन करेंगे तो वो सैंड बॉक्सिंग एनवायरमेंट में ले जाएगा। वहां रन करेगा और आपको एक क्लियर पिक्चर दे देगा कि ये सेफ है, अनसेफ है, अनसेफ है। तो क्यों? क्या यह आपका माइक्रोफोन ऑन कर रहा था, कैमरा या पैसे निकाल रहा था या डाटा ले रहा था? या कोई प्लगइन इंस्टॉल कर रहा था। दूसरा जो तरीका है जिससे लोग लूटते हैं वह है लिंक बेस फ्रॉड। कि आपको एक आरटीओ का चालान आ गया और आपने पैसे पे कर दिए। पता पड़ा वह तो फर्जी था। आपने Google पर सर्च किया मुझे होटल बुक करना है उड़ीसा में। आपको ऊपर बड़े-बड़े ब्रांड्स के होटल आ गए। आपने सोचा तो ब्रांड के नाम है अपने पर वो तो क्लोन है। आप सिंगापुर में क्रूज़ बुक कर रहे थे। Google पे आप कुंभ में रिसोर्ट वो जो आश्रम बुक कर रहे थे। अयोध्या में आश्रम बुक कर रहे लोग लुटे यह दिलजीत दुशांत का सौदा दिल्ली में लूट गए लोग टिकट बुक कर रहे थे तो ऑनलाइन आप Google पे सर्च करके जो भी लिंक मिल रहा है हाउ डू यू नो दिस इज नॉट क्लोन ऑथेंटिक है क्योंकि वो एचटीटीपीसी होगा तो आप वो लिंक एक बार मूवी आर्मर के थ्रू स्कैन कर लें। यह आपको बता देगा कि यह लिंक ट्रस्टवर्दी नहीं है क्योंकि दो हफ्ते पहले क्रिएट हुआ है। चाइना में होस्टेड है, टर्की में होस्टेड है, ईरान में होस्टेड है, क्रेडिबिलिटी रेटिंग क्या इसकी इसमें कोई मैलवेयर तो नहीं है। वो सारा एनालिसिस करके एआई के थ्रू आपको ग्रीन रेड बता देगा कि सेफ अनसेफ और इस पर आप फाइनेंसियल ट्रांजक्शन करें या ना करें। तीसरा होता है ऐप बेस्ड फ्रॉड। अब आप अपने फोन को कई बार बच्चों के संग भी शेयर कर रहे हो। पेरेंट्स ने कुछ इंस्टॉल कर दिया। हाउ डू यू नो दैट वो जो इंस्टॉल हुई है चीज वो सेफ है कि अनसेफ? एक-एक ऐप तो आप चेक करते नहीं। तो MB आर्मर आपके फोन में जितनी ऐप है सबको चेक करके आपको एक लिस्ट देता है कि इसमें रिस्की ऐप कितनी है रेड करके और उनकी रेटिंग और सेफ ऐप ताकि आप वो रिस्की ऐप हटा सकें और रिस्क क्यों है वो भी बताता है कि देखिए भाई इसलिए रिस्क है क्योंकि आप यह कांटेक्ट लिस्ट और पिक्चर दे रहे हो जिसका कॉम्बिनेशन खतरनाक है या आपने गेम इंस्टॉल कर लिया बच्चे ने और गेम में चैट फैसिलिटी है अब आप अपने बच्चे को रोड पर अनजान आदमी से 2 मिनट बात नहीं करने देंगे और उसी बच्चे के हाथ में आपने फोन दे दिया है जिसमें वो गेम खेल रहा है रोब्लॉक्स या Fortnite या जो भी इस तरह के गेम है जिसमें चैट फैसिलिटी है PUBG वगैरह और उसमें जो सामने वाला लोग हैं वो क्रिमिनल भी हो सकते हैं। हाउ डू यू नो दैट दे आर तो रिस्क इतना बड़ा है तो यदि कोई ऐसा गेम बच्चा खेल रहा है जिसमें चैट फैसिलिटी है तो वो भी आर्मर वर्न कर देता है कि नहीं नहीं ये सेफ नहीं है। कई बार ऐसे गेम्स में फैसिलिटी होती है कि आप चैट फैसिलिटी ब्लॉक कर दें। तो पेरेंट्स को पता होना चाहिए कि यदि बच्चे को वह गेम खेलना ही है तो एटलीस्ट ब्लॉक दैट फीचर सो दैट वह रिस्क कम हो जाए। वह भी मोबी आर्मर रेकमेंड करता है कि इसमें यह चेंज करके देन इट्स ओके। फिर उसमें वाई-फाई सिक्योर चेक टी चेक करने का फीचर है। क्या वाई-फाई आपका जो भी आप पब्लिक वाई-फाई या कहीं भी कनेक्ट कर रहे हो। इज इट सेफ और नॉट सेफ। मूवी आर्मर सेफ है। मूवी आर्मर सेफ है? क्योंकि हमने उसको एडवाइस किया है। [हंसी] अब आप सवाल यह करेंगे कि मूवी आर्मर सेफ है कि नहीं? इसीलिए हमने पूछा हमने कहा नहीं वही आता हूं। सबको तो वो चेक कर रहा है। पता लगा असली कातिल चाबी उसको दे दिया है। असली कातिल वही बैठा है। [हंसी] वो खुश हुआ। तो आपने क्या करना है? जब हमने खेल शुरू किया था तो मैंने आपसे बोला था कि आप प्ले स्टोर पे जाएं और जिस ऐप को आप चेक करना चाहते हैं, उसको सर्च करें। उसके बाद नीचे सी डिटेल्स करके एक ऑप्शन आएगा। सी डिटेल्स को चेक करके आपको बताया जाएगा कि यह आपका क्या-क्या डाटा लेता है। यह चेक तो आप जरूर करें। चाहे वो मूवी आर्मर ही क्यों ना हो या कोई दूसरी ऐप हो बहुत सारी और भी है ऐसा नहीं मूवी आर्मर मैं इसलिए एंडोर्स कर रहा हूं क्योंकि मैं खुद उसमें एडवाइजर हूं और पुलिस ने सब ने एंडोर्स किया उसको हर एक पुलिस की वेबसाइट पे आप देखना दो भारतीय पुलिस ने उन्होंने टेस्ट किया लेकिन इसको भी आप चेक कर लें। मैं तो कहता हूं जब एनम पे मैं डाउट करता हूं तो इस पे क्यों ना करूं? सो योर क्वेश्चन इसलिए हमने देखिए इम्प्र्टम्प्ट किया है तो रन आउट तो बात ही वहां से कर रहा हूं कि आप ज़ीरो टेस्ट पे खेलना है तो आप इसको Play Store के जो ज्यादा भरोसेमंद देखता है उससे पहले डाउट तो अरे जो सबसे कहता है कि भाई मैं मैं यही गड़बड़ है यही तो नहीं करना था [हंसी] वो लाल बटन ही तो नहीं दबाना था तो आप एक बार उस प्रोसेस से देख लें तो आपको पता पड़ेगा कि MB आर्मर आपका कोई डाटा नहीं लेता है। तो मोबाइल के सारे हम एप्स चेक कर सकते हैं उसके थ्रू। हां बट इट्स नाइस इट्स ईजी। सेकंड हैंड फोन लेना चाहिए। ले सकते हैं, लेकिन उसके लिए एक चेक कर लें। आप क्या करें? संचार्थी.gov.in पर जाएं। यह बहुत जबरदस्त इनिशिएटिव है सरकार का। इसमें छह सिटीजन सेंट्रिक सर्विज हैं। इसमें एक ऑप्शन है जहां आप चेक कर सकते हैं कि जो सेकंड हैंड फोन मैं ले रहा हूं वो किसी क्राइम में इस्तेमाल तो नहीं हुआ है। या चोरी का तो नहीं है। तो वहां पर आप आईएमआई फोन का चेक करेंगे तो बता देगा आपको कि यह फोन गड़बड़ है। इसको मत लो। अभी मेरे पास कई सारे केसेस आए भी कि साहब olx से iPhone लिया था। पेमेंट भी कर दिया। अब पुलिस का फोन आ गया है कि वो चोरी का जमा करो। तो क्या करें? हम तो पे कर चुके हैं। [हंसी] तुम भी एक एफआईआर कर दो और क्या है? तुम्हारे संग धोखाधड़ी हुई है। लेकिन यू कांट यूज़ दैट फोन। तो इमीडिएटली आपको सबमिट करना पड़ेगा। तो पहले आप scars.gov.in पर जाकर चेक कर लें। तब आप लें तो ठीक है। दूसरा उसमें एक ऑप्शन है कि आपके आधार कार्ड से लिंक कितने सिम कार्ड चल रहे हैं। ये चेक कर सकते हैं आप। कि आपका आधार लीक हो गया हो और किसी ने उससे सिम कार्ड। ये दुकान वाले बहुत बदमाश होते हैं। हां मतलब छोटा वर्ड यूज़ किया आपने। [हंसी] नहीं लोग समझ जाएंगे। हां। तो मुझे आई ट्रस्ट ऑन देयर इंटेलिजेंस। तो मैं कह रहा हूं कि वहां पर जाके आप आधार के थ्रू लॉग इन करेंगे तो आपको बता देगा कि आपके नाम से कितने सिम चल रहे हैं। और यदि कोई ऐसा सिम है जो आपने नहीं इशू कराया था तो वहीं से आप ब्लॉक करा सकते हैं। वही ऑप्शन है आपके हाथ में। आप ब्लॉक करा दो ब्लॉक। क्या वेबसाइट का नाम है? संचार साथी.gov.in नाइस। उसमें छह सिटीजन सेंट्रिक सर्विज हैं। पहला चोरी का फोन है कि नहीं? दूसरा आपके आधार से लिंक कितने सिम कार्ड चल रहे हैं। तीसरा है कि यदि आपका फोन चोरी हो जाए तो क्या करें? तो आप उसी वेबसाइट पर एक ऑप्शन है जिसमें आप रिपोर्ट करा दें तो वो फोन सारे ऑपरेटर पर सर्लेंस पे आ जाएगा। उसके बाद यदि किसी ने भी उसमें सिम डाली या नेटवर्क पर आया तो उसकी लोकेशन और सिम का डिटेल आपको डिटेल आ जाएगा। अच्छा जो ये फोन चोरी होते हैं और लोग कहते हैं गफार मार्केट में जाओ सारा मामला रफादफा आता है। [हंसी] हां होता है। ये क्या हिसाब किताब है? हमसे बहुत लोगों ने कहा कि चोरी फोन का फायर मार्केट बहुत जाता है दिल्ली में जाते आप और ये मैं आईएमआई भी मिटा देते हैं वो बिल्कुल आप iPhone का नहीं मिटा पाएंगे लेकिन हां में कई बार ऐसा हो ही जाता है गरीब आदमी बहुत चैट जीपीडी से पूछना सिंपल सा सवाल कि मेरा फोन चोरी हो जाए और मैं एक इन्वेस्ट या मुझे एक चोरी के फोन की रिपोर्ट लिख आई है कंप्लेंट आई है और मैं एक इंस्पेक्टर हूं या आईओ हूं तो मैं क्रिमिनल को कैसे पकड़ूं तो उसमें 1520 तरीके तरीके बताएगा। तो पहला तरीका होगा कि पहले तो Google से ट्रैक करो। यदि Android है, आई क्लाउड से ट्रैक करो यदि iPhone है, संचार साथी पर रिपोर्ट कर दो। सब बताएगा। उसके बाद बताएगा कि देखिए आप सीसीटीवी देखिए उस एरिया के बाइक का नंबर कोई दिख जाए इससे छीन के भागा। ऐसे फिर आज लोगों से पूछिए। आमतौर पर वहां पहले से चोर एक्टिव होते हैं। ऐसे करके वो गाइड देता है। लास्ट में देखा कि अब फोन चोरी हो ही गया है तो वो नॉर्मली ओएलx पे बिकता है या गफार मार्केट में बिकता है। ये लिखता है। [हंसी] आपकि दिल्ली के हैं तो मैं आपको शॉप का नाम भी बता सकता हूं। तो मतलब जो और भी नेहरू प्लेस की कोई शॉप उसका डिटेल देता है भाई वो चैट जीपीटी मैंने कहा व्हाट ये इतनी पब्लिक है सबको पता है ये मुझे नहीं पता था ये है सर और उसके बाद तो आप पहले ओलेक्स पे ढूंढिए शायद वो बिक रहा हो कहीं या आप इधर मार्केट में जाके पूछताछ कर सकते हैं एंड मेनी अदर हां आप उसको और भी बहुत सारे इंटरेस्टिंग तरीके बताए तो मैं चाह रहा हूं कि आप जानिए क्योंकि वो थरो इन्वेस्टिगेटिव अप्रोचेस दे देता है। व्हिच इज सम ऑफ दीज़ आर रियली फनी। यार ये तरीके भी चैट जीपीटी मुझे बता रहे हैं। बट फोन वापस मिलते हैं ये सब। हां हां। तो आप जब संचार साथी की वेबसाइट पे जाएंगे तो वहां पर डाटा है कि करीब आई थिंक 12 लाख फोन पिछले साल रिकवर हुए हैं। 24 लाख ब्लॉक हुए हैं। ऐसे करके कुछ डाटा है। करती है हमारे देश में पुलिस प्रशासन जैसा काम। रिपोर्ट और उसके फीडबैक्स पड़े हुए हैं। आप देखिए। अरे लोगों को पता ही नहीं है इसलिए तो लोग तो ये वाली रील अलग से निकाल के वायरल कर देना। [हंसी] लोग तो निकम्मी मानते हैं पुलिस को। नहीं मानते हैं फ़ गया तो गया। अब कहां मिलेगा भाई साहब? तो जो जिसको ले जाना था ले गया। नहीं नहीं मिलता है। देखिए आमतौर पे इसलिए नहीं मिलता है। iPhone के केस में तो बिल्कुल दिक्कत ये हो जाती है कि iPhone के पार्ट्स बिक जाते हैं। क्योंकि iPhone डिसेंटल हो जाता है। नेटवर्क पे आता ही नहीं है। ओके। हां। आएगा तो मिलेंगे। स्क्रीन महंगी होती है। ओ हो हो तो जितने का फोन नहीं होता उतने के पार्ट्स होते हैं। आप यदि आपका फोन का स्क्रीन टूट जाए iPhone का। आप चेंज कराने जाइए iPhone ऑथेंटिक सेंटर पर तो हो सकता है कि एक हफ्ते के लिए फोन रखवा भी ले और कहीं साहब वो तो मंगाना पड़ेगा और है ये आप फोन तो रखोगे नहीं आप और फिर पैसे भी ज्यादा लेगा क्योंकि वो तो ब्रांडेड चीज आ रही है आप जाओ गफार मार्केट वो 15000 में बदल देगा और तुरंत बदल देगा [हंसी] कहीं अभी दो मिनट रुकिए सर तो आप कन्वीनियंस भी है सस्ता भी है तो iPhone के पार्ट्स बिक जाते इसलिए गायब आता है सब चीज का जुगाड़ है। कहां से क्या काटोगे, क्या बेचोगे? डिजिटल फ्रिट प्रिंट हटा सकते हो। कम कर सकते हैं। पूरी तरह हटाना तो बहुत मुश्किल होता है। लेकिन आप जैसे कि आप जो दे चुके हैं हम जो डाटा ऑलरेडी Google के पास है जो ऑलरेडी प्लेटफॉर्म्स के पास है वो कैसे हटाएंगे? उसके लिए राइट टू डिलीशन नहीं है। वो राइट टू डिलीशन अब अप्लाई होगा। अभी जो डीपीडीपी एक्ट आया भारत का डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन उसमें है राइट टू डिलीशन कि अब आप किसी प्लेटफार्म को रिक्वेस्ट करके बोल सकते हैं कि भैया मेरा डाटा डिलीट कर दीजिए पर जो जा चुका है वो तो वो तो रहेगा ओके जैसे आजकल YouTube पे एआई वीडियोस बहुत बनने लगे हैं हम कि आपका वीडियो हमने बना के चिपका दिया इनको लेकर भी कोई लॉस है डिलीशन के लिए नहीं नहीं नहीं कोई भी एआई के लिए अभी अभी एआई की एक गाइडलाइन आई है। जैसे आजकल YouTube पे बहुत कॉमन हो गया कि सारे जितने भी लोग फेमस वो वो गाइडलाइन ये कहती है कि जो डीप फेक कंटेंट जनरेट कर रहे हैं चाहे और वो सोशल मीडिया पे आते हैं तो वाटर मार्किंग करनी पड़ेगी। आपको लिखना पड़ेगा कि ये डीप फेक है ताकि लोग बट अगर मैं अलऊ करना ना चाहूं। नहीं गाइडलाइन है ना गवर्नमेंट की गाइडलाइन है। यदि ऐसा होगा तो फिर टेक डाउन करा देंगे उसको। यदि हमने पकड़ लिया कि डीप फेक था और ऐसे सर्कुलेट हो रहा है तो प्लेटफार्म से उड़ा दिया जाएगा। Facebook से YouTube जो भी ऑथेंटिक प्लेटफार्म अब ऐसे WhatsApp पर छुप के घूम रहा है तो घूम सकता है वो तो पता ही नहीं किसी को बट YouTube पे ऐसे हजारों एप्स हजारों लोग बना ऑलरेडी इसीलिए गाइडलाइन लाई गई क्योंकि इसका मिसयूज़ इतना हो गया कि अच्छा और झूठ में और सच में विभेद करना मुश्किल हो गया। हां मेरे मेरे मैं परेशान हूं। हां हां दुखी इसलिए गाइडलाइन लाई गई है कि भैया आप कम से कम रोक लो। बट उससे कुछ होता ही नहीं है ना शिकायत करो YouTube पे शिकायत करो कुछ होता नहीं है। अभी शायद वो एग्जीक्यूशन में नहीं है। मेरा अभी आई है गाइडलाइन लास्ट वीक या 10 दिन पहले वो कुछ भी मेरे नाम पे चला जा रहा है। मैं रोज ऑफिस जाता हूं कहते हैं कि आज आपने कराची पे कब्जा करवा दिया। अच्छा ऐसा भी हो रहा है। अरे सब चल रहा है। कुछ भी बन जा रहा है। और मुझे मैं रियल लगता हूं। [हंसी] अभी क्या हुआ? बहुत सारे Google पे ऐड आते थे। स्पोंसर डैडी आते हैं ये सारे डी फेक वाले। तो तो सद्गुरु के अगेंस्ट कैंपेन चल रहा था और उसमें सद्गुरु को जेल में जाते हुए दिखाया जाएगा। पुलिस वाले हैं और लगातार Google पर स्पों्सर्ड ऐड चल रहा है और आप YouTube वीडियो देखोगे तो बीच-बीच में चारप ऐड आ ही जाएगा और वो है स्पॉन्सर्ड और आप उस लिंक को क्लिक करोगे तो वो रीडायरेक्ट कर जाएगा किसी ऐसी वेबसाइट पर जो इवेंचुअली Redit या कहीं पर ले जाएगा जिसका कि सोर्स मिलता नहीं है। और एक अंदाजा मैंने लिया कि यदि ये डेली इतने ऐड पुश कर रहे हैं तो कितना खर्चा कर रहे होंगे। हर इमेज डिफेक है। हर इमेज एआई से जनरेटेड है और पूरा आर्टिकल होगा उसमें। उस आर्टिकल में बहुत कुछ लिखा होगा लेकिन वो होगा रेडिट से लिंक करके और एक ही आर्टिकल चलाया जा रहा है। मतलब जब तक आदमी को लगने लगे उसकी डैमेज ना हो जाए। हम सो पिछले करीब 6 महीने से आई एम श्योर कि 50 60 करोड़ तो फूंका गया होगा। बाप रे। मतलब किसी के लिए सद्गुरु इतना खतरनाक मतलब वो इंपॉर्टेंट हो गया है कि आप ऐड चलाए जा रहे हो डीप फेक। अब देखो हम शायद पहचान भी लेंगे उसको देख के कि यार कहीं और न्यूज़ में तो है नहीं क्या है फालतू की न्यूज़ दिखा रहे हो क्योंकि आप अवेयर हो पर जो लोग नहीं है अवेयर वो कई बार उससे इन्फ्लुएंस भी हो जाते हैं और फिर और रेगुलरली चलता रहेगा तो ओपिनियन बन भी जाता है। मेरे आए वीडियो से लोग मेरे ऑफिस वाले परेशान उनको लगता है रियल है। तो मैं कहता हूं यार अगर तुमको लग रहा है तो फिर गांव बैठा आदमी तो क्या ही सोच रहा होगा। बिल्कुल उसने तो अभी तक सजा भी दे दी होगी मन मन में मन मन में कराची कब्जा हो गया भैया भैया कह रहे थे [हंसी] आधार कार्ड से क्या-क्या इन निकलती है आधार कार्ड से क्या-क्या इनफेशन निकलती है से ज्यादा आधार कार्ड से आधार कार्ड से क्या-क्या होता है आधार कार्ड से क्या-क्या हो सकता है आधार से आपका पैसा भी निकल सकता है एक्चुअली उसको एक सिस्टम को बोलते हैं एईपीएस सिस्टम आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम तो यदि आपके अकाउंट में एईपीएस इनेबल्ड है तो मुझे आपका आधार चाहिए और फिंगरप्रिंट चाहिए जिससे पैसा निकल जाएगा। तो अभी बीच में फ्रॉड होना बहुत कॉमन हो गया। यह फिंगरप्रिंट आप रजिस्ट्री डिपार्टमेंट से निकाल लेते थे लोग। जहां रजिस्ट्री कराते हैं ना लोग वहां से निकाल लिया। अबकि रजिस्ट्री हुई है। अभी पैसा आया उसके अकाउंट में तो यह भी पता है। और आधार तो आपका नंबर डालेंगे। बहुत सारे चैटबॉट है। आधार निकाल के दे देते हैं आपको। तो ये दोनों चीजें हैं तो पैसा निकल जाता है। पर उसमें लिमिट थी कि इतना ही निकलता है। तो वह जब निकलता था तो बहुत ज्यादा एकदम से लॉस तो नहीं होता था। जब आपको पता पड़ ही जाता था। पर होता था। तो सरकार ने एक रेगुलेशन लेके आई कि अब बाय डिफॉल्ट हर एक बैंक का एईपीएस डिसेबल कर दिया। मतलब आप यदि आधार से पैसा निकालना चाहते हो तो पहले आपको अपने बैंक में जाके वो इनेबल कराना पड़ेगा। तो अब वो रुक गए। अभी वो फ्रॉड नहीं होते। लेकिन आपके आधार से सिम इशू हो सकते हैं। आपके आधार से बैंक अकाउंट खुल सकता है। आपके आधार से कंपनियां खुल सकती हैं। आपके आधार से मेरे पास एक केस आया। एक लड़की थी। उसने Google ज्वाइन किया और बड़ी खुश और बोली कि भैया मुझे एक नोटिस आया एक जीएसटी डिपार्टमेंट से। मैंने टैक्स इविज़न किया है। मैं तुमने तो अभी कंपनी जॉइन की है। बोले मेरे नाम से मेरठ में कोई कंपनी खुली हुई है और उसने कुछ ₹1ढ़ ₹2 करोड़ का टैक्स इवज़न किया है। मैंने कहा अच्छा मैं फिर डिटेल निकलवाया। तो इसके आधार और पैन से ही लिंक्ड कंपनियां खुल गई। एक और मैं आपको बताऊं कि एक ईजी लोन करके एक प्रोविजन होता है जिसमें आपको कुछ चीज खरीदना है तो 15 2000 का लोन ले सकते हो। ऐसी बहुत सारी कंपनीज़ हैं जो ऑफर करती है। तो एक बहुत प्रोमिनेंट एक्टर हैं बॉलीवुड में। उनका मुझे कॉल आया। वो बोलते हैं कि अमित जी मैं मेरा सिविल स्कोर खराब हो गया। कैसे? बोले मैं घर नहीं ले पा रहा हूं यार। मैं मुझे वो वाले कह रहे हैं आपका सिविल खराब है। तो हमने इन्वेस्टिगेशन किया तो पता पड़ा कि उनके नाम से किसी ने 20,000 का लोन लिया हुआ है। और सिविल इसका खराब हो गया। तो अब यह प्रोसेस चलता कैसे है कि मान लीजिए मुझे अक्षय कुमार का पैन कार्ड नंबर चाहिए तो मैं Google पर सर्च करूं अक्षय कुमार तो पहला लिंक मिल जाएगा जिसमें उनका जीएसटी नंबर दिखेगा। आप ट्राई कर लो। उसमें से पहले ही कुछ डिजिट हटाऊंगा तो पैन कार्ड नंबर आ जाता है। अब मैं अक्षय कुमार नाम का एक लड़का ढूंढूंगा। उसका आधार लूंगा और एक पैन कार्ड बनाऊंगा जिसमें इनका पैन कार्ड नंबर डाल दूंगा। ठीक है? और उसमें फोटो की डालूंगा। अब यह फर्जी पैन और आधार के संग में उस कंपनी में जो बहुत ज्यादा वेरिफिकेशन नहीं करती सारी चीजों का। पहले क्रेडिट कार्ड भी इशू हो जाते थे। बहुत बड़े बहुत तो एक्टर्स का हुआ Google करना कम से कम 95 बॉलीवुड एक्टर्स के सिविल स्कोर खराब हुए थे। तो अभी भी चल रहा है। अभी इस तरह से हो रहा है। पहले क्रेडिट कार्ड इशू होते थे। क्रेडिट कार्ड कंपनी ने फिक्स किया इशू तो अभी ये लोन वाले में फंस गए लोग। तो वो यूज़ करके आप वो ईजी लोन ले लेते हो। यह कंपनीज़ यह चेक करती हैं कि यह पैन कार्ड ऑथेंटिक है मतलब पैन नंबर ऑथेंटिक है। वेरीफाइड हो जाता है। यह आधार ऑथेंटिक है? वेरीफाई हो जाता है। पर यह एक ही व्यक्ति का यह चेक नहीं करते। ये करने का कोई तरीका नहीं है। तो आधार किसी और का था, पैन किसी और का था। सिविल किसका खराब होगा? अक्षय कुमार का। [हंसी] तो ये तरीके हैं। बहुत है सर। अभी आप पूछते जाएंगे तो मैं प्रोबेबिलिटी इथेरियम एक चलती है। आप Lindin पे एक बंदे को एक मैसेज आया एक प्रोफेसर का किसी बहुत प्रोमिनेंट यूनिवर्सिटी से कि मैंने एआई एल्गोरिथम बना लिया। अब मैं शेयर मार्केट प्रेडिक्ट कर सकता हूं। तो उसने कहा अच्छा उसने प्रोफाइल फाइल देखा। एआईवाई का प्रोफेसर था वो। बोले यार मजाक कर रहा हूं। बोले नहीं ना कुछ भी प्रेडिक्ट हो जाएगा। तो बोला लिखो फिर यह शेयर लिखो कल इसका दाम बढ़ जाएगा। बड़ा प्रॉमिनेंट शेयर अगले दिन बोले मैंने देखा तो शेयर का दाम बढ़ गया था। मैंने कहा तुक्का लग गया होगा। फिर मैंने कहा देखो तुम मान नहीं रहे हो। क्रैक हो गई। अब ये वाला शेयर देखो इसका गिर जाएगा। तो बोले अगले दिन फिर मैंने चेक किया तो उसका दाम गिर गया था। दो बार तुक्का कैसे लगेगा? तब भी मैंने इग्नोर किया। मैंने कहा तुक्का लग रहा है ऐसे। बोले तुम नहीं मान रहे हो यह लिखो तीसरा शेयर होता है इसका कल बढ़ेगा बोले अगले दिन सुबह सुबह मार्केट खुला देखा तो 12 1:00 बजे तक बढ़ गया उसका मैंने कहा यार ये क्या है तीन बार एक ही आदमी सही कैसे हो सकता है बोला देखो तुम मान नहीं रहे हो मैंने शेयर मार्केट क्रैक कर दिया पैसा बना सकते हैं है इललीगल क्योंकि यदि एक्सपोज हो गए तो फंस जाएंगे तो बोले तुम क्यों नहीं बना लेते बोले मेरे पास है नहीं पैसा मेरे पास एल्गोरिदम है पैसा तो दूसरों से लेना तो मेरे अकाउंट में डालो मैं बना दूंगा। डबल ट्रिपल कर लेंगे। मैं अपना कट रख लूंगा। तो बोले मैंने कहने पर थोड़ा डाला तो बढ़ गया पैसा। फिर और डाला 15-20 लाख डाल दिया। इवेंचुअली जब विड्रॉ करने की बारी आई तो नहीं कर पाया। केस पुलिस के पास आ गया साहब। तो इस तरह के इन्वेस्टमेंट फ्रॉड चलते रहते हैं। इट्स वेरी कॉमन। लालच में है कि भाई डबल हो रहा है, ट्रिपल हो रहा है। लोग लौट जाते हैं। गेम ये था कि उसको ये कैसे पता था तीन बार कि शेयर का दाम बढ़ेगा या गिरेगा? ये कैसे कर रहा था वो? तो मैंने मेरा दिमाग अटक गया। मैंने फिर Google किया। हमने कहा ये कैसे कर सकता है कोई और तीनों बड़े प्रॉमिनेंट नेम इंसाइडर ट्रेडिंग हो नहीं सकती तो पता है कैसे करता था तो मैं बताऊंगा तो वही यह वाली जर्नी हो जाएगी आपकी नहीं जानने से लेकर जानने तक क्रिमिनल क्या करता है 60 लोगों से खेल शुरू करता है 30 लोगों को बोलता है कि इस शेयर के दाम बढ़ जाएंगे 30 को बोलता है कि इस शेयर के दाम गिर जाएंगे तो या तो बढ़ेंगे या करेंगे 30 के लिए सच सही होगी अब वो 30 को 151 में तोड़ देता 15 को बोलता है कि शेयर के दाम बढ़ेंगे। 15 को बोलता है शेयर के दाम गिरेंगे तो 15 या तो सही बढ़ेंगे घिटेंगे। तो 15 के लिए वो दो बार सही साबित हो गया। 30 वो फिर वो 15 को दोबारा में तोड़ेगा। सात और आठ में तोड़ देगा। सात को बोलेगा किसी तीसरे शेयर के बारे में बढ़ेगा। आठ को बोलेगा गिरेगा। इवेंचुअली तीन बार के बाद कम से कम सात या आठ लोग ऐसे होंगे जिनके लिए वो तीन बार बैक टू बैक सही साबित हुआ है। अब उसमें से एक या दो भी फंस गए तो हो गया ना खेल 25 30 लाख तो पीट लेगा। यह चल रहा है जादूगर का जादू कहते हैं आप पता है तो देखिए अब आपको लगेगा यार यह क्या तरीका है यार कितना ये मासूम वाला था ये अच्छा फ्री वाली चीज का क्या करें सर आजकल जितने एप्स आते हैं वो सब फ्री आते हैं या बहुत सारे प्रीमियम ऐप है जो फ्री फ्री फ्री दे देते हैं खर्चा काहे करें एक्चुअली तो हमारे दिमाग में बैठ गया है कि फ्री ही होता है सब कुछ अभी कोई पैसा मांगने लगे तो हम उसको डाउटफुल देखने लगते हैं कि ये पैसा क्यों मांग रहा है जब हर चीज जिंदगी में फ्री ही मिल रही है। तो एक चीज मैं हमेशा कहता हूं कि इस दुनिया में कुछ भी फ्री नहीं है। इफ यू आर यूजिंग एनीथिंग फ्री देन यू आर द प्रोडक्ट। ये लोग जो आपका इतना डाटा ले रहे हैं। Facebook का देखा हमने Google का देखा हमने जो भी है। क्यों ले रहे हैं? इसलिए कि आपको ऐड दिखाना चाहते हैं। आपको साबुन तेल सब्जी बेचना चाहते हैं। इसलिए नहीं ले रहे हैं। यह तो वो टीवी के जमाने से दिखा रहे हैं ऐड कि सुबह से शाम तक लक साबुन का ऐड दिखाएंगे तो आप दुकान में जाकर मांग लोगे क्योंकि दिमाग में भर दिया आपके ऐड नहीं दिखाना है। यह इतना डाटा इसलिए ले रहे हैं जिसमें आपकी पॉलिटिकल आईडियोलॉजी, रिलीजियस, फाइनेंसियल सब कुछ है। क्योंकि वो आपको कंट्रोल करना चाहते हैं। बिकॉज़ वी ऑल आर द प्रोडक्ट ऑफ द डाटा। उफ Gmail कैसे हैक करते हैं साहब? आपने जैसे मुझसे कहा था, मैंने आपसे पूछा था कि मेरा मोबाइल फोन आप हैक कर दोगे। आपने कहा नंबर दो। नहीं Gmail एज इट इज हैक हम करना इतना आसान नहीं होता। लेकिन आप कुछ गलतियां करते हैं। जैसे मैं बताऊं क्या आपका Gmail आपके फोन आपके फोन में आपने फेस रिकग्निशन भी लगा रखा है। आपने पिन बेस भी लगा रखा है। आपने बायोमेट्रिक भी लगा रखा है। लेकिन आपके फोन के अंदर जो Gmail है वो आपके लैपटॉप में भी लॉग इन होगा। आपके टेबलेट में भी हो सकता है। आपके एक पुराने फोन में भी होगा जो डैशबोर्ड में पड़ा है जिसको आप शायद भूले बैठे हैं। पॉसिबिलिटीज है या आपके ऑफिस के किसी और सिस्टम में भी लॉक्ड इन हो। आपका वो जो Gmail है उसका एक्सेस किसी को 15-20 सेकंड के लिए भी मिल गया तो वो आपकी जिंदगी में कलाई क्रिएट कर सकता है। कैसे? आप अपने जहां पे भी Gmail लॉग इन है लैपटॉप में वहां जाना। ब्राउज़र पे लिखना है google.com डैशबोर्ड। तो अपने फोन का डाटा वहां एक्सेस कर सकते हो पूरा। फोन की पिक्चर्स, वीडियोस, YouTube पे क्या देखा, कब देखा, क्या लाइक किया, कैसे आपके ईमेल तो खैर लॉग इन है तो देखोगे ही। आपकी लोकेशनेशंस पिछले कई सालों की आपके बैंक अकाउंट डिटेल्स आपके पासवर्ड्स आपके ब्राउज़र हिजिस्ट्री मतलब बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो बैकअप्स जिसमें चैट बैकअप भी हो सकते हैं। फोटो बैकअप भी हो सकते हैं। कई बार आप स्क्रीनशॉट भेजते हो तो वो तो इमेज होती है। सीधे सिंक हो जाती है। सो लॉट्स ऑफ़ डेटा यू कैन सिंपली एक्सेस बाय जस्ट टाइपिंग Google.com जिसमें आपने Gmail लॉग इन कर रखा है। क्योंकि आपका Gmail ऑलरेडी लॉक्ड है इसलिए उसके बाद यदि आप उस ब्राउज़र पर खोलें Play Store तो वो आपसे पूछता है कि और Play Store खोलेंगे तो वो Gmail लॉक्ड इन है आपका। द सेम Gmail इज़ देयर व्हिच इज़ इन योर फोन तो आप उस लैपटॉप से फोन के अंदर कुछ एप्लीकेशन भी इंस्टॉल कर सकते हैं। रिबली क्योंकि वो पूछता है कि फोन में इंस्टॉल करना है, टीवी में इंस्टॉल करना है, कहां करना है? उसमें ऑप्शन आता है ब्राउज़र पे। आप बैकअप कोड्स भी निकाल सकते हैं। बैकअप कोड्स टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन के लिए होता है। हम एक तरह से बोले तो फ्यूचर ओटीपीस जो आप यूज़ कर सकते थे आगे आते हैं। तो Google के आप सेटिंग्स पे जाएं। वहां सिक्योरिटी के अंदर मल्टीफैक्ट ऑथेंटिकेशन का जहां ऑप्शन होता है टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन का वहां पर ओटीपी बेस सिक्योरिटी, ईमेल बेस सिक्योरिटी, ऐप बेस सिक्योरिटी और दुनिया भर के ऑप्शन है। लास्ट ऑप्शन आता है Google बैकअप कोड्स। आप उसको क्लिक करेंगे तो आप 10 ओटीपी एडवांस में डाउनलोड कर सकते हैं। अब यह Facebook भी देता है आपको व्हिच यू कैन यूज इन फ्यूचर लेटर ऑन। अब यदि किसी को यह मिल जाता है लॉकडाउन तो वो निकाल लेगा ना। तो आप हैक करने को है सीधे-सीधे हैक नहीं होता। होता क्या आपकी कोई एक गलती है और उसकी वजह से फीचर था वो। दैट फीचर हैज़ बीन मिसयूज्ड। और उसकी वजह से फिर आपका कुछ भी हैक हो रहा है। एक बार Gmail हैक होगा तो फिर हम आगे एक्सेस जा सकते हैं। उसमें ओटीपी आ रहे हैं। किसी बैंक अकाउंट के ओटीपी आ रहे हैं या किसी और सर्वर के क्रेडेंशियल्स रिकवर किए जा सकते हैं। तो हो जाएंगे फॉरगेट पासवर्ड करके। एक शायद आउट ऑफ द बॉक्स क्वेश्चन पूछ ले रहा है। एंड में बड़ा कॉमन चलता है कि आप किसी होटल में जाइए। कैमरे चेक करने हो। कैमरे चेक करना मतलब कि कमरे में छे हिडन कैमरा तो नहीं है। हां हां कैसे करें? देखिए वैसे तो एक ऑथेंटिक तरीका होता है कि एक डिवाइस आती है जो लेंस चेक करती है तो उसको आप पूरे कैमरे में घुमाएंगे तो वो जो लेंस होगा ना उस लेंस को डिटेक्ट कर लेती है कि इसमें कहीं पे भी कोई छोटा भी लेंस होगा ना जो देख रहा है आपको बेसिकली दैट इज़ वन वे ऑफ़ डूइंग इट। दूसरा एक आरएफ स्कैनर आता है। वो आरएफ स्कैनर क्या करता है कि यदि वह डाटा ट्रांसमिट हो रहा है कहीं और उसके अंदर कहीं कोई मॉडम है तो उसको डिटेक्ट कर लेगा। वो भी 4 5000 की डिवाइस मिल जाती है। आरएफ स्कैनर वो आप जाएंगे। जैसे हम लोग जब किसी वीआईपी के आने से पहले एंटी सबटाज एक्टिविटीज करते हैं क्लीन अप करते हैं तो वो देखते हैं कि कहीं कोई हिडन डिवाइस माइक्रोफोन क्योंकि वो ट्रांसमिट कर रहा होगा तो ब्लिंक करने लगता है तो वैसे ही करता है। क्लीन अप प्रोसेस करता है। यही दो तरीके हैं जो अभी और भी बहुत सेंसिटिव रिसीवर्स भी आते हैं। जैसे इसमें तो आप पास ले जाकर ही कर पाते हो। पर अब बहुत सारे कमर्शियल इक्विपमेंट आ गए हैं जो रूम में रख के ही डिटेक्ट कर लेंगे। दे कैन पर उसमें प्रॉब्लम होती है कि आपको बाकी सारे जैसे वाई-फाई ऑफ करना पड़ता है। उस रूम के अंदर कोई दूसरा सिग्नल तो नहीं आ रहा। वरना उसकी वजह से वो ब्लिंक करने लगता है। सो वी टेक केयर ऑफ़ दैट। जैसे किसी घर को आपने देखना है तो WhatsApp पे जानकार लोग जादू करके जादू दिखाते हैं। मोबाइल लाइट मारो ये सब से कुछ नहीं होता है। सब फर्जी वाला है। वो सब ऐप में फर्जी है। है ऐप लेकिन वो मुझे नहीं 100% कुछ होता है लाइट मारो या ये लगाओ वो वो बहुत इफेक्टिव नहीं है। क्योंकि बहुत सारी चीजें ऐसी है जो नहीं कर सकते वो डिटेक्ट। तो है बहुत सारे कैमरा डिटेक्ट कर सकते हैं कर सकते हैं। बट आई वोंट रेकमेंड बिकॉज़ मैंने ट्राई किए हैं जो जो वो बहुत इफेक्टिव नहीं थे। मेरी गाड़ी में किसी ने ट्रैकर लगाया तो कैसे पकड़ूं मैं? [हंसी] अरे मेरे एक दोस्त का किस्सा है भाई। उसने अपनी बीवी गाड़ी में लगा दिया था कि बीवी कहीं जाएगी तो हमको पता रहेगा। और वो किस्मत देखिए उसको एक्चुअली वो गाड़ी भी दहेज में मिली थी। [हंसी] और ये रियल कहानी है। देखिए उसको उससे भी ज्यादा आसान तरीके थे ट्रैक करने के। उसको नहीं पता था। एक सूरत में एक मर्डर हुआ और हमें डाउट था कि हस्बैंड ने मारा है। लेकिन हस्बैंड उस दिन गोवा में था और उसने होटल में चेक इन भी किया था। फोन कॉल्स भी थे उस समय तो कोई एविडेंस नहीं बन रहा था। तो मैंने डीसीपी साहब को बोला कि एक बार Google डैशबोर्ड चेक कर लो। Google डैशबोर्ड चेक किया तो जो मैंने आपको बताया जिससे हम लोकेशन देख सकते हैं आपकी। तो उसकी दो लोकेशन आई। उस दिन एक सूरत में आई और एक गोवा में आई। तो कारण यह था कि इन भाई साहब ने दृश्यम पिक्चर देख ली थी। तो इनको पता था कि पुलिस फोन तो ट्रैक कर लेती है। तो इन्होंने अपने एक दोस्त को फोन दिया और उससे कहा कि तू मेरा आईडी ले जा। गोवा में रूम बुक है। आप जाना मेरे नाम से चेक इन करना और फोन वो करते रहना दो चार तब तक मैं यहां काम कर लूंगा। इस बीच उन्होंने एक दूसरा फोन लिया और उसमें सेम Gmail से लॉग इन कर दिया। [हंसी] तो उसकी दो लोकेशन आ गई। अब आप कहोगे नहीं मैं तो ना अलग Gmail से लॉग इन करूंगा। [हंसी] जो ऑडियंस होगी वो कहेगी इतना बेवकूफी थोड़ी ना करूंगा तो कर लीजिए मैं तब भी पकड़ लूंगा [हंसी] अब वो तरीका नहीं बताऊंगा क्योंकि ये तरीका 10 साल पुराना है जब ये पक हुआ था केस इट्स टू ओल्ड अब तो हमारे पास इससे ज्यादा सोफिस्टिकेट तरीका यदि आप फोन यूज़ नहीं भी करोगे तो भी पकड़ लेंगे यदि आपका फोन आइडल रहेगा तो भी पकड़ लेंगे कुल मिलाकर आपकी चर्चा में हमने एक बात समझी है जो हमने पिक्चर देख के समझा वो ये था कि छोटा वाला फोन यूज़ करो [हंसी] उसके पकड़े जाने के चांसेस कम होते हैं। देखिए छोटे वाले फोन में भी हैक होने के चार पांच तरीके तो बता ही दिए मैंने आपको। कॉल फॉरवर्डिंग तो उसमें भी सेट हो जाएगा। फिर भी मतलब उसमें तामझाम कम है तो जिंदगी आसान रहे। लिमिट हां रिलेटिवली आसान है। रिलेटिवली डेफिनेटली आसान है। क्योंकि उसमें डाटा ही नहीं है तो चुरेगा क्या? मतलब उससे जाएगा क्या बाहर? जिस फोन में डाटा ही नहीं है। उसी का तो खतरा है क्योंकि उसमें एक्टिविटीज का डाटा है आपकी। तो जितना आप स्मार्टफोन लेते चले जाएंगे उतना वनरेबल होते चले जाते हैं। आने वाले टाइम में यह साइबर क्राइम कितना बड़ा खतरा है। सर आने वाले टाइम में साइबर क्राइम ही होगा। किसी के पास इतनी फुर्सत नहीं है कि गन दिखा के रोड पर लोगों को लूटे। अब कौन इतना रिस्क लेगा? क्योंकि इतने सीसीटीवी लगे हैं कहीं ना कहीं तो दिख ही जाएगा। तो हम आराम से इसी कमरे में बैठ के लूटेंगे। जैसे मेरे मन में कई बार एक ख्याल आता है कि मैं आज 10 साल हो गया मैं यूपीआई यूज़ करता हूं। हम मैंने कैश यूज़ करना बंद कर दिया। हम दावा करते हैं कि इंडिया सबसे ज्यादा कैशलेस इकॉनमी है। किसी दिन अगर यह हमारा सिस्टम हैक हो गया। हम क्या हम बर्बाद हो जाएंगे और क्या यह हो सकता है क्योंकि दुनिया में सारी चीजें हुई हैं। तो यह होता क्या है कि जब भी कोई ऐसा ऑनलाइन सिस्टम बनाया जाता है तो उसको डिजाइन ही इस तरीके से किया जाता है कि वो पूरा एक साथ बंद हो ही ना। यदि हो गया तो तो डेफिनेटली बर्बाद हो जाएंगे। पर उसका रिस्क देखकर उसको इस तरह से प्रोविजन किया जाता है। जैसे चाइना को लेकर अक्सर आरोप लगता है कि वह हमारे यहां हैक करने की कोशिश करता है। करता ही है। आरोप नहीं लगता है। वो तो हमने एट्रिब्यूट प्रॉपर्ली किया। जब मुंबई ग्रेट अटैक हुआ था। पावर बिजली चली गई थी। तो चाइना ने ही किया था। वो तो महाराष्ट्र साइबर ने इन्वेस्टिगेट करके सोर्स भी आइडेंटिफाई किया था। जब एम्स का अटैक हुआ तब भी हांगकांग का ही आईपी निकला था। तो बहुत सारी ऐसी चीजें हैं जो जानतेबते भी हम कुछ कर नहीं सकते। ठीक है? वहां से चाइना का अटैक यूएस में भी हुआ। यूएस ने एट्रिब्यूट किया। यूएस ने बोला कि चाइना का अटैक है तो क्या कर लोगे आप? चाइना थोड़ी ना मानेगा कि हमने किया। ये तो इंफ्रास्ट्रक्चर है। कहीं का भी यूज़ हो सकता है। और जब अटैक चाइना से होगा तो चाइना का आईपी मिलना जरूरी नहीं है। ऑपरेशन सिंधू ने मारा बगल में छोटू जो पाकिस्तान है। उसी ने कोशिश कर रहा था। कोशिश की उतनी वेबसाइट अटैक हुई थी। झंडावंडा चेंज करने की कोशिश। [हंसी] आदमी अपनी औकात के हिसाब से करता है। तो देखिए और ये कोई ऐसा नहीं है कि एक टाइम पे शुरू होगा, एक टाइम पे खत्म होगा। यह कोशिश तो लगातार होती रहती है। साइबर वॉरफेयर इज अ कंटीन्यूस प्रोसेस। आप फिजिकल युद्ध की तरह नहीं होता है। ये तो मौका देखेंगे कब कौन सी वैलएबिलिटी मिलेगी। उड़ा देंगे। तो अब अगला सबसे बड़ा युद्ध यही है। युद्ध चल रहा है। निपटेगा। इसमें कौन-कौन ये देखना होगा। ये युद्ध कंटिन्यूस कोई देश बर्बाद हुआ साइबर वॉर में अब तक या इतना बर्बाद डेंट हुआ। नहीं नहीं हां देखिए हुआ। डेंट तो बहुत हुए लोगों को डेंट तो अब जो भी बड़े-बड़े अटैक हुए हैं सऊदी अरामको का जैसे अटैक हुआ। इनफैक्ट मैं एक और चीज बोलूं जैसे कि इजराइल पर जब मिसाइल अटैक हुआ हमास का जो गया जबकि उनका डिफेंस सिस्टम डिफेंस सिस्टम था जो डोम सिक्योरिटी डोम है तो मेरा मानना है कि वो इसलिए हुआ क्योंकि उससे पहले एक साइबर अटैक सक्सेसफुल हो चुका था। वो डिफेंस सिस्टम डिसेबल किया गया फॉर दैट पीरियड। तभी तो हुआ। वरना ऐसे कैसे हो सकता है कि इतनी हजारों मिसाइलें चली जाए और वह एक भी डिटेक्ट ना हो फॉर दैट पीरियड। तो यदि मुझे यह भी पता है कि मैं इस तरीके से भेजूंगा कि वो डिटेक्ट नहीं कर पाएगा। वो भी हैक ही है। बिकॉज़ आई हैव अंडरस्टुड दी गैप इन द सिस्टम। या मैं उसको डिसेबल करके करवा दूं। आइदर इट्स हैक। तो वो तो हुआ था ना। वो तो हमें दिख रहा था। वरना अब क्यों नहीं कर देते? कर दे। अब तो नहीं मार पा रहे मिसाइल। इसका मतलब है देयर इज अ डिफेंस सिस्टम इन प्लेस बट दैट डिडंट वर्क एट दैट टाइम। इसका मतलब है एक साइबर अटैक उससे पहले हुआ उस पीरियड के। बहुत सारी चीज़ जैसे इंडिया में 261 का अटैक हुआ। तो उसमें भी मानता हूं कि कहीं ना कहीं साइबर एंगल इन्वॉल्व था। मानता हूं कराची से मुंबई पोर्ट तक एक बोट सीधे तो आई नहीं है। पहले वो रास्ते में किसी और मछुआरे को उन्होंने कब्जा लिया। उसकी बोट ली उसके बाद आए। और इस पूरे एरिया में पेट्रोलिंग होती है जो कोस्ट गार्ड होते हैं और उनकी जो बीटिंग होती है उसका पैटर्न रैंडम होता है। वो पहले से डिसाइड नहीं होता कि वो उस दिन डिसाइड होगा या उसके एकद दिन पहले। इसका मतलब है कि वो मतलब उसकी पूरी तरह पेट्रोलिंग नहीं कर सकते। तो क्या करते हैं? एरिया डिफाइन कर लेते हैं कि यहां से यहां तक की करेंगे। फिर उसके आगे जाके यहां से यहां तक की करेंगे। तो यदि आप सीधे लाइन पे आओगे तो प्रोब्ली पकड़े जाओगे कहीं ना कहीं। जब तक आपको वो नहीं पता है कि कैसे आना है कि आप नजरों से छिपे रहो तब तक आप सीधे-सीधे आगे तो नहीं पहुंच सकते। दैट इटसेल्फ कुड बी लीग्ड और उनको यह पता पड़ गया हो कि इनका इस दिन यह पैटर्न रहता है। व्हिच इज आल्सो ए अ साइबर लीक। तभी तो वो कर पाएंगे। तो मैं छोटी-छोटी नएसेस आप कैप्चर करने की कोशिश करोगे तो पता पड़ेगा कि आजकल बिना साइबर एंगल के जब यह श्रद्धा वालकर वाला केस हुआ जिसमें वो गर्लफ्रेंड को 35 टुकड़ों का टुकड़ा पूरा इन्वेस्टिगेशन साइबर एंगल से हुआ YouTube पे वो क्या देख रहा था कब उसने वो चाकू खरीदा फ्रिज कब खरीदा उसने कहां-कहां गया वो Google डैशबोर्ड से मिला कि यहां यहां बॉडी पार्ट फेंकने गया फिर वहां जाता था फिर हर चीज उसमें मिल गई ना पूरा सीक्वेंस ऑफ इवेंट्स तो उसी से तो प्रूव हुआ कि यह तो है तो आप अपनी लाइफ में कई बार नहीं पता कितना डाटा दे रहे हो थ्रू वेरियस एप्लीकेशन एंड प्लेटफ विल बिकम पुख्ता सबूत। यह प्राइमरी एविडेंसेस होते हैं ये जो Google के थ्रू आते हैं क्योंकि आपके फोन में नहीं होते। यह Google से मिलता है इनका सर्टिफिकेट। आपका फोन बदलता रहे, टूट जाए, खराब हो जाए, डाटा कहीं नहीं जाएगा। डाटा वहां है और उनसे पुलिस वाले मांगेंगे तो मिलता है और उसके बाद सर्टिफिकेट ही मिलेगा और वह कोर्ट में एज इट इज प्राइमरी एविडेंस बन के पेश होता है। तो ये इतना बड़ा रिस्क है। तो मतलब आपसे बात करके मुझे एहसास हो रहा है कि मैं अपना फोन कूच के फेंक दूं। लैपटॉप बंद कर दूं। Gmail हमेशा के लिए डिलीट कर दूं। [हंसी] तो मैं एक शांत जिंदगी जी सकता हूं। जिसमें मेरा कुछ हैक नहीं होगा। [हंसी] कुछ ब्लैकमेल नहीं किया जाएगा। मेरा पैसा कोई लूटेगा नहीं। मैं रादर और बड़ा स्टैंड हूं। देखिए आपका कुछ हैक हो भी जाए तो क्या बदलने वाला है यदि आपको पता है बस इतना सा ध्यान रखिए हम इस चीज का स्ट्रेस क्यों ले रहे हैं यदि आज की डेट मुझे बोले कि मेरी लोकेशन हर जगह पता सबको पता है तो मुझे कोई स्ट्रेस होता नहीं ठीक है पता है तो मुझे इसका कोई रिस्क नहीं मुझे नहीं लगता हो सकता है किसी को लगता भी हो यदि आपको पता है कि आपके फाइनेंसियल रिकॉर्ड्स बाहर हैं हां ठीक है आपके हेल्थ रिकॉर्ड्स बाहर हैं हां ठीक है बिकॉज़ आई नो इट शायद मैं नहीं जानता फिर कहता पता मुझे ऐसी चीज पता है तो मुझे खतरा होता। बस इतना ही अंतर है जो मैं बेसिक्स इससे डरने की बात नहीं है। मैंने जो दो घंटे जो भी आपको बताया यदि आप डर गए हैं तो मेरा पर्पस फेल हो गया है। पर यदि आप कॉन्फिडेंट हुए हैं कि नहीं अब तो मुझे पता है। अब मुझे कोई इस तरीके से बेवकूफ नहीं बना पा तो मेरा पर्पस काफी हद तक सिद्ध हुआ। थैंक यू सो मच। आपसे बात करके बहुत सारी चीजें जानने को मिली। उम्मीद करते हैं अगली बार जब हम मिलेंगे तो सब्जेक्ट बेस्ड चीजों पे हम विस्तार से और चर्चा करेंगे। हमारी कोशिश थी कि पूरा रायता समेट लें। [हंसी] एक मिक्स वेज बनाएं। नहीं इसीलिए और हां मैं इसलिए बोलूं क्योंकि कई बार होता है कि लोग कहते हैं कि सर आपने वही कहानी सुनाई तो पहली बार जब आप किसी से डिस्कशन करो तो हर चीज वो बतानी जरूरी होती है जो फंडामेंटल है। एक बार आपका फाउंडेशन बन जाता है। देन यू कैन इवॉल्व। यदि मैं आपको बेसिक्स को स्किप कर दूंगा। कई बार मैं स्किप करने की कोशिश कर रहा था यू ट्राई टू नहीं नहीं सर वो क्लियर करो क्या आईपीडीआर क्या होता है बताइए। अब मैं इतनी बार आईपीडीआर बता बता चुका हूं। मुझे लगा कि आईपीडीआर तो पता है सबको पर नहीं पता होगा या सीडीआर ही नहीं पता होगा या बहुत सारे शब्द मैंने शायद बोल दिए हो जो नहीं पता हो तो आई थिंक समटाइ्स वी नीड टू बी लिटिल स्लो इन फर्स्ट एपिसोड। फिर आप बोलोगे तो शायद समझ जाएंगे। हां वो दर्शक भी वो उनको समझ आता है कि हां ये किस का्टक्स्ट में चल रहा है। तो कोशिश थी कि कम से कम एक फाउंडेशन बन जाए एंड रेस्ट आई ट्रस्ट ऑन योर इंटेलिजेंस। अच्छा एक और चीज मैं अच्छी बताऊं जब बच्चों के लिए मैं बोलता हूं ना तो बच्चों को भी मैं कभी डूज एंड नोट्स नहीं बताता। बच्चों से लोग सबसे ज्यादा परेशान है कि टीनएज बच्चा है। असर कैसे उसका क्या कर रहा है मोबाइल पे पता नहीं होता कुछ हो जाएगा। बहुत सारे केसेस आ रहे हैं। तो मेरे को बुलाते हैं काउंसलिंग कर दीजिए। तो मैं काउंसलिंग करता हूं। और मैं उसको कुछ डोंट्स नहीं बताता। और काउंसिल करके आ जाता हूं। क्योंकि हमारे दिमाग में डोंट्स प्रोसेस होते नहीं है। मैं आपसे कहूं शुभंकर जी डोंट थिंक अबाउट एफेंट। हाथी दिखाई पड़ेगा। तू सबसे पहले हाथी देखेगा। [हंसी] बच्चे को बोला डोंट रन डोंट रन। तो वो दौड़ेगा। आप बोलो गो स्लो तो शायद रुक जाए। यह मेरा स्टाइल है। तो मैं उसको सिर्फ यह बता देता हूं कि बेटा रिस्क क्या है? रोबॉक्स का रिस्क क्या है? PUBG का रिस्क क्या है? और लास्ट में जाते-जाते बोलता हूं कि यह रिस्क है। अब मैं आपके इंटेलिजेंस पर ट्रस्ट करता हूं कि आप सही निर्णय लेंगे। द मोमेंट यू गिव रिसोंसिबिलिटी टू देम। आई थिंक बच्चे तो इतने समझदार हैं। तो यही तरीका यदि इस्तेमाल करेंगे तो शायद हम कुछ हद तक कंट्रोल कर पाएंगे। बंद करने से कुछ नहीं होगा। मतलब नेपाल हो जाएगा बंद करने से। क्रिमिनल तो आपको मारेगा ही। आपकी जिम्मेदारी है। बॉडी संभालिए। आपकी जिम्मेदारी है। [हंसी] हैकर तो हैक करेगा ही। आपका सर दर्द है। आप फ़ोन संभालिए। वो तो लेके बैठा हुआ है। अच्छा वो तो लेके बैठा हुआ है। [हंसी] वो तो मारेगा ही। उसका काम वही है। उसको कैसे रोक लोगे? आपकी जिम्मेदारी है [हंसी] चैन से सोना है तो जाग जाइए। जाग जाइए। सोइए मत। सन्नाटे को चीरती हुई सनसनी। [हंसी] लवली टॉकिंग। फिर से बजा दी हमने। 12 से 12:30 बजा [हंसी] दी। मुझे खुद लग रहा है आज सुबह 8:00 बजे से भूल जा [हंसी] रहा हूं। चल भाई समय समाप्त दुकान समेटो। [हंसी]